• देश में कोविड-19 से सक्रिय मरीजों की संख्या 1,06,737 पहुंची, जबकि संक्रमण के कुल मामले 2,16,919: स्त्रोत-PIB
  • कोरोना से ठीक होने वाले लोगों की संख्या- 1,04,107 जबकि अबतक 6,075 मरीजों की मौत: स्त्रोत-PIB
  • एचआरडी मंत्री ने कक्षा XI और XII के लिए वैकल्पिक शैक्षणिक कैलेंडर जारी किया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: अप्रैल के लिए 73.86 करोड़ लाभार्थियों को 36.93 एलएमटी खाद्यान्न प्रदान किया गया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: मई के लिए 65.85 करोड़ लाभार्थियों को 32.92 एलएमटी खाद्यान्न उपलब्ध कराया गया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: जून के लिए 7.16 करोड़ लाभार्थियों को 3.58 एलएमटी खाद्यान्न प्रदान किया गया
  • पीएमजीकेपी के तहत प्रगति: 17.9 करोड़ परिवारों को 1.91 एलएमटी दालें दी गईं
  • देश भर के 688 प्रयोगशालाओं (480 सरकारी और 208 निजी प्रयोगशालाओं) में कुल परीक्षणों की संख्या 41+ लाख के पार
  • रेलवे ने 4197 श्रमिक स्पेशल ट्रेन का परिचालन किया; 58+ लाख यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया
  • सीएसआईआर-सीएमईआरआई के शोधकर्ताओं ने नए स्वदेशी वेंटिलेटर का विकास किया है जिसकी लागत 80,000-90,000 रुपये हैं

नकाबपोश चीन दुनिया के सवालों के घेरे में

चीन का खलनायक चरित्र किसी से छुपा नहीं है ख़ास कर उनसे तो बिलकुल नहीं जिन्हें इतिहास की समझ है. कोरौना वायरस चीन के बायोलॉजिकल वारफेयर का हिस्सा है या व्यापारिक युद्ध का भयंकर पैंतरा - ये बात तो बात में सामने आ ही जायेगी लेकिन आज सारी दुनिया के सामने चीन की विषैली नीयत साफ़ हो गई है..

नकाबपोश चीन दुनिया के सवालों के घेरे में

नई दिल्ली: चेहरा शख्सियत का आइना होता है, इसमें कोई संदेह नहीं. चीन का राष्ट्रीय प्रतीक ज़हरीला ड्रैगन है और यही चीन का चेहरा भी है.  2020 का साल जहां एक तरफ कोरौना वायरस के नाम से इतिहास में कुख्यात हो जायेगा वहीं दूसरी तरफ चीनी नकाब को उतार देने के लिए भी याद किया जाएगा. आज सारी दुनिया की उंगलियां चीन की तरफ उठ रही हैं और चीन के पास किसी सवाल का जवाब नहीं है.

G-7 के देशों ने माना

माइक पोम्पियो जो अमरीका के विदेश मंत्री हैं उन्होंने बेहिचक कहा है कि अब तक अमरीका का मानना था अब जी7 देशों ने भी माना है कि चीन कोरोना को लेकर गलत अफवाह फैला रहा है. अमरीकन विदेश मंत्री ने कहा कि सात औद्योगिक शक्तियों के समूह के विदेश मंत्रियों ने इस बात पर साफ़ तौर पर सहमति जतायी है कि चीन कोरोना वायरस महामारी के बारे में एक ‘‘गलत सूचना’’ अभियान चला रहा है.

''ये जानकारी सभी के पास थी''

महत्वपूर्ण तथ्य की तरफ इशारा करते हुए माइक पोम्पियो ने कहा कि बुधवार (25 मार्च) की सुबह आयोजित इस अहम बैठक में शामिल हर एक देश को इस गलत सूचना अभियान के बारे में पहले से पूरी जानकारी थी. इतना ही नहीं उन्होंने कहा कि आज जो दुनिया में हो रहा है, चीनी कम्युनिस्ट पार्टी उसकी जड़ में छुपे कारण पर से ध्यान हटाने का कोशिश कर रही है.

''दुनिया के हज़ारों लोगों के जीवन को चीन ने संकट में डाला''

अमेरिका के आरोपों की गंभीरता इस तथ्य से ज़ाहिर हुई जब माइक पॉम्पियो ने कहा कि ‘मेरी दिलचस्पी इस बात में है कि चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी अभी भी कोरोना वायरस को कवर अप करने में लगी है, दुनिया को इससे जुडी हुई गलत जानकारियां दी जा रही हैं. चीन अभी भी दुनिया को वो जानकारी देने का इच्छुक नज़र नहीं आ रहा है जिसके माध्यम से संक्रमण को रोका जा सके और इसके दोबारा इस महामारी के फिर से पैदा होने के खतरे को कम किया जा सके.

भारत और अमेरिका को रोका था चीन ने

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दिए अपने बयान में कहा था कि चीन में जानलेवा वायरस की जानकारी मिलते ही वह अमेरिकन मेडिकल एक्सपर्ट्स की एक टीम वहां भेजना चाहते थे लेकिन चीन ने उनको इसकी अनुमति नहीं दी. 

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हालांकि अमेरिका ने इस तथ्य का उल्लेख नहीं किया लेकिन सारी दुनिया की नज़र में ये बात आई थी कि भारत ने भी अपना एक विमान मेडिकल सहायता और मेडिसिन्स का तैयार करके चीन की मदद के लिए भेजने को तैयार कर दिया था लेकिन चीन ने लगभग एक हफ्ते उसे चीन में प्रवेश की अनुमति नहीं दी. आखिर चीन छुपाना क्या चाहता था और अभी भी क्या ऐसा है जिसे बताना नहीं चाहता?

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