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पाकिस्तानियों को नहीं कश्मीर से मतलब, इमरान सरकार ने फालतू खड़ा कर रखा है झमेला

आए दिन पाकिस्तान के नेता-राजनेता, सत्ता पक्ष-विपक्ष दोनों ही कश्मीर को मुद्दा बनाकर खबरों में बने रहते हैं. पाकिस्तान के नेताओं को लगता है कि पाकिस्तानी आवाम का रूझान उनकी ऊल-जुलूल बातों की ओर ज्यादा है. लेकिन पाकिस्तान की जनता ने पूरी तरह से पाकिस्तानी नेताओं को स्पष्ट कर दिया है कि बड़ी-बड़ी बातों से देश नहीं चलता है.

पाकिस्तानियों को नहीं कश्मीर से मतलब, इमरान सरकार ने फालतू खड़ा कर रखा है झमेला

नई दिल्ली: गैलप ने पाकिस्तान में एक सर्वे किया. इस सर्वे में ऐसी सच्चाई सामने आयी है, जिसने कश्मीर के मुद्दे को पाकिस्तान में सबसे बड़ा बताने वालों के मुंह पर ताला लगा दिया है. सर्वे में पाया गया कि पाकिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी यानी 53 प्रतिशत लोग महंगाई से परेशान हैं. पाकिस्तान की जनता बढ़ती महंगाई से त्रस्त है मतलब देश की अर्थव्यवस्था ही सबसे बड़ी समस्या है. 

पाकिस्तानियों के लिए बेरोजगारी सबसे बड़ा मुद्दा

सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था के बाद बेरोजगारी को लोगों ने दूसरा बड़ा मुद्दा बताया जो लगभग 23 प्रतिशत है. कश्मीर मुद्दा इन मसलों से काफी पीछे है, जो केवल 8 प्रतिशत है. यानी पाकिस्तानी नेताओं को पाकिस्तान की जनता ने करारा जवाब दे दिया है कि पहले देश की आम जनता पर ध्यान देने की जरूरत है ना कि कश्मीर मसले पर चिंतन करते रहने की. कश्मीर मुद्दे के बाद भ्रष्टाचार और जल संकट 4 प्रतिशत के साथ चौथे स्थान पर काबिज है. यह खबर भी सामने आई है कि पाकिस्तान में अभी महंगाई जिस स्तर पर पहुंच चुकी है वह पाकिस्तान के इतिहास में पहली बार है. अब इस रिपोर्ट के बाद ऐसा लग रहा है कि पाकिस्तान के बड़बोले नेताओं को कश्मीर मसलों पर बयानबाजी करने की जगह अपने देश के आवाम की समस्याओं का सामाधान करने की जरूरत है.

पाकिस्तान के इन इलाकों की स्थिति है बुरी
गैलप ने आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के सभी चारों प्रांतों में सर्वे किया है जिसमें बलूचिस्तान, खाइबर पख्तूनख्वा, पंजाब और सिंध प्रांतों के लोग शामिल हैं.

बता दें कि पाकिस्तान में बलोचिस्तान, सिंध में हैदराबाद, लाहौर, फैजलाबाद और कराची की स्थिति सबसे खराब है क्योंकि इन जगहों की अर्थव्यवस्था बाकी जगहों के मुकाबले निम्न स्तर पर है.

IMF  से ली जा रही है मदद
इससे पहले जुलाई 2019 में अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी रिपोर्ट जारी कर कहा था कि पाकिस्तान अपने कमजोर और असंतुलित विकास दर की वजह से आर्थिक चुनौतियों से संघर्ष कर रहा है और अर्थव्यवस्था काफी निम्न स्तर पर है.

इसकी वजह थी पाकिस्तान की आरक्षित मुद्रा, जिसके तहत पाकिस्तान और IMF ने 6 अरब रुपये के बेल आउट पैकेज पर हस्ताक्षर किया है. इसका उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को सही करना है. इसके अतिरिक्त पाकिस्तान ने कतर, चीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से भी बेल आउट पैकेज लिए हैं. ऐसे में कश्मीर का राग अलापने वाली पाकिस्तानी हुकूमत अपनी देश की अर्थव्यवस्था पर ध्यान दे तो ज्यादा बेहतर होगा.