ट्रंप का एक्शन, चीन-पाक में टेंशन !

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मास्टर स्ट्रोक चल दिया है. चीन के लाख विरोध और धमकी के बावजूद अमेरिका ने तय कर दिया है कि अब पड़ोसी मुल्कों को चीन से डरने की जरूरत नहीं है.

ट्रंप का एक्शन, चीन-पाक में टेंशन !

नई दिल्ली: जिनपिंग और इमरान के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। अमेरिका ने ऐसा चक्रव्यूह रच दिया है जिसमें जिनपिंग और इमरान बुरी तरह से घिर चुके हैं. भारत के दोनों पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन लगातार साजिश पर साजिश रचते आए हैं . लेकिन दोनों ने सोचा नहीं होगा कि मोदी और ट्रंप की जोड़ी उन्हें ऐसा घेरेगी कि बच निकलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन होगा . साउथ चाइना सी में अब चीन की दादागीरी नहीं चलेगी . 

अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने मास्टर स्ट्रोक चल दिया है. चीन के लाख विरोध और धमकी के बावजूद अमेरिका ने तय कर दिया है कि अब पड़ोसी मुल्कों को चीन से डरने की जरूरत नहीं है.

ताइवान को हार्पूक एंटी शिप मिसाइल देगा अमेरिका

दरअसल बीते कुछ सालों से चीन अपने पड़ोसियों को दबाने की कोशिश में लगा हुआ है. पहले साउथ चाइना सी में चीन ने ताइवान के खिलाफ सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया और ताइवान को अपने कब्जे में लेने की कोशिश की लेकिन ताइवान ने बहादुरी से चीन का सामना किया. इसके बाद मोदी और ट्रंप ने ताइवान की मदद का भरोसा दिलाया. 

अब चीन अपने दो पड़ोसियों से घिर गया है जिनके पास हार्पूक एंटी शिप मिसाइल हैं और चीन के समुद्री जंगी बेड़े को पलक झपकते तबाह कर सकते हैं. जिनपिंग के दोस्त और दुनियाभर के आतंकियों के मसीहा इमरान खान भी घबराए हुए हैं. अगर चीन ही घिर गया तो फिर इस दुनिया में इमरान को बचाने वाला कोई माई-बाप बचेगा क्या.

चीन की ट्रंप को गीदड़ भभकी

अमेरिका से 100 हार्पून मिसाइलें मिलने के बाद ताइवान की मारक क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी . अब ताइवान अपने घर में बैठकर पूरे चीन को तबाह कर सकता है. इस सौदे से घबराए चीन ने 21 अक्टूबर को अमेरिका की उन कंपनियों पर बैन लगा दिया था जो ताइवान को 1.8 बिलियन डॉलर के हथियार बेचने वाली थीं जिसके बाद अमेरिका की बड़ी हथियार कंपनियां बोइंग डिफेंस, लॉकहीड मार्टिन और रेथियॉन चीन में कारोबार नहीं कर पाएंगी. लेकिन अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन के बैन को धता बताते हुए अमेरिकी कंपनियों को ताइवान का सौदा करने की खुली छूट दे दी. 

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जबकि चीन का दावा है कि उसके पास ताइवान को हथियार बेचने वाली कंपनियों को दंडित करने का पूरा हक है . जबकि अमेरिका का कहना है कि इससे शक्ति संतुलन में सुधार होगा और दक्षिण चीन सागर में जिनपिंग की दादागीरी खत्म होगी. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि चीन छोटे देशों को हमेशा के लिए दबा नहीं सकता  और ना ही इस इलाके में अपनी मनमानी थोप  सकता है.

बड़े मियां तो बड़े मियां...छोटे मियां कुछ ज्यादा परेशान

ताइवान को जो हार्पून हंटर अब मिलने वाला है वो भारत के पास कई साल पहले से है. आतंकिस्तान के आका इमरान खान के देश का कोना- कोना भारतीय मिसाइलों की जद में है. हार्पून हंटर का अचूक वॉर इमरान और उनके पाले पोसे आतंकियों का काम पल भर में तमाम कर सकता है. एलएसी से एलओसी तक साजिश रचने वाले इमरान और जिनपिंग की नींद हराम हो गई है. हार्पून मिसाइल करीब सवा सौ किमी. तक मार करने की शक्ति रखती है. 

इसमें लगा जीपीएस इसे अचूक बनाता है. एक बार में ये मिसाइल 500 पाउंड का बम ले जा सकती है. दरअसल भारत के पास 89 हार्पून मिसाइलें हैं जो भारत ने अमेरिका से खरीदी हैं. भारत ने हार्पून मिसाइलों के साथ हल्की टॉरपिडो मिसाइलों का भी सौदा किया है. ये सौदा 1178 करोड़ का है. इनके आ जाने से भारत दुश्मन के बंदरगाह पर खड़े जहाजों और औद्योगिक ठिकानों को एक झटके में खत्म कर सकता है.

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