कानून बनाने का अमेरिका ने लिया संकल्प - हांगकांग की सम्प्रभुता बचाएंगे !!

अंतर्राष्ट्रीय खलनायक चीन के जहरीले इरादों पर दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश अमेरिका नकेल कसने की तैयारी में है. यही एक ऐसा देश है जिसने भारत के समर्थन में सेना भेजने का फैसला किया है और अब यही देश हांगकांग की सम्प्रभुता बचाने के लिए दृढ संकल्पित है..  

कानून बनाने का अमेरिका ने लिया संकल्प - हांगकांग की सम्प्रभुता बचाएंगे !!

नई दिल्ली.  चीन से जंग लेते समय भारत अकेला नहीं है, ये महसूस करा दिया है अमेरिका ने.  यूरोप से हटा कर अमेरिकी सैनिक एशिया आ रहे हैं अर्थात चीन के खिलाफ अब एक और मोर्चा खुल गया है. हालांकि ये तीसरे विश्व युद्ध की आहट भी हो सकती है. चीन के खिलाफ हांगकांग को बचाने के लिए अमेरिका की सीनेट ने बिल पारित कर दिया है और चीन को सीधा-सीधा अल्टीमेटम दे दिया है.

 

 अमेरिकी सीनेट में हुआ बिल पारित

अमेरिका ने जो कहा उस पर काम भी किया. अमेरिका ने हांगकांग को आश्वस्त किया था कि वह उसकी सम्प्रभुता को सुनिश्चित करेगा. अब अमेरिकी सीनेट ने हांगकांग की सम्प्रभुता की रक्षा के लिए अपनी पूरी सम्मति दे दी है और एक विधेयक भी पारित कर दिया है. यह विधेयक हांगकांग पर सख्त ''राष्ट्रीय सुरक्षा कानून" लागू करने वाली चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अधिकारियों के साथ-साथ पुलिस बल पर भी लगाम कसेगा जिन्होंने हांगकांग में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर अत्याचार किये थे.

चीन समर्थक बैंकों पर भी कसेगा शकंजा 

अमेरिकी सीनेट में पास हुआ ये बिल उन बैंकों पर भी प्रतिबंध लगाएगा जो कानून का उल्लंघन करने वाली संस्थाओं के साथ व्यापार करते पाए गए हैं. हांगकांग पहले ब्रिटिश कालोनी रहा है जहां अब चीन के अत्याचारों के खिलाफ प्रदर्शन  हो रहे हैं जिसकी प्रतिक्रिया ने चीन ने यहां के लोगों का उत्पीड़न बढ़ा दिया है और उसने इस देश को सेना द्वारा कब्जा करने की धमकी भी दी है. इन हरकतों को देखते हुए अमेरिका को ये कदम उठाना पड़ा है. 

 

चीन ने किया 1984 के पैक्ट का उल्लंघन 

अमेरिकी सीनेट ने ये भी कहा कि इस विधेयक के पास होने और क़ानून बनने से बीजिंग सरकार पर 1984 चीन-ब्रिटिश संयुक्त घोषणा के सीधे उल्लंघन का आरोप लग सकता है. इस संधि के अंतर्गत  1997 में हांगकांग में ब्रिटिश शासन को समाप्त कर इस महानगर को आंशिक संप्रभुता प्रदान की गई थी. अब यह विधेयक सदन में पेश किया जाने वाला है ताकि यह एक क़ानून बन सके.

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