पटरी से उतरा राकेश टिकैत का बंद वाला 'प्लान', किसान आंदोलन के नाम पर उपद्रव

सड़क जाम, चक्का जाम, हाइवे पर हुड़दंग, ट्रैक्टर तांडव, किसानों के नाम पर सियासी नौटंकी... 10 महीने से उपद्रव देख-देखकर देश की जनता तंग आ चुकी है. हर कोई जानना चाहता है कि ये रोज-रोज की नौटंकी कब तक चलेगी. कब तक लोग यूं ही जाम से जूझते रहेंगे, कब तक सड़कें बंद होने से मुश्किलें झेलते रहेंगे, बॉर्डर पर बैठा अय्याश गैंग महिलाओं-बेटियों से छेड़खानी करता है. अराजकता का खुला खेल खेलता है. सिंघु बॉर्डर पर जिस तरह से युवक की निर्मम हत्या की गई. जिस तरह बॉर्डर पर देश विरोधी तत्वों का जमावड़ा है, उससे इलाके के लोग दहशत में है और बॉर्डर खुलवाने की गुहार लगा रहे हैं. पूरा देश किसानों की आड़ में इनकी असली सियासत समझ चुका है. इसीलिए रेल रोको आंदोलन का दम निकल गया. विपक्षी पार्टियों के अलावा कोई नफरतजीवियों का समर्थन नहीं कर रहा.

ट्रेंडिंग विडोज़