मुंबई में होता सुशांत का परिवार तो दब गया होता मामला

किस्मत वाले थे सुशांत सिंह राजपूत के परिवारजन जो मुंबई में नहीं रहते हैं, नहीं तो नहीं मिल पाता दिवंगत सुशांत को न्याय. बिलकुल ऐसा ही किये जाने की कोशिश हुई है दिशा हत्या के मामले में. लेकिन मीडिया और सुशांत हत्या की जांच ने ऐसा होने नहीं दिया..  

मुंबई में होता सुशांत का परिवार तो दब गया होता मामला

नई दिल्ली. दिशा का परिवार दुर्भाग्य से महाराष्ट्र में और खास तौर पर मुंबई में रहता है इसलिये दिशा हत्या को आत्महत्या कह कर फाइल बंद करने की योजना और कोशिश दोनो ही करीब करीब सफल हो गईं थीं. जरा सोचिये अगर सुशांत के परिजन भी मुंबई में होते तो वे भी न्याय की मांग करने की हिम्मत शायद न जुटा पाते.

 

दो माह दिशा के माता-पिता मूक रहे

दिशा सानियाल की हत्या दो माह पूर्व 8 जून को हुई. उसके बाद से रहस्यमय ढंग से मूक दिखा दिशा का परिवार. दिशा की मौत से पैदा हुए शून्य से जूझता हुआ उसका परिवार एक दर्द से और भी जूझ रहा हो सकता है. जानते हुए भी कि उनकी हैप्पी गो लकी बेटी दिशा आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकती और उसकी हत्या के पीछे बड़े खिलाड़ी हैं - दिशा का परिवार उसकी मौत के लिए न्याय की मांग नहीं कर पाया क्योंकि शायद मौत के दिन से ही परिवार पर दबाव बना दिया गया था. क्योंकि जिस रहस्यमय तरीके से दिशा के परिवार में चुप्पी छा गई थी वो हैरान करने वाली थी.

बयान के पहले पत्र आया था सामने

आठ जून के एक माह सात दिन बाद परदे की पीछे से हुई कोशिशों के मध्य में मुंबई पुलिस को क्लीन चिट दिलाने की एक और 'समझदार' कोशिश सामने आई थी.  बीच में पंद्रह जुलाई के आसपास दिशा के परिवार द्वारा एक पत्र पब्लिक किया गया जो कि पब्लिक के लिये ही लिखा गया था. कुल मिला कर इस पत्र का जो सार था वो ये था कि अब दिशा की हत्या के मामले पर कोई बात न की जाये (और न ही कोई जांच की बात की जाये.) हैरानी की बात थी कि परिवार न्याय मांगने की बजाये मामले को दबा देना चाहता था?

 

ये थी इस मामले पर उलटी बात

जाहिर है ये उलटी बात थी क्योंकि जिस परिवार की बेटी को बेरहमी से मार दिया गया वह परिवार बजाये इसके कि न्याय की मांग करे, दुनिया से इस मामले पर बात न करने की बात करे – ये पर्दे के पीछे से करवाया गया जबरन का निर्देशन है  जो अज्ञात शातिरों की कार्रवाई है.

सुशांत का परिवार मुंबई में नहीं रहता

सुशांत सिंह राजपूत और उनकी बहन ही सिर्फ मुंबई में रहते थे. शेष सभी परिजन महाराष्ट्र से भी बाहर थे. पिता पटना में, एक बहन कैलिफोर्निया में, एक बहन हरियाणा में रहते हैं, इसलिये ये लोग किसी भी तरह के दबाव में नहीं लाये जा सकते थे. सुशांत की मुंबई वाली बहन ने भी आवाज ऊंची नहीं की ना ही उन्होंने न्याय की गुहार लगाई. कारण जो भी हो, एक बात तो साफ है कि यदि सुशांत का सारा परिवार मुंबई में ही होता तो उसको भी पर्दे के पीछे से अज्ञात ऊंचे हत्यारे दबाव में ले लेते और तब शायद पटना वाली एफआईआर भी न लिखी जाती न ही सुशांत की मौत की जांच बिहार पुलिस करती और न ही अब इस जांच को सीबीआई को दिया जाता.

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