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खुल्लमखुल्ला पाकिस्तान के साथ खड़े होते ही तुर्की की बढ़ने लगी मुश्किलें

संयुक्त राष्ट्र में जब से तुर्की ने कश्मीर मामले पर पाकिस्तान का साथ दिया है, तब से उसकी परेशानियों में इजाफा होने लगा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसे जबरदस्त धमकी दी है. उधर सऊदी अरब उसका दुश्मन तो है ही. क्या ये भारत की कूटनीति का असर है कि तुर्की पर अचानक अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ता हुआ दिख रहा है.   

खुल्लमखुल्ला पाकिस्तान के साथ खड़े होते ही तुर्की की बढ़ने लगी मुश्किलें
डोनाल्ड ट्रंप और तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोआन

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तुर्की की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने की धमकी दी है. उन्होंने कहा है कि तुर्की 'अपनी हदें पार करता है' तो वो उसकी अर्थव्यवस्था को तबाह देंगे. ट्रंप सीरिया से अमेरिकी सैनिकों के हटाए जाने के बाद के हालातों के बारे में बात कर रहे थे. 

ट्रंप ने तुर्की को इसलिए दी धमकी
दरअसल अमेरिका को यह आशंका है कि सीरिया से अमेरिकी फौजें हटाए जाने के  बाद तुर्की अपनी सीमा पर मौजूद कुर्द लड़ाकों पर हमला बोल देगा. कुर्द लड़ाकों ने इस्लामिक स्टेट के खिलाफ जंग में अमेरिका का भरपूर साथ दिया था. इसके पहले भी ट्रंप ने कई बार ट्वीट करके अमरीकी सैनिकों को उत्तरी सीरिया से हटाए जाने के फैसले का बचाव किया था. सीरिया में अमेरिका के एक हजार सैनिक तैनात हैं. 

ट्रंप पहले भी कुर्द लड़ाकों के बचाव में तुर्की को चेतावनी दे चुके हैं.

सऊदी अरब भी है तुर्की से बेहद नाराज
तुर्की और सऊदी अरब के रिश्तों में ऐतिहासिक रुप से तल्खी रही है. लेकिन हाल फिलहाल में तुर्की में सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोगी की हत्या के बाद दोनो देशों के रिश्ते बहुत ज्यादा बुरे मोड़ पर पहुंच गए थे. क्योंकि सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान को लगता था कि तुर्की इस मामले को तूल दे रहे है, जिसकी वजह से निजी तौर पर उनकी छवि खराब हो रही है. 

हालत यह है कि तुर्की से नजदीकी बढ़ने पर सऊदी अरब पाकिस्तान से भी नाराज होता हुआ दिखाई दे रहा है. हाल ही में पाकिस्तान के अखबार फ्राईडे टाइम्स ने दावा किया कि संयुक्त राष्ट्र में तुर्की और पाकिस्तान की जुगलबंदी देखकर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान इतने नाराज हुए कि उन्होंने इमरान खान को दिया हुआ अपना विशेष विमान वापस बुलवा लिया. जिसके बाद पाकिस्तानी प्रधानमंत्री को सामान्य फ्लाइट से वापल लौटना पड़ा.

दरअसल मक्का मदीना का निगहबान होने के कारण सऊदी अरब खुद को मुस्लिम देशों का सरताज मानता है. वह नहीं चाहता कि दुनिया का कोई और देश मुस्लिम दुनिया में उसकी इस स्थिति को चुनौती दे. लेकिन तुर्की बार बार सऊदी अरब को इस मामले में चुनौती देना का दुस्साहस करता है.   

तुर्की ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के खिलाफ दिया था पाकिस्तान का साथ 

तुर्की ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में भारत के रुख के खिलाफ और पाकिस्तान के पक्ष में कश्मीर मामले को उठाया. तुर्की राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में कहा कि ''अंतर्राष्ट्रीय समुदाय पिछले 72 सालों से कश्मीर समस्या का समाधान खोजने में नाकाम रहा है. संयुक्त राष्ट्र के प्रस्ताव के बावजूद कश्मीर में 80 लाख लोग फँसे हुए हैं''.

भारतीय विदेश मंत्रालय ने तुर्की के इस रुख पर अफसोस जताते हुए इसे अपने आंतरिक मामले में हस्तक्षेप करार दिया था. 

अब जब अमेरिका ने तुर्की पर दबाव बढ़ा दिया है तब उसे समझ में आ रहा होगा कि किसी भी मंच पर भारत का विरोध करना उचित नहीं है. इसका खमियाजा उसे कई अन्य मोर्चों पर भुगतना पड़ सकता है.