6th Generation Fighter Jet GCAP News Update: अमेरिका, चीन, रूस दुनिया के तीन देश हैं, जिन्होंने 5वीं पीढ़ी का फाइटर जेट बना लिया है. दुनिया में मौजूद सभी घातक फाइटर जेट्स में 5वीं पीढ़ी के फाइटर जेट F-35, Su-57 और J-20 आते हैं. हालांकि दुनिया जिस रफ्तार से नए फाइटर जेट बनाने की रेस में है, उससे लगता है ये 5वीं पीढ़ी के विमान भी जल्द रिटायर होने के कगार पर पहुंच जाएंगे. तकनीक की दुनिया में नए अविष्कारों के मद्देनजर चीन, अमेरिका 6वीं पीढ़ी के विमान की भी तैयारी में जुट गए हैं. अमेरिका और चीन को टक्कर देने के लिए 4 देश मिलकर एक 6वीं पीढ़ी का घातक विमान बना रहे हैं.
दुनिया के सबसे घातक विमान को रोम, ब्रिटेन, जापान और इटली द्वारा बनाया जा रहा है. इसका नाम GACP रखा गया है, जिसका पूरा नाम Global Combat Air Programme है. अब इसमें एक बड़ा अपडेट सामने आया है. इस प्रोजेक्ट से जुड़े ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय के अधिकारी ग्रुप कैप्टन बिल सैंडर्स ने कहा है कि यह विमान इतनी आधुनिक तकनीक से लैस होगा कि यह किसी भी प्रकार के हथियार को ले जाने और किसी भी ड्रोन के साथ काम करने में सक्षम होगा.
4 देश मिलकर बना रहे फाइटर जेट
ब्रिटिश डिफेंस अधिकारी के मुताबिक, इस लड़ाकू विमान में ऐसे वेपन वे बनाए जा रहे हैं, जो ब्रिटेन, जापान, इटली, नाटो देशों और अमेरिका के किसी भी हथियार को फिट कर सकें. उन्होंने कहा “यूक्रेन युद्ध से हमें एक बड़ा सबक मिला है कि युद्ध के दौरान हथियारों का स्टॉक जल्दी खत्म हो जाता है और सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ता है. इसलिए जरूरत है एक ऐसे विमान की, जो किसी भी उपलब्ध देश के हथियारों को इस्तेमाल कर सके.”
सैंडर्स ने हर हथियार फायर करने में सक्षम GCAP
सैंडर्स ने यह भी बताया कि युद्ध की शुरुआत में महंगे और सटीक हथियारों का इस्तेमाल जरूरी होता है, ताकि दुश्मन की रक्षा प्रणाली को तोड़ा जा सके, लेकिन जैसे-जैसे दुश्मन की रक्षा कमजोर होती जाती है, वैसे-वैसे कम कीमत वाले “डम्ब बम” यानी बिना गाइडेंस वाले बमों का इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि अगर दुश्मन के हर टारगेट को हिट करने के लिए मंहगे हथियारों का इस्तेमाल करेगें तो आर्थिक स्थिति खराब हो जाएगी.
हर देश के ड्रोन के साथ बैठाएगा तालमेल
सैंडर्स के अनुसार GCAP की फ्लेक्सिबल वेपन बे सिस्टम इस काम में मदद करेगा ताकि हर लक्ष्य के लिए सही हथियार और सही लागत का संतुलन बनाया जा सके. उन्होंने आगे बताया कि जैसे GCAP किसी भी देश के हथियारों के साथ काम कर सकता है, वैसे ही यह किसी भी तरह के ड्रोन (Collaborative Combat Aircraft) के साथ भी ऑपरेट कर सकेगा. रक्षा विशेषज्ञ डगलस बैरी के मुताबिक, ब्रिटेन, जापान और इटली तीनों देश अपने-अपने सॉवरेन ड्रोन सिस्टम विकसित कर रहे हैं, जिन्हें वे GCAP के साथ जोड़ेंगे.
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