अब मचेगी आसमान में धूम! 3D प्रिंटिंग से बनेंगे फाइटर जेट्स के पार्ट्स; जंग के मैदान में नई टेक्नोलॉजी की दस्तक

3D Printing in Fighter Jets: दुनिया के सभी देश लगातार नई टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहे हैं. आज की रक्षा तकनीक की तस्वीर काफी ज्यादा बदल गई है. आज के समय में 3D प्रिंटिंग ने तकनीकी क्षेत्र में काफी ज्यादा बदलाव ला दिया है. यह तकनीक आज फाइटर जेट्स के निर्माण की कहानी को पूरी तरह से बदल रही है.   

Written by - Ayush Mishra | Last Updated : Nov 8, 2025, 06:11 PM IST
  • 3D प्रिंटिंग से कम समय में बनते हैं पार्ट्स
  • ऐसे पार्ट्स में कम होता है रिपेयरिंग का खर्चा
अब मचेगी आसमान में धूम! 3D प्रिंटिंग से बनेंगे फाइटर जेट्स के पार्ट्स; जंग के मैदान में नई टेक्नोलॉजी की दस्तक

3D Printing in Fighter Jets: फाइटर जेट्स किसी भी देश की एक बड़ी ताकत माने जाते हैं. किसी भी फाइटर जेट को बनने में काफी ज्यादा समय लगता है. लेकिन आज के समय में 3D प्रिंटिंग के इस्तेमाल से लड़ाकू विमान के कई हिस्से कुछ ही समय में तैयार किए जा सकते हैं. इस रिपोर्ट में हम आपको फाइटर जेट्स के उन हिस्सों के बारे में बताएंगे जिन्हें 3D प्रिंटिंग की मदद से बनाए जा सकते हैं. 

इंजन कंपोनेंट्स 
किसी भी फाइटर जेट का इंजन उसका दिल माना जाता है. फाइटर जेट का इंजन उसका सबसे कठिन हिस्सा भी होता है.  पुराने तरीकों से इंजन के फ्यूल नोजल्स और टर्बाइन ब्लेड्स को बनाने में काफी मुश्किलें होती हैं. लेकिन, 3D प्रिंटिंग की मदद से फाइटर जेट के इन हिस्सों को बेहद सटीक डिजाइन के साथ में तैयार किया जा सकता है.  इसकी मदद से इंजन की ईंधन क्षमता और परफॉर्मेंस भी बढ़ती है. 

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स्ट्रक्चरल ब्रैकेट्स और पैनल्स 
किसी भी फाइटर जेट के अंदर मौजूद सिस्टम, सेंसर और इलेक्ट्रिक वायरिंग को एक जगह पर रखने के लिए ब्रैकेट्स की जरूरत पड़ती है. आज के समय में 3D प्रिंटिंग से बनाए गए ये ब्रैकेट्स पुराने ब्रैकेट्स से काफी ज्यादा हल्के और मजबूत हो गए हैं. इससे विमान का वजन भी घटता है जिससे फ्यूल की काफी बचत होती है. आज के समय में Airbus जैसी कंपनी ने अपने विमानों के अंदर 3D प्रिंटेड पैनल्स का इस्तेमाल करने लगी है. इन पैनलों की मदद से केबिन के अंदर खाली जगहों को भरने के साथ-साथ सीटों को आकार देने और विमान के इंटीरियर को कस्टमाइज भी किया जाता है. ऐसे पैनल्स को कम समय में जल्दी से तैयार किया जा सकता है. 

रिप्लेसेबल इंजन पार्ट्स
आज के समय में कई देश नई तकनीकों का इस्तेमाल कर रहे हैं. ब्रिटेन के Tornado 2 Tempest प्रोजेक्ट के अंडर पुराने जेट्स के धातु हिस्सों को पिघलाने के बाद नए 3D प्रिंटेड पार्ट्स का निर्माण किया जा रहा है. इन पार्ट्स में फैन ब्लेड्स, नोज कोन और इंजन के छोटे पुर्जे शामिल हैं. ऐसे पार्ट्स किसी भी रिपेयरिंग प्रक्रिया को काफी ज्यादा तेज बना देते हैं और कठिन सुरक्षा टेस्टिंग को पास करते हैं. 

हथियार प्रणाली वाले हिस्से
आज के समय के मॉर्डन फाइटर जेट्स में 3D प्रिंटेड हिस्सों का इस्तेमाल मिसाइल पायलॉन और वेपन माउंट्स में किया जा रहा है. रॉयल एयर फोर्स ने अपने फाइटर जेट Typhoon पर पहला 3D प्रिंटेड टाइटेनियम पार्ट लगाया है. इसके लगने से रिपेयरिंग में समय की बचत के साथ-साथ मेंटेनेंस की लागत भी काफी कम हो गई है. 3D प्रिंटिंग टेक्नोलॉजी ने एयरोस्पेस इंडस्ट्री में इनोवेशन की नई दिशा दिखाई है. इससे बनने वाले हर हिस्से को कठिन सुरक्षा से गुजारा जाता है. यह टेक्नोलॉजी डिजाइन के साथ रिपेयरिंग और उत्पादन में काफी तेजी लेकर आई है.  

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About the Author

Ayush Mishra

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से ताल्लुक रखने वाले आयुष मिश्रा ने अपनी पत्रकारिता करियर की शुरुआत ज़ी मीडिया के साथ की है. वो फिलहाल ज़ी भारत के लिए ट्रेनी जर्नलिस्ट है. ...और पढ़ें

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