अमेरिका के अल्टीमेटम के बाद भी चीन की करतूत, हांगकांग पर कानून को संसद ने लगाई मुहर

धोखेबाज और चालबाज चीन एक बार फिर अपनी चालाकी दिखाने की कोशिश में लग गया है. इस बार वो हांगकांग को लेकर संसद में कानून को पास करा लिया है. यानी ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद भी चीन अपनी करतूत से बाज नहीं आया, ऐसे में अमेरिका-चीन के बीच तनातनी बढ़नी लाजमी है..

अमेरिका के अल्टीमेटम के बाद भी चीन की करतूत, हांगकांग पर कानून को संसद ने लगाई मुहर

नई दिल्ली: ड्रैगन की चालबाजी की परत हर दिन खुलकर सामने आ रही है. हांगकांग पर विवादित राष्ट्रीय सुरक्षा कानून पर चीन की संसद ने मुहर लगा दी है. आपको याद दिला दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने विवादित कानून पर चीन को चेतावनी दी थी.

चीन की हांगकांग वाली चालबाजी

हांगकांग पर अधिकार बढ़ाने के लिए चीन ने कानून बनाया है. यानी चीन ने हांगकांग में आज़ादी आंदोलन को कुचलने के लिए अपने मंसूबे को कामयाब करने  के लिए कानून बनाया है.

तो आखिरकार ट्रंप के अल्टीमेटम के बाद भी चीन ने हांगकांग की आजादी कुचलने वाला कानून पास कर दिया. हांगकांग के खिलाफ चीन के इस  तानाशाही कानून से हांगकांग की स्वायत्ता खत्म हो जाएगी. हालांकि, अब अमेरिका चीन के कदम के खिलाफ UN तक पहुंच गया है.

हांगकांग की सड़कों पर जिनपिंग सरकार और उसकी तानाशाही के खिलाफ हुजूम है, हज़ारों लोग सड़कों पर हैं. तो वहीं चीन की सरकार हांगकांग के खिलाफ एक कानून लाकर उसके सारे हक छीनना चाहती है. यही प्रदर्शन अब अमेरिका का चीन के खिलाफ सबसे बड़ा हथियार बन गया है.

ट्रंप का चीन से ‘हांगकांग’ वाला बदला!

हांगकांग चीन से आज़ादी मांग रहा है और अमेरिका अब उसी आज़ादी को अपना खुलेआम समर्थन दे रहा है. चीन एक कानून लाकर हांगकांग के 1997 से चले आ रहे एक देश दो कानून के सिद्धांत को खत्म करना चाहता है. इसी बिल के खिलाफ अमेरिका ने यूएन का दरवाज़ा खटखटाया है.

UN तक पहुंचा चीन-अमेरिका विवाद 

अमेरिका ने हांगकांग के मामले पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की बैठक का आह्वान किया है. जिससे अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वो चीन के इस कानून का विरोध करेगा. चीन ने शुक्रवार को अपनी संसद में नया राष्ट्रीय कानून पेश किया. जो अब पास हो गया, ये बिल हांगकांग की स्वायत्ता के लिए सबसे बड़ा खतरा है.

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वहां दुनिया भर में अपने तानाशाही कानून का विरोध होता देख चीन बौखला उठा है और चीन ने इसे अपने आंतरिक मामलों में दखल बताया है. अमेरिका सिर्फ हांगकांग ही नहीं बल्कि ताइवान की स्वतंत्रता की मांग का भी समर्थन करता आया है. अमेरिका का ताइवान और हांगकांग को समर्थन देख चीन में अब डर फैलने लगा है कि कहीं अमेरिका की मदद से ये दोनों चीन के चंगुल से आजादी पाने में कामयाब ना हो जाएं.

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