पुतिन-बाइडन की जिनेवा में मुलाकात, भारत के लिए क्यों है खास?

जिनेवा में पहली बार मिले दुनिया के दो महाशक्ति.. अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने गर्मजोशी से एक दूसरे का स्वागत किया. ये मुलाकात भारत के लिए क्यों खास है? इस खास रिपोर्ट में पढ़िए..

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jun 16, 2021, 07:07 PM IST
  • महाशक्तियों की मुलाकात
  • किन मुद्दों पर होगी बात?

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पुतिन-बाइडन की जिनेवा में मुलाकात, भारत के लिए क्यों है खास?

नई दिल्ली: आज दुनिया की दो महाशक्तियों की मुलाकात हो रही है. अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बातचीत करेंगे. खास बात ये है कि जिनेवा में हो रही ये बातचीत करीब 4 से 5 घंटे तक चलेगी. जाहिर है भारत ही नहीं पूरी दुनिया की नजर इस पर लगी रहेगी. दोनों ही नेता स्विटजरलैंड के जिवेना में मौजूद हैं, यहीं पर ये महामुलाकात है.

इस बैठक का भारत पर क्या असर?

अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडेन और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने गर्मजोशी से एक दूसरे का स्वागत किया. देखने वाली बात ये होगी कि इस बैठक का भारत पर क्या असर पड़ता है. अमेरिका और रूस दोनों से ही भारत के अच्छे और रणनीतिक संबंध हैं.

अगर अमेरिका और रूस में संबंध बेहतर होते हैं तो चीन के विस्तारवाद की नीति पर लगाम लग सकेगा. जो भारत के लिए फायदेमंद साबित होगा. बाइडन उस अमेरिकी सोच को बदलना चाहते हैं जिसमें कहा जाता है कि अमेरिका रूस और चीन के साथ एक साथ नहीं निपट सकता है.

पुतिन-बाइडन मुलाकात, भारत के लिए क्या?

अमेरिका-रूस के साथ चलने का रास्ता साफ होता दिख रहा है. चीन के विस्तारवाद पर लगाम लगाना आसान होगा. भारत खुद को एशिया में अकेला नहीं महसूस करेगा. चीन के खिलाफ विकाशील देश एकजुट हो सकते हैं.

किन मुद्दों पर होगी बात?

बेलारूस
बेलारूस सरकार के समर्थन पर चर्चा  

यूक्रेन
यूक्रेन में रूस की हस्ताक्षेप पर बातचीत 

साइबर जासूसी
रूस पर अमेरिकी चुनाव में दखल का आरोप 

चीन
कोरोना उत्पति की जानकारी पर मदद 

बैन
32 रूसी कंपनियों पर बैन हटाने पर चर्चा   

अमेरिका-रूस में टकराव के 3 बड़े मुद्दे

1). मानवाधिकार

रूस से क्या चाहता है अमेरिका?
लोकतंत्र समर्थक नेता एलेक्सी नेवेल्नी को रिहा हों. एलेक्सी नेवेल्नी की पार्टी पर से प्रतिबंध हटाया जाए. राष्ट्रीय मीडिया को ज्यादा आजादी मिले. राजनीतिक कैदियों की रिहाई हो.

2). डिप्लोमेसी

दोनों देशों के बीच कटुता
मार्च में बाइडन ने पुतिन को ‘किलर’ कहा था. पुतिन ने खुली डिबेट का चैलेंज दिया. रूस ने वॉशिंगटन से अपना राजदूत वापस बुलाया. रूस में अमेरिका के राजदूत जॉन सुलिवान लौटे. रूस ने अमेरिका को 'अनफ्रेंडली कंट्री' लिस्ट में डाला.

3). चीन

रूस से क्या चाहता है अमेरिका?
कोरोना ओरिजिन पर सबूत और दस्तावेज चीन साझा करे. हॉन्गकॉन्ग और दक्षिण चीन सागर में चीन अपनी हरकतें रोके. अब तक कोरोना ओरिजिन पर रूस चीन के पक्ष में है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए रूस साथ दे.

अमेरिका और रूस, इन मुद्दों पर सहयोग संभव

न्यू स्टार्ट आर्म्स कंट्रोल ट्रीटी को लेकर फरवरी में दोनों देश दस्तखत कर चुके हैं.
कलाइमेंट चेंज को लेकर बाइडन और पुतिन दोनों ज्यादातर मुद्दों पर सहमत हैं.
आर्कटिक को लेकर ग्लोबल वॉर्मिंग रिसर्च पर सहयोग को लगभग तैयार है.
ईरान के एटमी प्रोग्राम को रोकने की रणनीति बना सकते हैं.
अफगानिस्तान में फिर से आतंक का पनाहगार बनने से रोकने के लिए, अमन बहाली और आतंकवाद के खिलाफ साझा मिशन.

दुनिया भर से अभी कोरोना संक्रमण खत्म नहीं हुआ है, लेकिन कोरोना ने पूरी दुनिया को बड़े ही जबर्दस्त तरीके से प्रभावित किया है. क्या इस महामारी के बाद दुनिया की महाशक्तियां एकजुट होंगी? आज पूरी दुनिया में हथियारों की होड़ लगी हुई है. क्या ये होड़ कभी खत्म हो पाएंगी. दुनिया भर के देशों की आमदनी का बड़ा हिस्सा इसी में खर्च होता है. क्या ये खर्च कभी कम होगा?

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