• कोरोना वायरस पर नवीनतम जानकारी: भारत में संक्रमण के सक्रिय मामले- 6,19,088 और अबतक कुल केस- 20,27,075: स्त्रोत PIB
  • कोरोना वायरस से ठीक / अस्पताल से छुट्टी / देशांतर मामले: 14,27,006 जबकि मरने वाले मरीजों की संख्या 42,518 पहुंची: स्त्रोत PIB
  • कोविड-19 की रिकवरी दर 67.98% से बेहतर होकर 68.32% पहुंची; पिछले 24 घंटे में 48,900 मरीज ठीक हुए
  • पीएम मोदी ने नई शिक्षा नीति को गेम चेंजर के रूप प्रशंसा की; इसे नए भारत की नींव बताया
  • चुनने, बदलाव और कौशल बढ़ाने का लचीली व्यवस्था देता है, संस्थानों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान अधिक स्वायत्तता प्रदान करता है
  • शिक्षण को खोज-आधारित और विश्लेषण-आधारित मोड में ले जाएगा
  • आत्मनिर्भर ऐप चैलेंज का ग्रैंड फिनाले आज आयोजित, इस दौरान फाइनलिस्ट ने देश में विकसित सर्वश्रेष्ठ भारतीय ऐप का प्रदर्शन किया
  • देश में जनवरी में 1 नैदानिक प्रयोगशाला थी जिसकी संख्या 1370 हो गई; जो पिछले 3 दिनों तक 6 लाख से अधिक जांच करने में सक्षम है
  • दिल्ली एयरपोर्ट ने एक पोर्टल का विकास किया जो देश भर में अंतर्राष्ट्रीय आगमन की प्रक्रिया को आसान और संपर्क-विहीन बनाएगा
  • जल जीवन मिशन के तहत अब 25% घरों में नल से पीने का पानी पहुंचता है, 2024 तक हर ग्रामीण तक पहुंचने का लक्ष्य है: जल शक्ति मंत्री

नागरिकता कानून में उलझने के बजाय खुद पर ध्यान दे EU, अस्तित्व पर संकट

किसी और देश के मामले में पड़ने से बेहतर है कि यूरोपियन यूनियन अपनी इस परेशानी का रास्ता निकालें. उनका खुद का अस्तित्व खतरे में है. ब्रिटेन के बाहर हो जाने के बाद EU पर गहरा आर्थिक असर पड़ेगा.  ब्रिटेन ईयू का अब तक का सबसे बड़ा और अहम हिस्सा था. इसका सीधा असर जर्मनी और फ्रांस पर अधिक पड़ेगा. 

नागरिकता कानून में उलझने के बजाय खुद पर ध्यान दे EU, अस्तित्व पर संकट

नई दिल्लीः यूरोपीय संघ की संसद में बुधवार शाम से CAA पर चर्चा शुरू होने जा रही है. भारत में बनाए गए नागरिकता संशोधन कानून को लेकर EU का यह रुख लोकतांत्रिक संप्रभुता में हस्तक्षेप की गलत परंपरा रख रहा है. जानकारी के अनुसार CAA  पर पहले यहां छह ड्राफ्ट पेश किए जाने थे, लेकिन अब पांच राजनीतिक ग्रुप ही इसमें शामिल हैं. एक समूह ने अपना नाम वापस ले लिया है. भारतीय समयानुसार रात 10ः45 बजे संसद में चर्चा शुरू होगी. इस बाबत भारतीय लोकसभा स्पीकर ने EU (यूरोपियन यूनियन) को पत्र लिखकर इस प्रस्तावना के खिलाफ आपत्ति जताई थी. 

हालांकि EU को पहले खुद पर ध्यान देना चाहिए
यूरोपियन यूनियन का यह कार्य किसी भी लिहाज से ठीक नहीं है. पहला तो यह कि नागरिकता कानून भारत का आतंरिक मसला है. इस पर बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं है. दूसरा यह कि इस वक्त यूरोपियन यूनियन खुद बुरे दौर से गुजर रहा है. ब्रिटेन उससे अलग हो रहा है और जनवरी के आखिरी दिन इस पर मुहर लग जाएगी. कुछ रोज पहले ही ब्रिटेन की महारानी ब्रेग्जिट से संबंधित विधेयक पर मुहर लगाकर इसे कानून की मंजूरी दी है. इस तरह ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन ब्रेग्जिट को लागू करने में सफल रहे हैं. 

ब्रेग्जिट से नुकसान की भरपाई कैसे करेगा EU
दरअसल ब्रिटेन के बाहर हो जाने के बाद EU पर गहरा आर्थिक असर पड़ेगा. बीते साल मार्च में जब ब्रेग्जिट को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी तब माना जा रहा था कि अगर बिना किसी शर्त और सहमति के ब्रेग्जिट हुआ तो इसका यूरोपियन संघ पर गहरा असर पड़ेगा. तब के अनुमान के मुताबिक यूरोप के लोगों की सलाना अरबों यूरो की आय कम हो जाएगी.

दरअसल ब्रिटेन ईयू का अब तक का सबसे बड़ा और अहम हिस्सा था. इसका सीधा असर जर्मनी और फ्रांस पर अधिक पड़ेगा. सहमति और सशर्त ब्रेग्जिट होने की सूरत में भी भले ही घाटा कम हो, फिर भी जर्मनी के लोगों को हर साल 5 अरब यूरो का घाटा झेलना ही पड़ेगा. किसी और देश के मामले में पड़ने से बेहतर है कि यूरोपियन यूनियन अपनी इस परेशानी का रास्ता निकालें. उनका खुद का अस्तित्व खतरे में है.

पांच राजनीतिक ग्रुप ला रहे हैं प्रस्ताव
CAA  के खिलाफ अंतिम साझा प्रस्ताव पांच राजनीतिक ग्रुप ला रहे हैं. इन ग्रुपों में रीन्यू ग्रुप (108 सदस्य), यूरोपीय यूनाईटेड लेफ्ट/नोर्डिक ग्रीन लेफ्ट ग्रुप (41 सदस्य), यूरोपीय पीपल्स पार्टी (182 सदस्य), प्रोग्रेसिव एलायंस ऑफ सोशलिस्ट एंड डेमोक्रेटिक ग्रुप (75 सदस्य) . पहले यूरोपियंस कंजरवेटिव्स एंड रिफॉर्मिस्ट्स ग्रुप (66 सदस्य) भी इन ग्रुपों के साथ था लेकिन उसने अब अपना नाम वापस ले लिया है. इस तरह कुल 751 सदस्यीय संसद में अब प्रस्ताव लाने वाले ग्रुपों के सांसदों की संख्या 626 से घट कर 560 रह गई है. 

ओम बिरला ने लिखा था पत्र
स्पीकर ओम बिरला ने यूरोपियन संसद (ईयू) के अध्यक्ष डेविड मारिया ससौली को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी. अपने खत में बिड़ला ने CAA के औचित्य को समझाते हुए लिखा था कि यह पड़ोसी देशों में धार्मिक प्रताड़ना के शिकार हुए लोगों को आसानी से नागरिकता देने के लिए है. इसमें किसी की नागरिकता को छीनने जैसा कोई प्रस्ताव या बात नहीं है.

एक विधायिका का दूसरी विधायिका पर फैसला सुनाना गलत है, यह ऐसी परंपरा है जिसका निहित स्वार्थों के लिए निश्चित तौर पर दुरुपयोग किया जा सकता है. इस संदर्भ में मैं आपसे प्रस्तावित रिजॉलूशन पर पुनर्विचार की गुजारिश करूंगा और मुझे पूरा विश्वास है कि हम में से कोई भी अस्वस्थ उदाहरण पेश नहीं करेगा. 

CAA के विरोध में रेल रोकने गए थे, यात्रियों ने मजा चखा दिया