America GMD Defence system ICBM: दुनियाभर में भू-राजनीतिक समीकरण बदल रहे हैं. चाहे वह रूस-यूक्रेन जंग हो, चीन-अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव, चीन का ताइवान पर दबाव या भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ती खाई. इतना ही नहीं, इजरायल-हमास जंग के साथ-साथ अर्मेनिया-अजरबैजान के बीच जंग की स्थिति. इस बीच सबसे बड़ा खतरा परमाणु मिसाइलों का है. जिन्हें रोक पाना नामुमकिन माना जाता है. लेकिन अमेरिका के पास एक ऐसा डिफेंस सिस्टम है. जो न केवल परमाणु मिसाइलों को रोक सकता है. बल्कि अपनी तूफानी रफ्तार के चलते कई हजार किलोमीटर तक चंद मिनटों में पहुंच सकता है.
क्या है अमेरिका का GMD सिस्टम?
संयुक्त राज्य अमेरिका के पास एक खास डिफेंस सिस्टम है, जिसे ग्राउंड-बेस्ड मिडकोर्स डिफेंस (GMD) सिस्टम कहते हैं. यह सिस्टम खास तौर पर दुश्मन की इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM), यानी अंतरमहाद्वीपीय परमाणु मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है. यह प्रक्रिया किसी गोली से दूसरी गोली को अंतरिक्ष में टकराने जितनी मुश्किल है, लेकिन यह अमेरिका के हवाई क्षेत्र में ICBM के वारहेड को घुसने से पहले ही नष्ट कर देती है.
24,000KM प्रति घंटा ICBM की रफ्तार
GMD सिस्टम अमेरिका की होमलैंड मिसाइल शील्ड का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. इसका काम ICBM को उसकी उड़ान के मिडकोर्स स्टेज में ही मार गिराना है. मिडकोर्स वह समय होता है जब मिसाइल पृथ्वी के वातावरण से बाहर, अंतरिक्ष में तेजी से ट्रैवल करते हैं. जहां, ICBM की रफ्तार 24,000 किलोमीटर प्रति घंटे से भी ज्यादा होती है.
ऐसे में, GMD का इंटरसेप्टर मिसाइल को रडार और सेंसर के एक बड़े नेटवर्क की मदद से ढूंढता है, उसका रास्ता नापता है, और फिर अलास्का या कैलिफोर्निया में स्थित लॉन्च पैड से ग्राउंड-बेस्ड इंटरसेप्टर मिसाइल को लॉन्च करता है. इसका मकसद ICBM के वारहेड को अमेरिका की धरती से हजारों किलोमीटर दूर अंतरिक्ष में ही तबाह कर देना है.
GMD इंटरसेप्टर कैसे करता है वार?
ICBM को मार गिराने की यह पूरी प्रक्रिया कई जटिल चरणों में होती है. GMD सिस्टम सबसे पहले अर्ली-वॉर्निंग रडार और अंतरिक्ष-आधारित इंफ्रारेड सेंसर का इस्तेमाल करके दुश्मन के मिसाइल लॉन्च को पहचानता है. एक बार लॉन्च पक्का होने पर, उसका एकदम सटीक रास्ता नापा जाता है.
कहां से होता है कंट्रोल?
कोलोराडो में स्थित मिसाइल डिफेंस इंटीग्रेशन एंड ऑपरेशंस सेंटर (MDIOC) इस डेटा को इकट्ठा करता है. फिर फायर-कंट्रोल सिस्टम तय करता है कि किस इंटरसेप्टर को किस समय और किस रास्ते पर लॉन्च करना है.
टकराव से विनाश
GBI इंटरसेप्टर मिसाइल तेजी से अंतरिक्ष की ओर जाती है. इस मिसाइल के ऊपर एक छोटा वाहन लगा होता है, जिसे एक्सोएटमॉस्फेरिक किल व्हीकल (EKV) कहते हैं. EKV में कोई विस्फोटक नहीं होता. यह अंतरिक्ष में खुद को टारगेट की ओर गाइड करता है और मिसाइल के वारहेड से सीधी टक्कर मारता है. इतनी तेज रफ्तार में टक्कर से पैदा हुई काइनेटिक एनर्जी ही दुश्मन की मिसाइल को हवा में ही टुकड़ों में बदल देती है.
रोकना क्यों है इतना मुश्किल?
एक ICBM को मार गिराने का यह काम तकनीकी रूप से इतना मुश्किल इसलिए है. दोनों मिसाइलों की गति बहुत ज्यादा होती है. पलक झपकते ही लक्ष्य अपनी जगह बदल देता है, इसलिए समय और रास्ता नापने में जरा सी भी गलती पूरे मिशन को फेल कर सकती है.
ICBM के वारहेड के साथ दुश्मन कई बार नकली वारहेड या जाली वस्तुएं भी छोड़ते हैं, ताकि GMD सिस्टम असली लक्ष्य को पहचानने में गलती कर दे. इसके बावजूद, GMD सिस्टम अमेरिका के लिए एक अंतिम सुरक्षा दीवार की तरह काम करता है, ताकि देश की आबादी को परमाणु खतरे से बचाया जा सके.
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