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समुद्र में चीन का विस्तारवाद घातक, अमेरिका ने भारत को किया आगाह

अमेरिका ने चीन की विस्तारवादी समुद्री नीति को लेकर भारत के लिए चेतावनी जारी की है. उसका मानना है कि चीन के विमानवाहक युद्धपोत भारतीय प्रभुत्व वाले हिंद महासागर में प्रवेश कर सकते हैं. यह चेतावनी भारत दौरे पर आए अमेरिका शीर्ष कमांडर जॉन एक्यूलिनो ने दी है.   

समुद्र में चीन का विस्तारवाद घातक, अमेरिका ने भारत को किया आगाह
अमेरिकी टॉप नेवी कमांडर ने किया भारत का दौरा, चीन से सतर्क रहने को कहा

नई दिल्ली: अमेरिका के शीर्ष नौसैनिक कमांडर जॉन एक्यूलिनो ने भारत का दौरा किया उन्होंने भारतीय एडमिरल कर्मवीर सिंह से मुलाकात की. दोनों सैन्य अधिकारियों के बीच भारत अमेरिका की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी पर भी विस्तार से चर्चा हुई. एडमिरल जॉन ने भारत और अमेरिका की सुरक्षा जरुरतों को साझा करार देते हुए दक्षिण चीन सागर में चीन की विस्तावादी नीतियों के बारे में बताया. 

समुंदर में पैर फैलाता जा रहा है चीन
अमेरिकी पैसिफिक फ्लीट के कमांडर जॉन एक्यूलिनो के बयान के मुताबिक विवादित दक्षिण चीन सागर में चीन की आक्रामकता बढ़ती रही है, इस बात की भी आशंका है कि चीन के विमानवाहक पोत हिंद महासागर में भी घुसने की कोशिश करें. उन्होंने बयान दिया कि 'मैं यहां लगातार देख रहा हूं कि कैसे कई देशों को डराया जा रहा है। मैं दक्षिण चीन सागर में मानव निर्मित चट्टान और कई अन्य तरह के निर्माण कार्य को भी देख रहा हूं।'एडमिरल जॉन ने आगे कहा कि किसी भी देश में क्षमता नहीं है कि चीन के बनाए गए द्वीपों को हटा सके। यहां चीन की आक्रामकता में कोई कमी नहीं आई है। वो यहां अपना उद्देश्य हासिल करने के लिए दबाव की रणनीति पर काम कर रहा है। यहां उसकी सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, जिससे अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए मुश्किलें भी बढ़ रही हैं''।

हिंद महासागर में भी घुसने की फिराक में है चीन
एडमिरल जॉन एक्यूलिनो ने चेताया कि कि वो इस इलाक़े में चीन की सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ती देख रहे हैं और संभव है कि हिन्द महासागर में भी ऐसा ही करे. एडमिरल जॉन ने कहा कि चीन अगर ऐसा करता है तो किसी को हैरान नहीं होना चाहिए. एडमिरल जॉन ने कहा कि आने वाले सालों में हिन्द महासागर में चीन की मौजूदगी और बढ़ सकती है. 
दरअसल हिंद महासागर भारत के प्रभाव वाला क्षेत्र है. लेकिन यह चीन के मालवाहक जहाजों के लिए एक प्रमुख रुट भी है. इसलिए भविष्य में इस क्षेत्र में चीन अपनी गतिविधियों में इजाफा कर सकता है. अमेरिका ने इसी बाबत चेतावनी जारी की है. 

चीन से पड़ोसियों को खतरा
अमेरिकी एडमिरल के मुताबिक चीन की विस्तारवादी नीतियों से उसके पड़ोसियों को खतरा है. उन्होंने बताया कि चीन दक्षिणी चीन सागर में सैन्य ठिकाना विकसित कर रहा है. अमेरिका के कई अहम सहयोगियों को इससे खतरा है.  दक्षिण चीन सागर पर ताइवान, वियतनाम, फिलीपीन्स, मलेशिया और ब्रूनेई भी दावा करते हैं. हालांकि एडमिरल जॉन ने भरोसा दिलाया कि अमेरिका और भारत हिंद महासागर क्षेत्र में स्वतंत्र आवाजाही के लिए साथ मिलकर काम करते रहेंगे।

क्या है दक्षिण चीन विवाद
दक्षिण चीन सागर पर इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल (हेग ट्रिब्यूनल) कह चुका है कि इस क्षेत्र पर चीन का कोई ऐतिहासिक अधिकार नहीं है. लेकिन चीन ने इस फैसले को मानने से इनकार कर दिया. 

ट्रिब्यूनल ने यह फैसला, फिलीपींस की उस याचिका पर सुनाया था जिसमें दक्षिण चीन सागर के ज्यादातर हिस्से पर चीन के दावे को चुनौती दी थी. फिलीपींस ने 2013 में इंटरनेशनल कोर्ट में चीन के खिलाफ केस दायर किया था. जिसमें उसने आरोप लगाया था कि पिछले 69 सालों में चीन का दक्षिण चीन सागर के 90 फीसद हिस्से पर कब्जा कर लिया है. उसने वहां न केवल कृत्रिम द्वीप बनाकर बड़ी तादाद में सेना भी तैनात की है.

दक्षिण चीन सागर, प्रशांत महासागर का एक हिस्सा है, जो सिंगापुर और मलक्का जलडमरू से लेकर ताइवान जलडमरू तक 35 लाख वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है। चीन के दक्षिण से ताइवान द्वीप तक और मलयेशिया के उत्तर पश्चिम से ब्रुनेई तक, इंडोनेशिया के उत्तर में, मलयेशिया और सिंगापुर के उत्तर-पूर्व में और वियतनाम के पूर्व में स्थित है यह समुद्री इलाका है।

दुनिया के लगभग आधे व्यापारिक जहाज इसी इलाके से गुजरते हैं, जिसके जरिये करीब 3.4 ट्रिलियन पाउंड का व्‍यापार होता है। इसके अलावा दक्षिण चीन सागर में तेल और गैस के भंडार भी मौजूद हैं. इसी वजह से स्प्रातली द्वीप समूह के द्वीपों को लेकर चीन, वियतनाम, मलयेशिया, फिलीपींस और ब्रुनेई के बीच विवाद चल रहा है.

पारासेल द्वीपसमूह पर 1974 तक चीन और वियतनाम का कब्जा था. 1974 में दक्षिण वियतनाम और चीन के बीच झड़प के बाद वियतनाम के 14 सैनिक मारे गए और चीन ने इस पूरे द्वीपसमूह पर अपना कब्जा जमा लिया. चीन इस इलाके से पीछे हटने के लिए तैयार नहीं है. फिलीपीन्‍स और वियतनाम के अलावा मलेशिया, इंडोनेशिया और सिंगापुर ने भी चीन को सावधान किया है। अमेरिका, ब्रिटेन ओर बाकी यूरोपियन यूनियन मध्‍यस्‍थता का समर्थन करते हैं।