बंगाल के इस स्कूल में छात्र खुद उगा रहे हैं मिड डे मील

बंगाल के बीरभूम जिले का एक स्कूल पूरे देश के छात्रों के लिए मिसाल कायम कर रहा है. यहां छात्र अपना मिड डे मील खुद ही उगा रहे हैं. इससे छात्रों को स्वावलंबन के साथ बागवानी और कृषि कार्यों की भी प्रैक्टिकल शिक्षा हासिल हो रही है. 

बंगाल के इस स्कूल में छात्र खुद उगा रहे हैं मिड डे मील

बीरभूम: यहां के एक सरकारी स्कूल के छात्र और छात्राएं अब स्कूल में ही सब्ज़ी की खेती कर रहे है और उसी सब्ज़ी से स्कूल का मिड डे मील तैयार किया जाता है. 

छात्र करते हैं कुदरती खेती
खास बात ये है कि इस स्कूल के छात्र अपनी सब्जियां उपजाने के लिए किसी तरह की रासायनिक खाद का इस्तेमाल नहीं करते. यहां पूरी तरह जैविक तरीके से खेती की जाती है. 

इस स्कूल का मूल उदेश्य यह है कि जैविक उर्वरकों का इस्तेमाल कर के ही स्कूल के बागान में खुद के सब्ज़ी का उगाई जाए. जिसके बाद इन सब्जियों से मिड डे मील तैयार किया जाता है. 

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शिक्षा का उद्देश्य आत्मनिर्भरता
स्कूल की इस पहल का उद्देश्य यहां पढ़ने वाले बच्चो को आने वाले समय में आत्मनिर्भरता की सीख देना है. जिससे यहां के बच्चे आने वाले समय में देश का नाम उज्जवल कर सकें. इसी सपने को साकार करने के लिए जदुराई हाई स्कूल के प्रधान शिक्षक एवं स्कूल शिक्षकों ने यह अनूठा कदम उठाया है. 

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स्कूल के प्रधानाचार्य की है प्रेरणा
जदुराई हाई स्कूल के इस अनूठे कदम के पीछे जिनका हाथ स्कूल के प्रधान शिक्षक डॉक्टर कल्याण भट्टाचार्य का. जो पिछले 19 सालों से स्कूल के विकास के लिए परिश्रम कर रहे हैं. 

डॉक्टर कल्याण भट्टाचार्य ने वनस्पति विज्ञान में मास्टर की डिग्री हासिल की है. उन्होंने बीरभूम जिले की लाल मिटटी की उर्वरता वृद्धि के लिए रिसर्च भी किया था और PHD भी पूरी की. उसके बाद साल 2000 में वो प्रधान शिक्षक के तौर पर जदुराई हाई स्कूल में आए. 

प्रधान शिक्षक के तौर पर योगदान देने के बाद से ही उन्होंने इस सपने को देखना शुरू किया और अपने इस सपने को हकीकत में बदलने के लिये उन्होंने उत्साहित होकर काम करना शुरू किया. अपने इस अथक परिश्रम में उन्हें सफलता भी मिली. 

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राष्ट्रपति पुरस्कार से हैं सम्मानित
डॉ. कल्याण भट्टाचार्य को साल 2017 में राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कार भी दिया गया है. इस हाई स्कूल से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर वक्रेश्वर थर्मल पावर स्टेशन है जहां पर मौजूद राख को उर्वरक में बदलकर बगीचे में उसका उपयोग किया जाता है. 

जदुराई हाई स्कूल के बागान में बैंगन , लौकी , कद्दू , पपीता जैसे अन्य कई सब्ज़ियों की पैदावार होती है. 

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मिड डे मील के लिए नहीं है निर्भरता
अब तो सर्दियों के इस मौसम में स्कूल के अंदर ही मशरूम की खेती भी हो रही है. स्कूल के अंदर ही खाद का उत्पादन भी किया जा रहा है. खास बात यह है कि यह खाद थर्मल पावर से निकली ज़हरीली parthenium से बनाई जाती है.

इस बड़ी उपलब्धि का श्रेय केवल प्रधानाचार्य डॉ. कल्याण भट्टाचार्य को जाता है. स्कूल के पास के ही एक तालाब में मछलियों का पालन भी हो रहा है. यह सभी खाद्य पदार्थ को स्कूल में पढ़ने वाले एक हज़ार स्कूली छात्रों को मिड डे मील के तौर पर दिए जाते हैं.