क्या है प्रधानमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, एक क्लिक में A to Z नॉलेज

Digital Health Mission: सरकार डिजिटल हेल्थ मिशन के तहत हर किसी का यूनिक हेल्थ कार्ड बनाएगी. Just Like आधार कार्ड. और ठीक आधार नंबर की तरह आपको एक यूनिक आइडेंटिटी नंबर मिलेगा. 

Written by - Vikas Porwal | Last Updated : Sep 25, 2021, 06:52 AM IST
  • 6 राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में हुआ था लागू
  • 27 सितंबर को इस योजना को लॉन्च करेंगे पीएम

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क्या है प्रधानमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य मिशन, एक क्लिक में A to Z नॉलेज

Digital Health Mission: 15 अगस्त 2021. लाल किले पर तिरंगा लहराने के बाद पीएम मोदी अपना ऐलानिया भाषण दे रहे थे. इसी दौरान उन्होंने कहा- देश हेल्थ सेक्टर में भी आत्मनिर्भर बनेगा. इसी के साथ उन्होंने ‘नेशनल डिजिटल हेल्थ मिशन’ की बात की. इसे प्रधानमंत्री डिजिटल स्वास्थ्य मिशन भी कहा जा रहा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने बताया कि 27 सितंबर को पीएम मोदी इस योजना की लॉन्चिंग करेंगे.

क्या है योजना
ये योजना क्या है, इसमें कैसे काम होगा और देश का हर नागरिक इसका कैसे लाभ ले पाएगा, इन सारे जरूरी सवालों के जवाब हम यहां आपको दे रहे हैं. सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि PM-DHM का पायलट प्रोजेक्ट छह केंद्र शासित प्रदेशों अंडमान- निकोबार, चंडीगढ़, दादरा-नगर हवेली और दमन-दीव, लद्दाख, लक्षद्वीप और पुडुचेरी में लागू किया जा चुका है. यहां पर क्या-क्या हो रहा है, इसे ध्यान से समझिए.

सबसे पहले क्या होगा कि सरकार इस मिशन के तहत हर किसी का यूनिक हेल्थ कार्ड बनाएगी. Just Like आधार कार्ड. और ठीक आधार नंबर की तरह आपको एक यूनिक आइडेंटिटी नंबर मिलेगा. इसी नंबर से स्वास्थ्य के क्षेत्र में व्यक्ति की पहचान होगी और डॉक्टर इसी नंबर से उस व्यक्ति का पूरा रिकॉर्ड जानेंगे.

ये हैं फायदे
अब आप कहेंगे कि नंबर से क्या फायदा? तो दोस्त आपके लिए सबसे बड़ा फायदा तो ये है कि जब आप डॉक्टर को दिखाने जाएंगे तो फाइल ले जाने से छुटकारा मिलेगा. डॉक्टर या अस्पताल रोगी की यूनिक हेल्थ आईडी देखकर उसका पूरा डेटा निकालेंगे और सभी बातें जान सकेंगे. उसी आधार पर आगे का इलाज भी शुरू हो सकेगा. ये कार्ड ये भी बताएगा कि आप किन-किन सरकारी योजनाओं का लाभ ले रहे हैं या फिर आपको आयुष्मान भारत योजना का लाभ मिलता है या नहीं.

अगला सवाल, ये कार्ड बनेंगे कैसे? सो सिंपल. आपका मोबाइल नंबर और आधार नंबर लिया जाएगा. इन दो रिकॉर्ड की मदद से यूनिक हेल्थ कार्ड बनाया जाएगा. इसके लिए सरकार एक हेल्थ अथॉरिटी बनाएगी जो आपका या किसी का भी हर एक डेटा जुटाएगी. जिस व्यक्ति की हेल्थ आईडी बननी है, उसके हेल्थ रिकॉर्ड जुटाने के लिए हेल्थ अथॉरिटी की तरफ से इजाजत दी जाएगी. 

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हर मरीज का पूरा मेडिकल डेटा रखने के लिए अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर्स को एक सेंट्रल सर्वर से लिंक किया जाएगा. यानी इसमें अस्पताल, क्लीनिक और डॉक्टर भी रजिस्टर होंगे. वैसे अभी सरकार इसे सबके लिए अनिवार्य नहीं करेगी, लेकिन कोशिश यही है कि धीरे-धीरे हर कोई इस सिस्टम में आ जाए, जिससे व्यक्तिगत स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखना आसान हो जाएगा.

इस तरह बनेगा कार्ड
सबसे जरूरी और आखिरी सवाल, हेल्थ आईडी बनेगी कहां पर? तो लीजिए ये भी बता देते हैं. इसका जवाब है कि पब्लिक हॉस्पिटल, कम्युनिटी हेल्थ सेंटर, हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर या नेशनल हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर रजिस्ट्री से जुड़ा कोई भी सर्विस प्रोवाइडर किसी की भी हेल्थ आईडी बना सकता है. आप चाहें तो खुद भी अपनी आइडी बना सकते हैं. बस healthid.ndhm.gov.in/register पर जाइए,  खुद के रिकॉर्ड्स रजिस्टर कराइए और अपनी हेल्थ आईडी बना लीजिए.

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