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भारत-चीन के बीच वो 5 अहम मुद्दे, जिनपर चर्चा है बेहद जरुरी

शी जिनपिंग के भारत दौरे के मौके पर दोनो देशों के रिश्तों पर चर्चा चल रही है. कई आशंकाए भी जताई जा रही हैं. जैसे कि क्या चीन अपने पालतू पाकिस्तान से ज्यादा भारत के साथ अपने रिश्ते प्रगाढ़ करना चाहता है. क्या वह दोनों देशों के रिश्तों को नया आयाम देने को तैयार है. ये समीक्षा का विषय है. तो बताते हैं कि ऐसे कौन से 5 मुद्दे हैं जिनपर दोनों देशों के बीच चर्चा बेहद जरुरी है-    

भारत-चीन के बीच वो 5 अहम मुद्दे, जिनपर चर्चा है बेहद जरुरी
मोदी जिनपिंग के बीच क्या होंगे बातचीत के मुद्दे

नई दिल्ली: भारत दौरे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की यात्रा पहले से ही चर्चा का केंद्र बन चुका है. और हो भी क्यों नही एशिया की दो महाशक्तियों का इतिहास भले ही कुछ खट्टा रहा हो, पर बेहतर भविष्य की आशा हर बार रहती ही है. नपिंग की इस बहुप्रतिक्षित यात्रा के बाद भारत-चीन के आपसी रिश्ते किस नए मोड़ पर आ पहुंचते हैं, इसका इंतजार अमरीका, ब्रिटेन और भारत के धुर-विरोधी राष्ट्र पाकिस्तान को भी है. 

दोनों देशों के व्यापारिक संबंध 
दरअसल, भारत-चीन इस वक्त दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाएं हैं. एशिया की इन दो महाशक्तियों के बीच व्यापारिक संबंध फिलहाल 100 बिलियन डॉलर के करीब है. भारतीय बाजार अब भी चीनी उत्पादों से पटा हुआ है. चीनी सामानों पर उचित कर और चुंगी विश्व के अन्य बाजारों की तुलना में कही अधिक किफायती है, और भौगोलिक सीमा के हिसाब से भी भारत चीन के बीच की दूरी कम ही है. इससे चीनी उत्पादों को भारतीय बाजार में सस्ते ट्रांसपोर्ट खर्च के साथ लाना आसान हो जाता है. 

भारत चीन के बीच इन मुद्दों पर होनी चाहिए चर्चा
भारत-चीन के सामरिक रिश्तों की गांठ 1962 के युद्ध के बाद से ही और भी गहराती गई. ऐसे कई मौके आए जब टकराव मुख्यधारा तक पहुंच गया. इस द्विपक्षीय वार्ता में दोनों देशों के बीच किन अहम मुद्दों पर चर्चा की जानी चाहिए. आईए इस पर नजर डालते हैं- 

1. एशियाई ड्रैगन के आका जिनपिंग की ड्रीम योजना ‘वन बेल्ट वन रोड’ से विश्व पर वर्चस्व स्थापित करने की महत्वाकांक्षा के मुद्दे पर भारत ऐतराज जताते आया है, संभव है इस वार्ता के बाद कुछ परिणाम निकलें.

2. कश्मीर पर चीन की दखलअंदाजी का मसला फिलहाल उफान पर है, चीन की भारत-पाक के बीच मध्यस्थता के हालिया तेवर काम खराब कर सकते हैं. इस यात्रा के दौरान दोनों देश इसपर खुल कर बातचीत से निपटाने का प्रयास जरूर होना चाहिए.

3. भारत-चीन के मध्य डोकलाम, अरूणाचल और अक्साई ची को ले कर भी विवाद हाशिए पर आ गए हैं. दरअसल, तिब्बत मसले से शुरू हुआ जमीनी विवाद और गहराता चला आया है, जिसपर तुरंत किसी समझौते की जरूरत है,जिसका पालन भी किया जाए, खासकर चीन के द्वारा.

4. भारत-चीन के व्यापारिक रिश्ते भले ही आंकड़ों में आपको खुश कर दे, पर असल में चीनी उत्पादों का भारतीय बाजार पर कब्जा होने लगा है. व्यापारिक रिश्तों की शर्तों की अनदेखी करते हुए चीन भारतीय उत्पादों खासकर जेनेरिक मेडिसीन और खाद्य पदार्थों पर टैरिफ बढ़ा कर भारत को ट्रेड वॉर में उलझाने की साजिश से बाज नहीं आता. भारत-चीन के बीच इस पर भी साफ साफ बातें की जानी जरुरी है. 

5. भारत-चीन के बीच अपने पड़ोसी राज्यों के ऊपर अधिपत्य को ले कर सुप्रीमो बनने की होड़ लगी हुई है. दोनों ही देश एक साथ मिल कर सामंजस्य के साथ पड़ोसी राज्यों की मदद करने के बजाए एक-दूसरे को प्रतिस्पर्धा में धकेल दिया है. इससे उपजने वाले खराब संबंधों पर भी एकमत होने की जरूरत है.