हम साधारण ऑक्सीजन को सिलेंडरों में क्यों नहीं भर सकते, जानिए कैसे बनती है मेडिकल ऑक्सीजन

मेडिकल ऑक्सीजन को खास वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाता है. इसे पहले लिक्विड फॉर्म में तैयार किया जाता है, फिर इसे क्रायोजेनिक टैंकरों में भरकर सप्लाई किया जाता है. 

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Apr 21, 2021, 05:36 PM IST
  • ऑक्सीजन गैस को लिक्विड फॉर्म में कैसे बदलते हैं
  • जानिए क्या होता है क्रायोजेनिक टैंकर
हम साधारण ऑक्सीजन को सिलेंडरों में क्यों नहीं भर सकते, जानिए कैसे बनती है मेडिकल ऑक्सीजन

नई दिल्ली: कोरोना महामारी ने हमारे देश की लचर स्वास्थ्य व्यवस्था की कलई खोलकर रख दी है. आज देश के कई राज्यों में अस्पताल ऑक्सीजन की कमी से जूझ रहे हैं. 

देशभर में मरीज बेड, दवा और ऑक्सीजन के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं. अभी हमारे देश में जितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता है, उससे भी कम ऑक्सीजन का उत्पादन देश में हो रहा है. 

ऐसे में कई लोगों एक मन में यह सवाल उठता है कि हम जिस ऑक्सीजन को हवा से सांस के रूप में लेते हैं, हम उसे सिलेंडरों में क्यों नहीं भर सकते.

इस सवाल का जवाब यह है कि हवा में मौजूद ऑक्सीजन में नमी, धूल या दूसरी गैस जैसी कई अशुद्धियां होती है, जिसे मरीजों को नहीं दिया जा सकता. 

मरीजों को जो ऑक्सीजन दी जाती है, वह 98 प्रतिशत तक शुद्ध होती है. इस ऑक्सीजन को खास वैज्ञानिक तरीके से तैयार किया जाता है. इस ऑक्सीजन में कोई अशुद्धि नहीं होती, जिस कारण मरीजों को इसे सांस के रूप में लेने में कोई तकलीफ नहीं होती. 

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कैसे बनती है मेडिकल ऑक्सीजन

हमारे वातावरण में मौजूद हवा में मात्र 21% ऑक्सीजन होती है और इसमें कई अशुद्धियां होती है. मेडिकल ऑक्सीजन को खास वैज्ञानिक तरीके से बड़े-बड़े प्लांटों में तैयार किया जाता है. मेडिकल ऑक्सीजन बनाने के लिए सबसे पहले हाव में अमुजूद

ऑक्सीजन को लिक्विड फॉर्म में बदलना पड़ता है. बाद में इसे सिलेंडरों में भरकर अस्पतालों में सप्लाई किया जाता है.

जैसे पानी को भाप में बदलने के लिए 100 डिग्री सेल्सियस तक गर्म करना पड़ता है और उसे बर्फ में बदलने के लिए 0 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करना पड़ता है.

इसी तरह ऑक्सीजन को लिक्विड में बदलने के लिए उसे -183 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ठंडा करना पड़ता है. जैसे पानी का बॉयलिंग पॉइंट 100 डिग्री सेल्सियस है, उसी तरह ऑक्सीजन का बॉयलिंग पॉइंट -183 डिग्री सेल्सियस है.

-183 डिग्री सेल्सियस पर आते ही ऑक्सीजन लिक्विड से गैस में बदला जाती है, इसलिए ऑक्सीजन गैस को अगर हम -183 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा ठंडा करें, तो यह लिक्विड में बदल जाएगी.  

अस्पतालों तक कैसे पहुंचती है ऑक्सीजन 

ऑक्सीजन को बड़े-बड़े प्लांटों में लिक्विड फॉर्म में बदलने के बाद इसे बड़े-बड़े टैंकरों में भरा जाता है. ये टैंकर क्रायोजेनिक टैंकर होते हैं, जो कि बेहद ठंडे होते हैं और इनमें लिक्विड ऑक्सीजन गैस में नहीं बदल पाती है. 

डिस्ट्रीब्यूटर इसका प्रेशर कम करके गैस के रूप में अलग-अलग तरह के सिलेंडरों में इसे भरते हैं.  इन सिलेंडरों को अस्पतालों तक पहुंचाया जाता है. 

कुछ बड़े अस्पताल अपने कंपाउंड के भीतर ही ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट लगाकर रखते हैं. 

कुछ बड़े अस्पतालों में अपने छोटे-छोटे ऑक्सीजन जनरेशन प्लांट हैं.

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