पाकिस्तान पड़ा दुनिया में अकेला, FATF जारी करेगा आखिरी चेतावनी

पाकिस्तान की किस्मत पर एफएटीएफ(फाइनेन्शियल एक्शन टाक्स फोर्स) का बड़ा फैसला आना महज वक्त की बात रह गया है. इसकी बैठक फ्रांस के पेरिस में चल रही है. वहां से आ रही खबरों से पता चलता है कि पाकिस्तान के खिलाफ अंतिम चेतावनी जारी करने की तैयारी चल रही है. उसका साथ देने के लिए दुनिया का कोई देश तैयार नहीं है. 

पाकिस्तान पड़ा दुनिया में अकेला, FATF जारी करेगा आखिरी चेतावनी
बहुत बड़ी मुश्किल में पाकिस्तान

नई दिल्ली: आतंकवादियों को बढ़ावा देने की तैयारी में लगे पाकिस्तान पर सख्त कार्रवाई की तैयारी चल रही है. फाइनेन्शियल एक्शन टाक्स फोर्स यानी एफएटीएफ पाकिस्तान को डार्क ग्रे लिस्ट में डालने की तैयारी कर रहा है. यह किसी भी देश के लिए आखिरी चेतावनी मानी जाती है. जिसके बाद उस देश को ब्लैक लिसल्ट करने का ही विकल्प बाकी रह जाता है. 

दुनिया में अकेला पड़ गया पाकिस्तान 
पाकिस्तान एफएटीएफ में अकेला पड़ गया है. जिस तुर्की, मलेशिया और चीन से उसे उम्मीदें थीं, वह भी उसका साथ देने के लिए तैयार नहीं हैं. पाकिस्तान ने अपना साथ देने के लिए दुनिया के हर देश से संपर्क स्थापित किया था. उसने कश्मीर के मुद्दे पर तुर्की और मलेशिया का समर्थन भी जुटा लिया था. चीन तो उसका पुराना सहयोगी है ही. लेकिन एफएटीएफ के पास पाकिस्तान के खिलाफ इतने सबूत हैं कि कोई भी देश आतंकवाद को समर्थन देने के मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़ा होने के लिए तैयार नहीं है. 

आतंकियों का समर्थक है पाकिस्तान
पाकिस्तान की नीतियों में आतंवाद और आतंकी संगठनों की बेहद अहम भूमिका है. पाकिस्तान इनका इस्तेमाल नॉन स्टेट एक्टर्स के तौर पर करता है. यानी जहां पर उसका प्रशासन, सेना या सरकार का बस नहीं चलता वहां पर पाकिस्तान अपने हित साधने के लिए आतंकवादियों का प्रयोग करता है. ऐसा वह भारत, अफगानिस्तान सहित दुनिया के कई देशों में कर चुका है. पाकिस्तान में हाफिज सईद और मसूद अजहर ही नहीं बल्कि ओसामा बिन लादेन जैसे दुनिया भर के खूंखार आतंकवादी शरण लेते हैं. यही नहीं पाकिस्तान दुनिया भर के आतंकी संगठनों के लिए पैसा जुटाने में मदद भी करता है. जिसमें मनी लांड्रिंग, टेरर फाइनेन्सिंग जैसे हथकंडे शामिल हैं. पाकिस्तान अपनी इन्हीं आतंकी समर्थक गतिविधियों के कारण दुनिया भर में अलग थलग पड़ चुका है. इन्हीं वजहों से अब उसका साथ कोई भी देश नहीं देना चाहता. 

डार्क ग्रे लिस्ट में जाने का खतरा
पेरिस में चल रही एफएटीएफ की बैठक से यह खबरें छन कर आ रही हैं कि पाकिस्तान को डार्क ग्रे लिस्ट में डाला जा सकता है. यह ब्लैक लिस्ट किए जाने से पहले की प्रक्रिया है. जो कि सबसे सख्त चेतावनी मानी जाती है. पाकिस्तान जून 2018 से ही ग्रे लिस्ट में शामिल है. उसे 27 प्वाइंट का एक्शन प्लान देते हुए साल भर का समय दिया गया था. लेकिन पाकिस्तान सिर्फ 6 प्वाइंट ही पूरे कर पाया है. दरअसल पाकिस्तान और उसकी खुफिया एजेन्सी आईएसआई ने सालों मेहनत करके आतंकवाद की जो समानांतर व्यवस्था कायम की थी, वह अब उसे छोड़ नहीं रहा है. 

यह है पाकिस्तान का अंजाम
पाकिस्तान के आतंकवादियों से संबंध के मामले पर विचार कर रही एफएटीएफ फ्रांस की राजधानी पेरिस स्थित एक अंतर सरकारी संस्था है. जो कि किसी भी देश के द्वारा आतंकवादियों को आर्थिक या किसी भी तरह की दूसरी मदद देने पर नजर रखती है. यह संस्था 1989 से काम कर रही है. एफएटीएफ जिस देश को ब्लैक लिस्ट करती है उसे दुनिया की कोई भी अंतरराष्ट्रीय संस्था किसी तरह का कर्ज या आर्थिक मदद नहीं देती है. 
पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पहले से खस्ताहाल है. ऐसे में अगर उसे अंतरराष्ट्रीय समुदाय की मदद मिलनी बंद हो जाती है तो वह कई टुकड़ों में टूट जाएगा. 

ऐसे में पाकिस्तान के सामने दो ही विकल्प बचते हैं- या तो वह आतंकियों से पूरी तरह पल्ला झाड़कर अलग हो जाए, या फिर आर्थिक रुप से दिवालिया होकर कई हिस्सों में विभाजित हो जाए.