हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर विवाद: जानिए किसने HCQ को बताया बेकार?

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन की उपयोगिता पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं, इतना ही नहीं एक मेडिकल शोध पत्रिका 'द लैंसेट' ने HCQ को बेकार बताया है...

हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन पर विवाद: जानिए किसने HCQ को बताया बेकार?

नई दिल्ली: कोरोना वायरस को मात देने के लिए हाईड्राक्सीक्लोरोक्वीन यानी HCQ की मांग पिछले दिनों दुनिया में बढ़ी थी और तमाम देशों ने भारत से इसके आयात की मांग की थी. भारत सरकार ने भी बड़ा कदम उठाते हुए इसके निर्यात पर लगी रोक को हटा लिया था. और भारी मांग तो देखते हुए कई देशों को इसकी सप्लाई भी की थी. लेकिन इस बीच एक अजीब दावा सामने आया है.

'द लैंसेट' पत्रिका ने HCQ को बताया बेकार

हेल्थ रिसर्च को प्रकाशित करने वाली नामी पत्रिका 'द लैंसेट' ने ये कह कर सबको चौंका दिया है कि कोविड-19 मरीज़ों के इलाज में हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन का कोई फायदा नहीं. ताजा रिसर्च के मुताबिक तो इस दवा के इस्तेमाल से मरीज़ों में मृत्युदर बढ़ रही है. ये दावा 15 हज़ार मरीज़ों पर जांच के बाद किया गया था.

इस पत्रिका द लैंसेट ने ट्वीट करके लिखा है कि 'प्राथमिक रिपोर्टों के आधार पर आए परिणामों से ये साफ होता है कि क्लोरोक्वीन और हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को अकेले या फिर एजिथ्रोमाइसिन के साथ खाना फायदेमंद नहीं है.' साथ ही पत्रिका ने ये भी दावा किया है कि इस दवा को खाने से अस्पताल में भर्ती संक्रमित मरीजों को नुकसान होने की आशंका होती है.

लेकिन लैंसिट के इन दावों का विरोध भी ट्विटर पर शुरु हो गया और आरोप लगाया गया कि पत्रिका पक्षपात कर रही है. एक ने ट्विटर पर कहा कि मेरे मुताबिक कोविड-19 बीमारी के शुरुआती लक्षण का पता लगते ही हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन खाने से फायदा होता है. इसके अलावा कई लोगों ने अपने अपने तरीके से विरोध जताया है.

अमेरिकी राष्ट्पति ट्रंप खा रहे HCQ 

कई देशों के साथ साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी भारत से हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा की मांग की थी और ट्रंप तो खुद जिंक के साथ  हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन दवा भी ले रहे हैं. क्योंकि साइंटिस्ट बता चुके हैं कि जिंक सप्लीमेंट और एंटीबायोटिक के साथ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन लेने से खतरा कम हो जाता है.

जिंक सल्फेट के साथ लेने पर कारगर

ग्रॉसमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन ने कोविड-19 के 932 मरीज़ों पर 2 मार्च से 5 अप्रैल तक शोध किया था. जिसमें से करीब आधे संक्रमितों को HCQ और एजिथ्रोमाइसिन (Azithromycin) के साथ साथ जिंक सल्फेट दिया था. जबकि आधे मरीजों को सिर्फ हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन दिया गया. जिंक सल्फेट के साथ दवा लेने वाले मरीजों में ठीक होने की दर दूसरे मरीजों से डेढ़ गुना अधिक देखी गई.. और मरने की दर भी 44 फीसदी कम देखी गई.

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भारत में भी इसके इस्तेमाल की अनुमति मिली हुई है. ICMR कह चुका है कि इसपर रोक लगाने का कोई इरादा फिलहाल नहीं है. लेकिन इसे डॉक्टरों की सलाह पर ही लें.

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