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बारिश ने बिगाड़ दी सूरत-ए-हाल, यूपी में डूब गए लाखों आशियाने

उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने बारिश से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है.

बारिश ने बिगाड़ दी सूरत-ए-हाल, यूपी में डूब गए लाखों आशियाने

नई दिल्ली: सितंबर खत्म हो रहा है लेकिन आसमान से बरस रही आफत थमने का नाम नहीं ले रही है. बीते तीन दिनों से हो रही भारी बारिश ने यूपी के कई जिलों का हाल बेहाल कर रखा है. 

बारिश का आलम ये है कि कई शहर से गांव तक लोगों का जीना मुहाल हो गया है. लगातार बारिश ने बाढ़ के हालात पैदा कर दिए हैं, जो सारे रिकॉर्ड को धराशायी कर दिया है.

गोरखपुर का बिगड़ा सूरत-ए-हाल

सीएम योगी के गृह जिले गोरखपुर में बीते 48 घंटे में हुई करीब 180 मिमी बारिश ने शहर का सूरत-ए-हाल बिगाड़कर रख दिया है. यहां सड़कों पर दरिया बह रहा है और गली मोहल्ले तालाब बन गए हैं. बारिश ने सितंबर महीने में हुई सबसे ज्यादा बारिश का सात साल पुराना रिकार्ड तोड़ दिया..इसके पहले 18 सितंबर 2012 को 155.7 मिमी बारिश हुई थी.

बारिश से सबसे ज्यादा परेशानी तारामंडल क्षेत्र के लोगों को हुई. यहां की डेढ़ दर्जन से अधिक कॉलोनियों में डेढ़ से ढाई फीट तक पानी भरा नजर आया. जिससे लोग घरों में ही कैद होकर रह गए. बुद्ध नगर, आजाद नगर पूर्वी, सिद्धार्थ नगर, बुद्ध विहार, सिद्धार्थपुरम समेत कई कॉलोनियां पानी में डूबी नजर आईं. पानी की निकासी का इंतजाम ना होने से बारिश में इन इलाकों का ऐसा ही हाल होता है. जिससे लोगों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है.

प्रयागराज में डूबे आशियाने

अब आपको पहले से ही गंगा और यमुना में आए उफान की मार झेल रहे प्रयागराज में भी पिछले 24 घंटे के दौरान हुई भारी बारिश के चलते इन दोनों नदियों में पानी घटने की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है. जिससे गंगा के कछारी इलाकों में डूबे हजारों घरों की मुसीबतें फिर से बढ़ती दिख रही हैं. बारिश से बाढ़ प्रभावित इलाकों में फिर पानी लग गया है और आवाजाही प्रभावित हो गई है.

लगातार हो रही बारिश से नाले और नालियां ओवरफ्लो हो रहे हैं. शहर की गलियां और सड़कें पानी में डूब गई हैं. पानी भरा होने से सड़क के गड्ढे नजर नहीं आ रहे और लोग हादसों का शिकार हो रहे हैं. कई जगह ऐसे ही गड्ढों में फंसकर ई-रिक्शा और गाड़ियां पलट गईं.

काश में 'आसमानी तबाही'

शिव की नगरी काशी भी आसमान से बरस रही तबाही के चलते बेहाल नजर आ रही है. दो दिनों से हो रही बारिश ने जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है. यहां के बाजार, एयरपोर्ट, अस्पताल, रेलवे स्टेशन हर जगह सड़कों पर समंदर बहता नजर आ रहा है. जानकारों के मुताबिक करीब दो दशक बाद वाराणसी में इस तरह की बारिश हुई है. दस साल पहले 19 अगस्त 2009 की रात भी भीषण बारिश ने तबाही के हालात पैदा किए थे लेकिन लगातार दो दिनों तक बारिश नब्बे के दशक के बाद हुई है.

वाराणसी के मुख्य बाजार गोदौलिया-दशाश्वमेध रोड पर कमर तक पानी भरा हुआ है. बीएचयू अस्पताल परिसर में पानी भरा होने से यहां खड़ी गाड़ियां पूरी तरह डूबी हुई हैं. बाबतपुर एयरपोर्ट परिसर में कई जगहों पर घुटने तक पानी है. वाराणसी के कैंट रेलवे स्टेशन के आस-पास भी सड़कों पर दरिया बह रहा है. हालात को देखते हुए जिले के सभी स्कूल अगले आदेश तक बंद कर दिए गए हैं.

गंगा का घट रहा जलस्तर भारी बारिश के बाद से स्थिर हो गया है. केंद्रीय जल आयोग की मानें तो बारिश थमी नहीं तो गंगा का जलस्तर फिर से बढ़ना शुरू हो जाएगा. मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 24 घंटे में 130.6 मिमी बारिश हुई है. विभाग ने अगले दो दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई है.

'मौत' वाली बारिश

पिछले दो दिनों में यूपी में हुई भयंकर बारिश के कारण अब तक करीब 79 लोगों की जान जा चुकी है. सीएम योगी आदित्यनाथ ने राज्य भर के जिलाधिकारियों को बाढ़ और भारी बारिश के कारण प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने का निर्देश दिया है. सीएम योगी ने बारिश से जुड़ी घटनाओं में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने का भी आदेश दिया है. राज्य सरकार बारिश और बाढ़ के खतरों से निपटने की पुख्ता तैयारी का दावा कर रही है.

सितंबर का आखिरी हफ्ता है और मानसून आखिरी पड़ाव में है. 60 साल में पहली बार इस साल मानसून के 15 दिन की देरी से लौटने का अनुमान है. मौसम विभाग के मुताबिक इस बार मानसून 15 अक्टूबर तक जारी रह सकता है. 1960 के बाद यह पहली बार है, जब मानसून इतनी देरी से अलविदा कहेगा. उसकी यही देरी यूपी समेत कई राज्यों पर भारी पड़ रही है.