Galwan: चीन ने पहली बार कबूला, गलवान में मारे गए उसके सैनिक

रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहला मौका है जब चीन ने यह स्वीकार किया है कि गलवान में उसके सैन्यकर्मी मारे गए थे तथा उनके बारे में विस्तार से जानकारी भी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से चार सैन्यकर्मी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान घाटी में भारत की सेना का सामना करते हुए मारे गए.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Feb 19, 2021, 11:33 AM IST
  • चीन की सेना के अखबार ‘पीएलए डेली’ में शुक्रवार को यह खबर प्रकाशित हुई
  • चीन ने पहली बार अपने मारे हुए सैनिकों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है
Galwan: चीन ने पहली बार कबूला, गलवान में मारे गए उसके सैनिक

नई दिल्लीः चीन की पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने शुक्रवार को पहली बार यह स्वीकार किया कि गलवान घाटी में उसके पांच सैन्य अधिकारियों और जवानों की मौत हुई थी. गलवान घाटी की झड़प पिछले साल 2020 में भारतीय सैनिकों के साथ हुई थी. 

चीन की सेना के आधिकारिक अखबार ‘पीएलए डेली’ में शुक्रवार को यह खबर प्रकाशित हुई. खबर के मुताबिक सेंट्रल मिलिट्री कमिशन ऑफ चाइना (सीएमसी) ने उन पांच सैन्य अधिकारियों और जवानों को याद किया जो काराकोरम पहाड़ियों पर तैनात थे. ये सैनिक जून 2020 में गलवान घाटी में भारत के साथ सीमा पर संघर्ष में मारे गए थे. 

अपने सैनिकों को चीन ने दिया सम्मान
‘ग्लोबल टाइम्स’ ने ‘पीएलए डेली’ की खबर के हवाले से बताया कि गलवान में झड़प के दौरान मरने वालों में पीएलए की शिनजियांग सेना कमान के रेजिमेंटल कमांडर क्वी फबाओ भी शामिल थे. गलवान घाटी में 15 जून को हुई झड़प के दौरान भारत के 20 सैन्यकर्मी शहीद हो गए थे. चार दशक से भी अधिक समय में भारत-चीन सीमा पर हुई यह सबसे हिंसक झड़प थी. 

पीएलए की हाइ कमान सीएमसी ने क्वी फबाओ को ‘‘सीमा की रक्षा करने वाले नायक रेजिमेंटल कमांडर’’ की उपाधि दी है. चेन होंगजुन को ‘‘सीमा की रक्षा करने वाला नायक’’ तथा चेन शियानग्रांग, शियो सियुआन और वांग झुओरान को ‘‘प्रथम श्रेणी की उत्कृष्टता’’ से सम्मानित किया. 

पहला मौका, जब चीन ने मानी हानि
रिपोर्ट के मुताबिक, यह पहला मौका है जब चीन ने यह स्वीकार किया है कि गलवान में उसके सैन्यकर्मी मारे गए थे तथा उनके बारे में विस्तार से जानकारी भी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि इनमें से चार सैन्यकर्मी वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गलवान घाटी में भारत की सेना का सामना करते हुए मारे गए.

भारत ने घटना के तुरंत बाद अपने शहीद सैनिकों के बारे में घोषणा की थी लेकिन चीन ने शुक्रवार से पहले आधिकारिक तौर पर यह कभी नहीं माना कि उसके सैन्यकर्मी भी झड़प में मारे गए थे. 

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दोनों देश हटा रहे हैं सेना
रूस की आधिकारिक समाचार एजेंसी टीएएसएस ने 10 फरवरी को खबर दी थी कि गलवान घाटी की झड़प में चीन के 45 सैन्यकर्मी मारे गए थे. सिंघुआ विश्वविद्यालय में नेशनल स्ट्रेटेजी इंस्टीट्यूट के अनुसंधान विभाग में निदेशक क्वियान फेंग ने ग्लोबल टाइम्स को बताया कि चीन ने घटना की जानकारी का खुलासा क्यों किया है.

उन्होंने कहा ताकि उन भ्रामक जानकारियों को खारिज किया जा सके जिनमें कहा गया था कि उक्त घटना में भारत के मुकाबले चीन को अधिक नुकसान पहुंचा था या फिर झड़प की शुरुआत उसकी ओर से हुई थी. PLA ने यह स्वीकारोक्ति ऐसे समय की है जब पैंगोंग झील के उत्तर और दक्षिण तट से दोनों देश अपने जवानों को हटा रहे हैं. 

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