उत्तराखंड में बढ़ रहा है एडवेंचर स्पोर्ट्स का चलन

क्या आपने हवा में रोमांच का अनुभव किया है? जमीन से सैकड़ो मीटर ऊपर हवा से बातें की है. चिड़ियों की तरह हवा में करतब दिखाए हैं. अगर हवा और ऊंचाई से आपको डर नही लगता तो फिर भीमताल- नौकुचियाताल की वादियां आपको बुला रही है. आईए आपको रोमांच की एक अलग दुनिया में लेकर चलते हैं.

उत्तराखंड में बढ़ रहा है एडवेंचर स्पोर्ट्स का चलन

नैनीताल: उत्तराखंड के इस इलाके में पिछले कुछ वर्षों से साहसिक पर्यटन का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है. यहाँ हवा में रोमांच का पर्याय बन चुका है पैराग्लाइडिंग.

ये इलाका बन चुका है एडवेंचर स्पोर्ट्स का हब
यूं तो नैनीताल के रामगढ़, मुक्तेश्वर, भीमताल, सात ताल और नौकुचियाल में माउंटेन बाइकिंग, जिपलाइन, रिवर क्रासिंग, रॉक क्लाइंबिंग की गतिविधियां संचालित हो रही है.  लेकिन पैराग्लाइडिंग जिस तेजी से बढ़ रहा है उससे भीमताल नौकुचियाताल की अर्थव्यवस्था को बेहद फायदा हो रहा. जिसकी वजह से ये पूरा इलाका एडवेंचर स्पोर्ट्स का हब बन रहा है.

हालांकि सुविधाओं की है कमी
नैनीताल में एडवेंचर स्पोर्ट्स की गतिविधियां तो बढ़ रही हैं. लेकिन कुछ दिक्कतें भी सामने आ रही हैं. पैराग्लाइडिंग की अप्रोच संकरी और खस्ताहाल है. जो टेक ऑफ और लैंडिंग के स्थान है,  वहां पर सुविधाओ की कमी है. राज्य सरकार ने पैराग्लाइडिंग की नीति तो बना दी लेकिन युवाओं को ट्रेनिंग के लिए हिमाचल का रुख करना पड़ रहा है. युवाओं की मांग है कि राज्य सरकार की तरफ से भीमताल नौकुचियाताल में ट्रेनिंग कैम्प लगाए जाए. एडवेंचर स्पोर्ट्स की सबसे बड़ी खूबी है कि बरसात को छोड़ कर पूरे साल भर सैलानी यहाँ आते रहते है.

सुरक्षा के लिए प्रशिक्षण जरुरी
पैराग्लाइडिंग में जितना रोमांच है, उतना ही सेफ्टी का भी ध्यान रखना पड़ता है. हर पैराग्लाइडिंग पॉयलट को प्रशिक्षित होना जरूरी है. उड़ान भरने से पहले रिजर्व पैराशूट जरूरी है और एक बार आपने उड़ान भर दी फिर तो आप हवा से बातें करने के लिए उन्मुक्त हैं.

12 कंपनियां कराती हैं पैराग्लाइडिंग
पैराग्लाइडिंग के लिए भीमताल नौकुचियाताल क्षेत्र में करीब 12 पैराग्लाइडिंग कंपनियां को राज्य सरकार ने लाइसेंस दिया है. ये पूरा इलाका पैराग्लाइडिंग के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है. सैलानियों को भी पैरा ग्लाइडिंग के रोमांच का जमकर लुफ्त मिल रहा है. हर दिन दिल्ली, राजस्थान, यूपी, दिल्ली, केरल, पश्चिम बंगाल, पंजाब, हरियाणा और उत्तराखंड के युवा यहां आते हैं.

प्रशासन की कोशिश इस इलाके को एडवेंचर हब बनाने की है.  लेकिन विशेषज्ञ बताते है कि अभी और कोशिश की जानी जरूरी है. यहां ट्रैवल एजेंसियों को बुलाना चाहिए. जिलाधिकारी भी भविष्य में भी और कार्यक्रम आयोजित कराने की योजना बना रहे हैं.

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