स्वीडन को अन्ना का गांव सीखा रहा है पानी बचाने का तरीका

जल संकट की समस्या से पूरा विश्व त्रस्त हो चुका है. ऐसे में जल आपूर्ति और संरक्षण के लिए हर दिन नए-नए तकनीक का इजात किया जाने लगा है या फिर किसी न किसी मॉडल को अपना रोल मॉडल बना कर जरूरतों की आपूर्ति की जा रही है. स्वीडन के गॉटलैंड में पानी संकट की समस्या से जूझने के लिए समाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे के गांव रालेगण सिद्धि का सहारा लिया जा रहा है. 

स्वीडन को अन्ना का गांव सीखा रहा है पानी बचाने का तरीका

नई दिल्ली: स्वीडन के एक द्वीप गॉटलैंड के लोगों ने जलसंकट की समस्या के लिए रालेगण सिद्धि में जल संरक्षण के लिए अपनाए जा रहे तरीकों पर शोध करने की कवायद शुरू कर दी है. यह महाराष्ट्र का एक छोटा सा गांव है जो संयोगवश समाजिक कार्यकर्ता और जन लोकपाल आंदोलन के नायक अन्ना हजारे का पैतृक निवास है. इस गांव में भूजल रिचार्जिंग परियोजना यानी कि जमीन के पानी को दोबारा पाने की विधि पर काम करना शुरू कर दिया है. वैज्ञानिकों ने इस पर शोध शुरू भी कर दी है. 

गॉटलैंड के दक्षिणी हिस्से में सूखे की मार झेल रहे लोग

IVL स्वीडिश पर्यावरण अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ स्टॉफेन फिलिप्सन ने कहा कि गॉटलैंड का दक्षिणी हिस्सा भारी जलसंकट झेल रहा है. पानी की इतनी कमी है कि जरूरतों के लिए उत्तरी हिस्से से पानी मंगाया जा रहा है. यहीं नहीं इसके लिए जलशोधन विधि को भी प्रयोग में लाया गया. लेकिन कुछ खास फायदा न हो सका. यहीं नहीं पानी की समस्या से निपटने के लिए बाल्टिक सागर के पानी को भी शुद्ध कर के इस्तेमाल में लाए जाने की कोशिश की गई लेकिन इसके खारेपन और अधिक रसायनों व ऊर्जा की मात्रा इसे पीने योग्य नहीं रहने देती. 

यह भी पढे़ं: पर्यावरण संरक्षण दिवस विशेष: इतने प्लास्टिक कचरे से तो चार बार ढंक जाएगी धरती

भारत के रालेगण सिद्धि में शोध के लिए भेजे वैज्ञानिक

इसके बाद स्वीडन के गॉटलैंड द्वीप के साथियों को आईवीएल की एक भारतीय मूल की विशेषज्ञ रूपाली देशमुख ने पानी को बचाने या यूं हम जिसे जलसंचय कहते हैं उसका एक उदहारण दिखाया. उन्होंने बताया कि भारत के गांवों में पानी के संचय की विधि काफी परंपरागत और इस्तेमाल में लाई जाने लायक है. फिर क्या था स्वीडन के वैज्ञानिकों को इसके अध्य्यन के लिए भेज दिया गया जो अपने साथ नवीनतम सूचना प्रौद्योगिकी साधनों के साथ आए थे. 

यह भी पढ़ें: हर बूंद सहेजने का तरीका सिखाता है यूपी का ये मंदिर

एक जैसी है स्ट्रॉसड्रेट और रालेगण सिद्धि की भौगोलिक स्थिति

शोध में पाया गया कि स्ट्रॉसड्रेट और रालेगण सिद्धि की भौगोलिक स्थितियां कुछ खास अलग नहीं, एक जैसी ही है. अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञ स्टॉफेन फिलिप्सन ने बताया कि स्ट्रॉसड्रेट में बारिश तो खूब होती है, बस पानी को संचय कर के रख पाने की समस्या है. उस चुनौती को पार करते ही यहां पानी की समस्या से बहुत हद तक निपटा जा सकता है. गर्मियों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सके, इतनी बारिश तो हो ही जाती है. 

रालेगण सिद्धि के परंपरागत जल संचय के तरीकों से मिली प्रेरणा

फिलिप्सन ने यह भी कहा कि "भारत का एक छोटा सा गांव है रालेगण सिद्धि जहां से हमें पानी सहेजने की प्रक्रिया की प्रेरणा मिली है. उसी गांव की तरह अब हम परंपरागत तरीकों से जलसंचय के लिए तालाब, बांध और पोखरों का निर्माण कर रहे हैं, ताकि वर्षा के पानी को बचाया जा सके और साफ पानी की जरूरतों को पूरा किया जा सके. स्वीडन में इससे पहले इस तरीके का प्रयोग नहीं हुआ है. फिलहाल वे छोटे-छोटे बांध बना रहे हैं. जमीन के जल को बढ़ाने या दोबारा पाने के लिए प्राकृत्तिक स्थलों की पहचान की जा रही है और तो और बारिश के पानी को बर्बाद होने या समुद्र में जाने से रोका जा रहा है. इसके लिए कई-एक उपकरण इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं."