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'सर्जिकल स्ट्राइक' को ही क्यों बनाया हथियार? भारत के पास थें 'ये 4 विकल्प'

रात साढ़े बारह बजे स्पेशल फोर्स के 25 पैरा कमांडोज को हेलीकॉप्टर के जरिए लाइन ऑफ कंट्रोल के पास उतारा गया. इन कमांडोज ने कुछ किलोमीटर की दूरी जमीन पर रेंग-रेंगकर तय की ताकि मिशन के बारे में पाकिस्तानी जवानों को भनक न लगे.

'सर्जिकल स्ट्राइक' को ही क्यों बनाया हथियार? भारत के पास थें 'ये 4 विकल्प'

नई दिल्ली: 28 और 29 सितंबर 2016 की दरम्यानी रात जब भारतीय कमांडो की गोलियों से PoK के आतंकी कैंप दहल उठे थे. 3 साल पहले गुजरते सितंबर की आधी रात में सरहद पार कर भारत ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी. और भारत के वीर कमांडोज ने पाक अधिकृत कश्मीर में घुसकर आतंकियों को चुन-चुन कर और गिन-गिन कर मारा था.

पाकिस्तान ने उस वक्त भारत के इंतकाम की आग देखी थी और उस आग में आज भी वो तिल-तिल कर जल रहा है. सर्जिकल स्ट्राइक की पृष्ठभूमि उसी दिन लिख दी गई थी जब जम्मू-कश्मीर के उरी के मिलिट्री कैंप पर आतंकी हमला हुआ था और 19 जवान शहीद हो गए थे. इस बड़े आतंकी हमले के बाद पूरा देश एक सुर में बोल रहा था कि अब और सहा नहीं जा सकता, अब और चुप रहा नहीं जा सकता, अब और शांति का संदेश नहीं दिया जा सकता, अब हमले का वक्त आ गया है. अब बदला लेने की बारी आ गई है.

न सिर्फ देश बल्कि उरी हमले में शहीद जांबाजों के परिजन के आंसू भी जवाब मांग रहे थे कि आखिर कब तक हम ये सब सहते रहेंगे? उरी हमले में शहीदों के अपनों की सिसकियां इंतकाम मांग रही थीं. सेना भी बदले को बेकरार दिख रही थी, लेकिन कैसे और कब पाकिस्तान और आतंकियों को करारा जवाब देना है, इसके लिए दिल्ली में वॉर रूम में रणनीतियां तैयार होने लगी थी.

  • तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, तत्कालीन सेना प्रमुख जनरल दलबीर सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोवल ने प्लान तैयार करना शुरू किया और 4 विकल्प पर विचार किया गया.

  • पहला विकल्प था कि पाक अधिकृत कश्मीर में आतंकी ठिकानों पर एयर स्ट्राइक यानी हवाई हमला किया जाए.

  • दूसरा विकल्प ये सोचा गया कि ब्रह्मोस मिसाइल से आतंकी कैंप पर हमला बोला जाए.

  • तीसरे विकल्प के तौर पर ये सोचा गया कि टैंक से ही हमला बोल दिया जाए.

  • चौथा और आखिरी विकल्प था कि सरहद पार कर कमांडो हमला किया जाए

इन चारों विकल्प के साथ मनोहर पर्रिकर, जनरल दलबीर सिंह और अजित डोवल पीएम नरेंद्र मोदी के साथ चर्चा करने पहुंचे. चारों विकल्प पर मंथन के बाद पीएम मोदी ने आखिरी प्लान यानी कमांडो के जरिए सर्जिकल स्ट्राइक को हरी झंडी दिखा दी.

सर्जिकल स्ट्राइक का पूरा प्लान 24 सितंबर 2016 से पहले ही तैयार हो गया था. ऐसा इसलिए कहा जाता है क्योंकि उरी में आतंकी हमले के 6 दिन बाद 24 सितंबर 2016 को पीएम मोदी जब केरल के कोझिकोड पहुंचे थे तभी उन्होंने वहां से पाकिस्तान को इस बात के साफ संकेत दे दिए थे कि अब तेरी खैर नहीं.  पीएम मोदी ने ललकारते हुए आतंकियों और उसके संरक्षक पाकिस्तान के हुक्मरानों को बता दिया था कि करारा जवाब मिलने वाला है.

वॉर रूम में सर्जिकल स्ट्राइक की रूपरेखा तैयार हो चुकी थी और अब उसे जमीनी स्तर पर अंजाम देने का वक्त आ गया था. सेना ने सर्जिकल स्ट्राइक के लिए अपनी बेहद ही खास यूनिट PARA SF यानी स्पेशल फोर्स को चुना. और तारीख तय की गई 28-29 सितंबर की दरम्यानी रात जब पाक अधिकृत कश्मीर के अंदर घुसकर आतंकी कैंपों को ध्वस्त करना था. ये कैंप एलओसी के 500 मीटर से दो किलोमीटर तक के दायरे में फैले हुए थे.

रात साढ़े बारह बजे स्पेशल फोर्स के 25 पैरा कमांडोज को हेलीकॉप्टर के जरिए लाइन ऑफ कंट्रोल के पास उतारा गया. इन कमांडोज ने कुछ किलोमीटर की दूरी जमीन पर रेंग-रेंगकर तय की ताकि मिशन के बारे में पाकिस्तानी जवानों को भनक न लगे. कमांडोज को टेरर कैंपों के बारे में पहले से ही सटीक जानकारी थी इसलिए वो सीधे वहीं पहुंचे जहां पर आतंकियों का डेरा था. मारक हथियारों, ग्रेनेड लॉन्चर और तमाम आधुनिक उपकरणों से लैस इन कमांडोज ने कार्रवाई शुरू की. ये ऑपरेशन सुबह के 4 बजे जाकर खत्म हुआ.

  • पीओके के 4 सेक्टर्स भींबर, हॉटस्प्रिंग, केल और लिपा में सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया गया. 

सर्जिकल स्ट्राइक की कामयाबी

  • भारतीय कमांडोज की इस कार्रवाई में 40 से 50 आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया गया

  • इस दौरान 7 टेरर कैंप को जमींदोज भी कर दिया गया. 

करीब तीन-साढ़े तीन घंटे तक चली सर्जिकल स्ट्राइक से पीओके के आतंकी कैंपों में हुई भारी तबाही की सैटेलाइट तस्वीरें भी सामने आईं. इन तस्वीरों से पता चला कि कैसे कमांडोज ने अपने मिशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया था. जब सीमा पार कर कमांडोज सर्जिकल स्ट्राइक कर रहे थे तब दिल्ली में पीएम मोदी पूरी रात जगे हुए थे. वो बस इसी चिंता में थे कि जवानों को कुछ न हो. पीएम मोदी बस उस फोन का इंतजार कर रहे थे जिसमें उन्हें ये मैसेज मिलता कि सर्जिकल स्ट्राइक वाला मिशन सफल रहा.

सर्जिकल स्ट्राइक के लिए भारतीय कमांडो इस कदर तैयार होकर गए थे कि दुश्मन के खेमे में भारी तबाही मचनी तय थी. ऐसे घातक हरवे-हथियारों और सिस्टम से जवान लैस थे कि दुश्मन को सोचने-समझने तक का मौका नहीं मिला. 

  • पीओके में सर्जिकल स्ट्राइक करने वाले कमांडोज के पास नाइट विजन डिवाइस थी जिससे रात में भी दिन के उजाले की तरह सब कुछ दिख जाता है और इससे आतंकियों को देखने और उन्हें खत्म करने में मदद मिली.
  • कमांडोज के पास सबसे घातक टवोर और एम-फोर-ए-वन जैसी घातक राइफलें भी थीं जो तेज रफ्तार से गोलियां बरसाकर दुश्मन का काम तमाम कर देती हैं.
  • इन कमांडोज के पास बरेटा 9 एमएम वाली खास भी पिस्टल थी जो दुनिया के सबसे भरोसेमंद हथियारों में एक मानी जाती है.
  • दुश्मन के हमले से बचने के लिए कमांडोज़ ने बुलेटप्रूफ जैकेट भी पहना था जिसके जरिए पिस्टल से लेकर राइफल की गोलियों तक से बचा जा सकता था.
  • सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल जवानों के पास भारी गोला-बारूद और साथ ही गोलियों की एक्स्ट्रा मैगजीन भी थी.

इतनी तैयारी के साथ कमांडो सर्जिकल स्ट्राइक के लिए गए थे कि दुश्मन उनका बाल-बांका भी नहीं कर पाए और बगैर किसी नुकसान के सभी जवान अपना मिशन पूरा कर वतन भी लौट आए.

इस मिशन की कामयाबी पर तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने कहा कि मुझे गर्व है अपने सैनिकों के ऊपर जिन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक तो कर ही दिया. लेकिन ये करते-करते एक भी हमारा सैनिक शहीद नहीं हुआ. 100 फीसदी परफेक्ट सर्जिकल स्ट्राइक. मुझे लगता है कि दुनिया में बहुत कम ऐसा देखा गया होगा.

सर्जिकल स्ट्राइक कामयाब रहा था. सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल रहे सारे जवान सही-सलामत वतन लौट चुके थे. पाकिस्तान कलप रहा था. आतंक के आका कराह रहे थे. बगैर किसी नुकसान के सौ फीसदी कामयाब रही भारत की इस सर्जिकल स्ट्राइक की दुनिया भर में चर्चा होने लगी. दुनिया भर में भारत के जांबाज जवानों की जय-जय होने लगी. अमन और शांति का पैगाम बांटने वाला भारत ने दुनिया को बता दिया था कि संयम की सीमा जब टूटेगी तो सर्जिकल स्ट्राइक का सामर्थ्य दिखाना ही पड़ेगा.

सर्जिकल स्ट्राइक के तीन साल पूरे होने के दिन ही पीएम मोदी अमेरिका की हफ्ते भर की यात्रा कर दिल्ली लौटे थे. दिल्ली पहुंचते ही पीएम ने सर्जिकल स्ट्राइक में शामिल रहे जांबाज कमांडोज को याद किया जो कफन बांधकर सरहद पार आतंकवादियों की तबाही की इबारत लिखने गए थे.

पाकिस्तान को बार-बार भारत अगाह करता रहा है कि वो आतंक का एक्सपोर्ट बंद करे नहीं तो उसे इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ेगी. लेकिन पाकिस्तान अतीत से नहीं सीखता. इसी साल फरवरी में जब जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने हमला कर 40 जवानों को शहीद कर दिया तब फिर से जवाब देना जरूरी हो गया था. और इसी फरवरी के महीने में इंडियन एयरफोर्स के जवानों ने पाकिस्तान के अंदर बालाकोट में घुसकर टेरर कैंप को तबाह किया था.