न रनवे, न ब्रेक! हवा में ऐसे होते हैं फाइटर जेट्स रिफ्यूल; एक गलती पर हो सकती तबाही

Aerial Refuelling: दुनिया में आज के दौर में कई ऐसे विमान हैं जो लंबी दूरी की उड़ान भरने के लिए जाने जाते हैं. कई देश ऐसे हैं जो अपनी वायु सेना में खतरनाक फाइटर जेट्स रखते हैं. आपने काफी बार फाइटर जेट्स के रिफ्यूलिंग के बारे में सुना होगा. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हवा में इन्हें कैसे रिफ्यूल किया जाता है?  

Written by - Ayush Mishra | Last Updated : Nov 8, 2025, 10:27 PM IST
  • हवा में विमानों की रिफ्यूलिंग के लिए इस्तेमाल होते हैं 2 सिस्टम
  • 15,00 से 10,000 मीटर की ऊंचाई पर होती है यह प्रक्रिया
न रनवे, न ब्रेक! हवा में ऐसे होते हैं फाइटर जेट्स रिफ्यूल; एक गलती पर हो सकती तबाही

Aerial Refuelling: आज के समय में दुनिया लगातार तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ रही है. फाइटर जेट्स को अक्सर लंबी दूरी की उड़ान भरते समय रिफ्यूल किया जाता है. जिससे वे जमीन पर उतरे बिना अपनी मंजिल तक पहुंच सकें. इस प्रक्रिया में भी Aerial Refuelling तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है. इस रिपोर्ट में हम आपको बताएंगे कि फाइटर जेट्स को हवा में कैसे रिफ्यूल किया जाता है. 

हवा में कैसे होती है रिफ्यूलिंग?
किसी भी फाइटर जेट को हवा में रिफ्यूल करते समय कई बातों का ध्यान रखना होता है. फाइटर जेट को ज्यादातर 1,500 से 10,000 मीटर की ऊंचाई पर ही रिफ्यूल किया जाता है. जब भी किसी फाइटर जेट को रिफ्यूल किया जाता है तो उस दौरान टैंकर विमान और फाइटर जेट दोनों को एक जैसी स्पीड और एक ऊंचाई पर उड़ना होता है. रिफ्यूलिंग के समय दोनों विमानों के बीच की दूरी सिर्फ 20 मीटर की होती है. किसी भी फाइटर जेट को रिफ्यूल करने की प्रक्रिया में लगभग 10 मिनट का समय लगता है और लगभग 1,500 किलोग्राम तक ईंधन भरा जा सकता है. आज के समय में किसी फाइटर जेट को रिफ्यूल करने के लिए 2 सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. 

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कौनसे सिस्टम का होता है इस्तेमाल?
दुनिया में इस समय किसी भी फाइटर जेट को हवा में रिफ्यूल करने के लिए फ्लाइंग बूम सिस्टम और प्रोब एंड ड्रॉग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाता है. फ्लाइंग बूम सिस्टम से रिफ्यूल करने में एक सख्त पाइप का इस्तेमाल किया जाता है, इस पाइप को टैंकर से फाइटर जेट की तरफ बढ़ाया जाता है. जिससे फाइटर जेट में ईंधन भर जाता है. यह सिस्टम कम समय में ईंधन भरने में सक्षम है. वहीं प्रोब एंड ड्रॉग सिस्टम में एक लचीली नली और उसके लास्ट में एक टोकरी जैसा स्ट्रक्चर होता है. फाइटर जेट अपने प्रोब को इस टोकरी जैसी संरचना में फिट करता है जिससे उसके अंदर ईंधन भरने लगता है. 

सटीकता क्यों है जरूरी?
हवा में किसी भी फाइटर जेट को रिफ्यूल करना बेहद कठिन काम होता है. इस प्रक्रिया में अगर छोटी सी भी गलती हो जाए तो काफी नुकसान हो सकता है. हवा में रिफ्यूलिंग के समय अगर स्पीड या दिशा में थोड़ा भी फर्क हो जाए तो पाइप निकल सकता है, जिससे बड़ा हादसा भी हो सकता है. जिसके चलते सटीकता बेहद जरूरी होती है. किसी भी तरह की घटना न हो पाए, इसके लिए टैंकर विमानों में हाई डेफिनिशन कैमरे, ऑटोमैटिक गाइडेंस सिस्टम और एक विशेष रिफ्यूलिंग ऑफिसर होता है. 

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Ayush Mishra

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से ताल्लुक रखने वाले आयुष मिश्रा ने अपनी पत्रकारिता करियर की शुरुआत ज़ी मीडिया के साथ की है. वो फिलहाल ज़ी भारत के लिए ट्रेनी जर्नलिस्ट है. ...और पढ़ें

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