AUKUS: अमेरिका की इस हरकत से फ्रांस बेहद नाराज, वापस बुलाए अपने राजदूत

AUKUS: फ्रांस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पहली बार है जब उसने अमेरिका से अपने राजदूत को वापस बुलाया है. उसने ऑस्ट्रेलिया से भी अपने राजदूत को वापस बुलाया है.   

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Sep 18, 2021, 12:19 PM IST
  • अमेरिका की किस बात से नाराज है फ्रांस
  • ऑस्ट्रेलिया से भी वापस बुलाए राजदूत
AUKUS: अमेरिका की इस हरकत से फ्रांस बेहद नाराज, वापस बुलाए अपने राजदूत

पेरिस: अमेरिका के सबसे पुराने सहयोगी देश फ्रांस ने अप्रत्याशित रूप से गुस्सा जताते हुए अमेरिका से अपने राजदूत को शुक्रवार को वापस बुला लिया. दोनों देशों के बीच 18वीं सदी की क्रांति के दौरान बने संबंधों में दरार आती नजर आ रही है. दरअसल, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने नया हिंद-प्रशांत सुरक्षा गठबंधन ऑकस (AUKUS) बनाने में फ्रांस को छोड़ दिया है.

फ्रांसीसी विदेश मंत्री ने जारी किया बयान
फ्रांस के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह पहली बार है जब उसने अमेरिका से अपने राजदूत को वापस बुलाया है. उसने ऑस्ट्रेलिया से भी अपने राजदूत को वापस बुलाया है. फ्रांसीसी विदेश मंत्री ज्यां इव लि द्रीयां ने एक लिखित बयान जारी किया. इसमें कहा गया कि फ्रांस के राष्ट्रपति एमैनुअल मैक्रों के अनुरोध पर लिया गया यह फैसला ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका द्वारा की गई ‘घोषणा की असाधारण गंभीरता को देखते हुए न्यायोचित’ है.

रद्द हो जाएगा फ्रांस का सौदा
अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन ने नए त्रिपक्षीय सुरक्षा गठबंधन ‘ऑकस’ की घोषणा की है. दरअसल, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया के बीच डीजल पनडुब्बियों के निर्माण के लिए करीब 100 अरब डॉलर का सौदा हुआ था. नई ऑकस पहल की शर्तों के तहत ऑस्ट्रेलिया के लिए डीजल पनडुब्बियों के निर्माण का यह सौदा समाप्त हो जाएगा, जिससे फ्रांस नाखुश है. 

यह भी पढ़िएः AUKUS को लेकर अमेरिका से EU खफा, फ्रांस बोला- पीठ में छुरा घोंपने वाला कदम

विदेश मंत्री ने कहा कि समझौता खत्म करने का ऑस्ट्रेलिया का फैसला ‘सहयोगियों और साझेदारों के बीच अस्वीकार्य बर्ताव’ है. राजदूत फिलिप एतिने ने ट्वीट किया कि इन घोषणाओं का ‘हमारे गठबंधनों, हमारी साझेदारियों और यूरोप के लिए हिंद-प्रशांत की महत्ता की हमारी दूरदृष्टि पर प्रत्यक्ष असर पड़ रहा है.’ 

'फ्रांसीसी अधिकारियों के संपर्क में है अमेरिका'
अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की प्रवक्ता एमिली होर्न ने कहा कि जो बाइडन प्रशासन एतिने को पेरिस वापस बुलाने के फैसले को लेकर फ्रांसिसी अधिकारियों के करीबी संपर्क में है. उन्होंने एक बयान में कहा, ‘हम उनकी स्थिति समझते हैं और हम अपने मतभेदों को दूर करने के लिए आने वाले दिनों में काम करते रहेंगे जैसा कि हमने हमारे लंबे गठबंधन के दौरान कई मौकों पर किया है. फ्रांस हमारा सबसे पुराना सहयोगी और मजबूत साझेदारों में से एक है. हमारा साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए साथ मिलकर काम करने का लंबा इतिहास रहा है.’

यह भी पढ़िएः काबुल ड्रोन हमले में आतंकी नहीं, 10 नागरिकों की हुई थी मौत, अमेरिकी सेना ने मांगी माफी

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने भी फ्रांस के साथ संबंधों को अहमियत दी और उम्मीद जतायी कि दोनों देशों के बीच बातचीत आने वाले दिनों में जारी रहेगी. इसमें अगले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा की वार्षिक बैठक भी शामिल है. हालांकि 2017 में सत्ता में आने के बाद से ऐसा पहली बार होगा, जब मैक्रों विश्व नेताओं की वार्षिक बैठक में भाषण नहीं देंगे. उनके बजाय विदेश मंत्री संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करेंगे.

Zee Hindustan News App: देश-दुनिया, बॉलीवुड, बिज़नेस, ज्योतिष, धर्म-कर्म, खेल और गैजेट्स की दुनिया की सभी खबरें अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें ज़ी हिंदुस्तान न्यूज़ ऐप.  

ज़्यादा कहानियां

ट्रेंडिंग न्यूज़