हॉन्गकॉन्ग के साथ ज्यादती भारी पड़ेगी चीन को

चीन को सोचना ही होगा कि दुनिया में उसके दोस्त कितने कम हैं और दुश्मन कितने सारे.  अपनी करनी का परिणाम तो वैसे भी उसे भुगतना पड़ेगा पर अगर उसने हॉन्गकॉन्ग के साथ किसी तरह की जबरदस्ती करने की कोशिश की तो ये परिणाम इंस्टेंटली मिल जाएगा उसे..   

हॉन्गकॉन्ग के साथ ज्यादती भारी पड़ेगी चीन को

नई दिल्ली.  न खुदा ही मिला न विसाले सनम. ये हाल हो सकता है चीन के तानाशाह जिंग पिंग का. अब उसको सोचना पड़ेगा कि अपनी हरकतों पर लगाम कैसे लगाई जाए. दुनिया में चीन को बदनाम करके दुनिया भर में चीन और चीनियों के प्रति नफरत पैदा करने वाले शी जिंग पिंग को ये भी सोचना होगा कि जिस दिन चीन में उसकी दुष्टताओं का अंत होगा और तख्तापलट के हालात बने तो शी जिंग पिंग पर सौ से लेकर एक हज़ार तक मुकदमें चल सकते हैं. फिलहाल हॉन्गकॉन्ग पर विस्तारवादी दादागिरी की उसकी योजना पर पलीता लग सकता है. 

 

आत्मघाती हो सकता है ये क़ानून 

 हांगकांग के साथ जबरदस्ती करने से पहले चीन को हज़ार बार सोचना होगा. चीन हॉन्गकॉन्ग को लेकर जो ख़याली पुलाव पकाने में लगा है वो उसके दांत खट्टे भी कर सकता है और तोड़ भी सकता है. हांगकांग के खिलाफ लाया गया चीन का नया कानून आत्मघाती सिद्ध हो सकता है, और ये बात चीन की शी जिंग पिंग सरकार को भी समझ में आने लगी है. हॉन्ग कॉन्ग में तो इस क़ानून के खिलाफ विरोध चल ही रहा है, अमेरिका भी उसका कड़ा विरोध कर रहा है. 

लोकतंत्र विरोध है चीन का राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून 

अमेरिका की धमकियों के बावजूद चीन ने राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून पास करा ही लिया है. शी जिंग पिंग की मंशा इस विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के जरिए अब हांगकांग में वो सब कुछ खुलेआम करने की है जो कि हांगकांग की लोकतांत्रिक आवाज हमेशा के लिए दबा सके. हॉन्गकॉन्ग में इसका लगातार विरोध कर रहे लोकतंत्र समर्थक एक्टिविस्ट्स का मानना है कि इस क़ानून के सहारे चीन के हाथों हांगकांग में अब  एक लंबे अत्याचार और दमन की शुरुआत होने जा रही है,

 

चीन के खिलाफ तनी हैं ढेरों बंदूकें 

जहां चीन अमेरिका, भारत, ताइवान, हांगकांग, ऑस्ट्रेलिया और जापान से दुश्मनी के नित-नए मोरछे खोल रहा है वहीं कोरोना कॉन्सपिरेसी के इस मुजरिम के खिलाफ दुनिया के कई देशों ने एकजुटता दिखाई है. अमेरिका सहित कई पश्चिमी ताकतवर देश उस पर कार्यवाही कर सकते हैं. चीन पर आर्थिक प्रतिबंध लग सकते हैं और वह दुनिया में उत्तर कोरिया की तरह अकेला भी पड़ सकता है. अमेरिका ने चीन पर आर्थिक प्रतिबंधों की शुरुआत भी कर दी है. 

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