वंदे मातरम: Bengal में एक्टिव Mamata का दंगा गैंग | ZEE Hindustan की मुहिम के आगे झुके अली अब्बास

डराकर लोगों से वोट हासिल करना, डराकर लोगों को विकास से दूर रखना, डराकर लोगों पर हुकूमत करना और डराकर लोगों की लगाम अपने हाथ में रखना, West Bengal के 70 साल की सियासत की यही बुनियाद रही. एक समय West Bengal उद्योगों, सिनेमा, संस्कार और रोज़गार के लिए देश का सबसे बड़ा केंद्र था लेकिन पहले Congress ने, फिर वामदलों ने और उसके बाद Mamata Banerjee की TMC ने दहशत के वो बीज बोए जिससे बंगाल कंगाल हो चला. दहशत की वही सियासत Mamata Banerjee को उस हद पर लेकर आई है जहां वो BJP को मात देने के लिए 'माओवादी' कार्ड खेल रही हैं और अपने डर को छिपाकर लोगों में डर पैदाकर के वोट हासिल करने की जुगत में हैं.

डराकर लोगों से वोट हासिल करना, डराकर लोगों को विकास से दूर रखना, डराकर लोगों पर हुकूमत करना और डराकर लोगों की लगाम अपने हाथ में रखना, West Bengal के 70 साल की सियासत की यही बुनियाद रही. एक समय West Bengal उद्योगों, सिनेमा, संस्कार और रोज़गार के लिए देश का सबसे बड़ा केंद्र था लेकिन पहले Congress ने, फिर वामदलों ने और उसके बाद Mamata Banerjee की TMC ने दहशत के वो बीज बोए जिससे बंगाल कंगाल हो चला. दहशत की वही सियासत Mamata Banerjee को उस हद पर लेकर आई है जहां वो BJP को मात देने के लिए 'माओवादी' कार्ड खेल रही हैं और अपने डर को छिपाकर लोगों में डर पैदाकर के वोट हासिल करने की जुगत में हैं. भगवा से ये वो भय है जो आनेवाले दिनों में ममता की हार तय कर सकता है. पीशी और भाइपो के लिए आज के समय में बंगाल में सबसे बड़ा फीयर फैक्टर है बीजेपी और शायद इसीलिए ऐसे बेतुके बयान सामने आ रहे है. एक तरफ BJP के बढ़ते क़द का भय है तो दूसरी तरफ Mamata Banerjee के नेता ऐसे बयान देते हैं जो TMC के मूल चरित्र को सामने पेश करती है, सवाल है कि दीदी के दल में आखिर कितने छिछोरे हैं. पहले माता सीता का अपमान अब देश की आधी आबादी यानी महिलाओं के खिलाफ ममता के मानुष के बोल, क्या नारी सम्मान पर प्रहार ही TMC का संस्कार है.

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