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चीन का बड़ा प्लान! अगले 15 साल में भारत से 100 बिलियन डॉलर का इंपोर्ट करने का लक्ष्य

भारत ने पिछले पांच साल में जिस तेजी से तरक्की की है उसने उसे एक बड़ी आर्थिक शक्ति के तौर पर पहचान दिलाई है. दुनिया की पांचवी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश भारत का लक्ष्य जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का है. पूरी दुनिया इस समय भारत की ओर देख रही है जिसमें चीन भी शामिल है.

चीन का बड़ा प्लान! अगले 15 साल में भारत से 100 बिलियन डॉलर का इंपोर्ट करने का लक्ष्य

नई दिल्ली: राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत दौरे से ठीक पहले चीन के मीडिया ने भारत की आर्थिक ताकत पर मुहर लगाई है. चीन के अखबार ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि 21वीं सदी के एशिया का भारत के बिना भविष्य नहीं होगा. अखबार ने लिखा है कि 19वीं सदी में दुनिया का यूरोपीयकरण हुआ. 20वीं शताब्दी में इसका अमेरिकीकरण हुआ और 21वीं सदी एशिया की होगी. थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक लोग ये चीन के उदय और भारत की आर्थिक वृद्धि से जुड़ा है.

ग्लोबल टाइम्स में लिखा है कि चीन में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारत में पीएम मोदी के सत्ता में आने के बाद से दोनों देशों के रिश्तों में एक अलग गर्मजोशी देखने को मिल रही है. शी जिनपिंग और पीएम मोदी के बीच दूसरी अनौपचारिक मुलाकात उस दौर में हो रही है जब दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के नए मुकाम पर पहुंच चुका है. आज शाओमी, हुवेई, टीसीएल जैसी चीन की तमाम बड़ी कंपनियां भारत में कारोबार कर रही हैं तो अलीबाबा जैसी चीन की कंपनी ने पेटीएम ओला जैसी भारतीय कंपनियों में बड़ा निवेश किया है. जिससे हज़ारों रोजगार पैदा हुए हैं. चीन की कंपनियों ने पीएम मोदी के मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को हाथों हाथ लिया है. भारतीय कंपनियों ने भी चीन में निवेश बढ़ाया है.

फिक्की के एग्जीक्यूटिव कमेटी मेंबर विक्रमजीत सिंह साहनी का कहना है कि 'भारत और पाकिस्तान बहुत ही मजबूत आर्थिक साझीदार रहे हैं. और चीनी कंपनियों की भारत की आर्थिक ग्रोथ में योगदान का भारत सम्मान करता है.'

भारत और चीन के बीच सहयोग का असर कैसे पूरी दुनिया पर पड़ता है इसे फरवरी में जारी NASA की एक रिपोर्ट से समझा जा सकता है जिसमें कहा गया है कि आज दुनिया 20 साल पहले से ज़्यादा हरीभरी हुई है जिसका श्रेय भारत और चीन को जाता है. भारत और चीन ने जिस तरह पौधारोपड़ का कार्यक्रम चलाया और गहन कृषि को बढ़ावा दिया उससे ये मुमकिन हो पाया. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि 2040 तक एशिया का दुनिया की जीडीपी में 50% हिस्सा होगा. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि पहले पश्चिम में ये धारणा थी कि 21 वीं सदी चीन के नाम होगी लेकिन चीन के पूर्व राष्ट्रपति डेंग जियाओपिंग ने काफी पहले ये बात कह दी थी कि 21वीं सदी एशिया के नाम ज़रूर होगी लेकिन केवल चीन की वजह से नहीं बल्कि भारत का भी इसमें बड़ी भूमिका होगी.

फिलहाल भारत और चीन के बीच आर्थिक सहयोग तेज़ी से बढ़ रहा है

दोनों देशों के बीच सालाना व्यापार 95.5 अरब डॉलर का है. चीन ने पिछले 15 साल में भारत से 50 बिलियन डॉलर का इंपोर्ट किया है. भारत ने चीन के साथ बढ़ते व्यापार घाटे पर चिंता जताने के बाद अगले 15 साल में बढ़ाकर 100 बिलियन डॉलर करने का लक्ष्य रखा है. साथ ही कुछ ऐसी व्यवस्था करने का भरोसा दिया है ताकि भारत का चीन को निर्यात बढ़ सके. 125 भारतीय कंपनियां चीन में आईटी, टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं. भारत और चीन की कंपनियों के बीच 120 MOU साइन किए गए हैं.

ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि एशिया के दो दिग्गजों के बीच खिंचाव रहा है. खासकर भारत का भरोसा चीन पर नहीं रहा जिसकी वजह से दोनों के बीच आर्थिक जुड़ाव में रुकावट आई. माना जा सकता है कि पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की ऐसी दोस्ताना मुलाकातों से ये अविश्वास कम होगा. ग्लोबल टाइम्स ने लिखा है कि अगर दोनों देश आपसी रिश्तों को अच्छा नहीं रखते तो उनकी दूरियों का फायदा बाहरी ताकतें उठा सकती हैं. सीमा विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझा कर दोनों नेता दोस्ती और आर्थिक तरक्की की नई इबारत लिख सकते हैं. ये कहना गलत नहीं होगा कि बिना भारत चीन सहयोग के 21वीं सदी एशिया की सदी नहीं हो सकेगी.