राजस्थान के बंजर में होगी बिजली की खेती

अपने रेगिस्तानी टीलों और रेतीली जमीन के लिए फेमस राजस्थान के किसानों के लिए अच्छी खबर है. क्योंकि उनकी बंजर जमीनें भी अब सूरज की मदद से सोना उगलने के लिए तैयार हैं. राजस्थान अक्षय उर्जा कॉरपोरेशन लिमिटेड इस काम में किसानों की मदद करेगा. 

राजस्थान के बंजर में होगी बिजली की खेती
राजस्थान सरकार कराएगी किसानों के लिए अतिरिक्त आय

जयपुर: राजस्थान के किसान अब अपनी बंजर जमीन से भी कमाई कर सकते हैं. राजस्थान रिन्यूएबल एनर्जी कॉरपोरेशन लिमिटेड ने बंजर जमीनों पर सोलर पैनल लगाने का टेंडर जारी किया है. 

ये है प्रक्रिया
राजस्थान की जमीनों पर सोलर पैनल लगाने के लिए जयपुर, जोधपुर और अजमेर संभाग के डिस्कॉम कार्यालयों में आवेदन किए जा सकते हैं. विभागीय आदेशों के अनुसार 31 दिसंबर तक किसान सौर ऊर्जा संयत्र लगाने के लिए सहायक अभियंता कार्यालय में आवेदन कर सकेंगे.

इस प्रस्ताव के जरिए किसानों की आय में इजाफे के लिए प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा और उत्थान महाअभियान के तहत विभिन्न चरणों के किसानों को लाभ दिया जाएगा। 

पर्यावरण के लिए सुरक्षित है ये प्रोजेक्ट
प्रदेश के किसान अपनी बंजर जमीन से सौर ऊर्जा की खेती कर सकेंगे. कुसुम योजना के जरिए इस जमीन से भी किसानों की आय बढ़ाने के प्रयास किए जाएंगे. इसका फायदा उठाने के लिए विद्युत सब स्टेशन से पांच किलोमीटर के दायरे के किसान इस इस योजना के द्वारा अपनी आय बढ़ाने में सक्षम हो पाएंगे. 

राजस्तान के ऊर्जा मंत्री डॉ बीडी कल्ला ने बताया कि सरकार का उद्देश्य ग्रीन बिजली विकल्पों को बढ़ावा देना है. इसके लिए औद्योगिक इकाईयों और आवासों के साथ किसानों पर भी फोकस किया जा रहा हैं. 

 किसान अब खेत के कुओं और ट्यूबवेल का संचालन सौर ऊर्जा से कर सकेंगे, बिजली कनेक्शन की जगह 60 फीसदी सब्सिडी पर सोलर सिस्टम को मंजूरी मिली है.  इस बिजली को जयपुर, अजमेर और जोधपुर डिस्कॉम सहित अन्य विद्युत कंपनियां खरीद भी सकेंगी. 

किसान करेंगे बिजली का व्यापार
सरकार ने किसानों से नेट मीटरिंग के जरिए बिजली खरीदने के लिए 3.44 रुपए प्रति यूनिट की कीमत तय की है. केंद्र सरकार की कुसुम योजना में पहले चरण में 37 हजार किसानों को योजना का पात्र माना गया है. 

 इसमें 25 हजार नए और साढ़े 12 हजार पुराने कनेक्शनों पर सोलर सिस्टम की सब्सिडी देने का लक्ष्य तय किया है.  इसमें 30 फीसदी केंद्र और 30 फीसदी राज्य सरकार अनुदान देगी, इसमें से 30 प्रतिशत राशि नाबॉर्ड की ओर से लोन में प्रदान की जाएगी.  दस प्रतिशत राशि किसानों को देनी होगी.  

परियोजना पर सरकार देगी सब्सिडी
राजस्थान ऊर्जा विभाग की ओर से जारी आदेशों के अनुसार एक मेगावाट क्षमता के लिए साढ़े तीन करोड़ रुपए से चार करोड़ रुपए का खर्च संभावित हैं. इससे एक वर्ष में 17 लाख यूनिट विद्युत उत्पादन होगा. इससे किसानों को सालाना 48 लाख रुपए की आय होने की उम्मीद है. 25 वर्ष की तय अवधि में यह आय 12करोड़ रुपए तक हो सकती है. 

वहीं ट्यूबवेल पर 15 एचपी का सोलर सिस्टम लगाने पर करीब चार लाख रुपए खर्च होंगे.  नए ट्यूबवेल व कुओं पर सोलर सिस्टम लगाने का काम हॉर्टिकल्चर विभाग करेगा. पुराने बिजली कनेक्शनों पर सोलर सिस्टम लगाने का काम डिस्कॉम को दिया है.  ट्यूबवेल के पंप से दुगनी क्षमता का सिस्टम लगाया जाएगा, ताकि ज्यादा बिजली डिस्कॉम को मिल सके.  इससे प्रसारण सिस्टम पर होने वाला खर्च बचेगा और किसानों को आय भी होगी.

केंद्र और राज्य सरकार की इस पहल का लाभ किसानों को मिलना तय हैं, इसका लाभ राज्य सरकार पर कृषि कनेक्शन पर दी जा रही सब्सिडी में कमी के रुप में भी देखने को मिलेगा.  जिसका भविष्य में असर डिस्कॉम्स की आर्थिक मजबूती के रुप में भी देखा जा सकता हैं. 

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