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भारत के सामने झुक कर रहना चीन की नियति है

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान के साथ खड़े दिखाई देने वाले चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज भारत पहुंच रहे हैं. 62 की जंग, 67 की झड़प, डोकलाम विवाद, कश्मीर पर तल्खी जैसी घटनाओं के बावजूद दोनों देशों के बीच संवाद कभी नहीं टूटा है. एक बार फिर जिनपिंग और पीएम मोदी दक्षिण भारत के मामल्लपुरम(महाबलिपुरम) में बैठक करेंगे. आखिर क्या कारण है कि अपने सभी पड़ोसी देशों को घुड़कियां देने वाला चीन तमाम तल्खियों के बावजूद भारत के सामने बार बार झुकने के लिए मजबूर हो जाता है- 

भारत के सामने झुक कर रहना चीन की नियति है
भारत का साथ नहीं छोड़ सकता चीन

नई दिल्ली: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दूसरी बार अनौपचारिक तौर पर भारत के दौरे पर आ गए हैं. यह वो मौका है जब एशिया के दो बड़े ध्रुव भारत और चीन इस वर्ष जब ऐतिहासिक पंचशील समझौते की 65वीं वर्षगांठ मना रहे होंगे, तो चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आगमन के बाद दोनों देश आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक रिश्तों को प्रगाढ़ रूप देने की पुरजोर कोशिश करेंगे. 1954 में पंचशील समझौते के तहत हिन्दी-चीनी भाई-भाई से ले कर बाद के दिनों में अरूणाचल, लदाख और तिब्बत जैसे मसलों पर विवादास्पद रिश्ते होते चले गए. 

भारत का बाजार है चीन के लिए बेहद अहम
भारत और चीन इस वक्त विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक हैं. भारत फिलहाल चीन का सबसे बड़ा बाजार है. दोनों देशों के बीच हालिया व्यापारिक संबंध 70 बिलियन डॉलर से भी अधिक है. और शायद यहीं कारण है कि भारत-पाक में किसे प्राथमिकता के मामले पर अब समीकरण भी बदलने लगे हैं. लंबे समय से चली आ रही क्षेत्रीय और भूमि विवाद की आंच भी कुछ मद्धम हुई है. भारत द्वारा जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकी घोषित कराए जाने के प्रस्ताव पर चीन पहली बार भारत के साथ खड़ा नजर आया और उसके पक्ष में मतदान किया. और हो भी क्यों न, दुनिया का सबसे बड़ा मैन्यूफैक्चरिंग हब चीन, दुनिया के सबसे बड़े बाजार( भारत) को नाराज करने का खतरा मोल नहीं लेगा. अपने निर्यात दर को सुरक्षित और संतुलित बनाए रखने के डर से ही सही,चीन भारत से सौहादपूर्ण संबंध बनाए रखने को मजबूर है. 

विवादों भरा रहा है, अब तक का सफर 
इतने वृहद पैमाने पर व्यापारिक रिश्तों के बावजूद चीन और भारत के बीच कई मसलों पर तकरार भी है. फिर वो चाहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे का मामला हो या डोकलाम विवाद का, एनएसजी में भारत की सदस्यता को ले कर हो या पड़ोसी राज्यों पर अपने अधिकार को ले कर, इन सभी विषयों पर  विवाद सामरिक रिश्तों को मलिन करते दिखे. चीन की पाकिस्तान के साथ नजदीकी और ग्वादर से कश्गर तक 46 बिलियन डॉलर की बेल्ट और सड़क मार्ग की चीन की ड्रीम योजना भारत के लिए मुश्किलें खड़ी करती नजर आई है. यह सड़क मार्ग पाक अधिकृत कश्मीर के गिलगिट-बाल्टिस्तान क्षेत्र से हो कर गुजरेगी, जो भारतीय सीमा के काफी करीब है. सीमा सुरक्षा के लिहाज से भारत इसे ले कर चिंतित रहता है. जिनपिंग की भारत यात्रा से एक बार फिर इस समस्या के निपटारे का कयास लगाया जाने लगा है. 

पूरी दुनिया पर काबिज होना चाहता है चीन
चीन अमरीका को पछाड़ दुनिया का सुपरपॉवर देश बनने की महत्वाकांक्षा रखता है. ड्रैगन की इसी महत्वाकांक्षा ने तकरीबन सभी देशों के साथ उसके रिश्ते खराब कर दिए हैं. चीन को यह डर सताता है कि भारत पड़ोसी राज्यों को अपने पाले में कर चीन के सामने मुश्किलें खड़ी कर सकता है. और क्योंकि भारत सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है और भारत से उलझकर चीन वैश्विक मंचों पर और अलग-थलग नहीं पड़ना चाहता. पाकिस्तान और उतर कोरिया को छोड़ दें तो चीनी सीमा से सटे 14 से भी अधिक देशों के साथ चीन के रिश्ते तनावपूर्ण ही हैं. भारत दौरे पर चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन तमाम भू-राजनीतिक गणितों को ध्यान में रखकर ही किसी एमओयू पर मंजूरी देंगे. दरअसल चीन भारत से उलझकर अपनी ताकत कम नहीं करना चाहता. क्योंकि उसकी नजर अमेरिका की जगह लेना है. 
    
कई क्षेत्रों में दोनों देशों को साथ मिलकर काम करने की जरुरत
भारत-चीन संबंधों में सुधार की गुंजाइश कई क्षेत्रों में समग्र रूप से रहती ही है, और अब भी है. भारत चीन से एकजुट हो कर आतंकवाद के खिलाफ साथ लड़ने की मांग करता आया है. इसके अलावा क्षेत्रीय व्यापार, संरचनागत विकास और आर्थिक संबंधों के क्षेत्र में भी बहुआयामी रास्ते हैं जिस पर दोनों देश एक मंच पर हो सकते हैं. और क्योंकि भारत, चीन के उत्पादों का सबसे बड़ा बाजार है, ऐसे में दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्ते फलीभूत होने के आसार ज्यादा हैं. कई अंतरराष्ट्रीय संगठन और मंचों पर, फिर चाहे ब्रिक्स हो या शंघाई सहयोग संगठन, आसियान+2 हो या संयुक्त राष्ट्र, भारत-चीन के संबंधों में काफी बदलाव की जरूरत है. अब ऐसे में जिनपिंग के भारत दौरे का क्या परिणाम निकलता है, यह देखना दिलचस्प होगा.