China Go Back नारों से नेपाल गूंजा, चीन के अतिक्रमण के बाद भी ओली मौन!

बुधवार को काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के बाहर नेपाली युवाओं ने विरोध किया और चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. उन्होंने यहां चीनियों वापस जाओ, Go Back के नारे लगाए. उनका विरोध इस बात पर था कि पड़ोसी देश चीन, नेपाल की सीमा में अंदर तक घुस आया है और कई इमारतों का निर्माण कर लिया है. 

China Go Back नारों से नेपाल गूंजा, चीन के अतिक्रमण के बाद भी ओली मौन!

नई दिल्लीः नेपाल में बनी कम्यूनिस्ट सरकार किस तरह के एक स्वतंत्र देश की संप्रभुता के लिए खतरा बनती जा रही है, इसकी स्पष्ट बानगी है नेपाल में बढ़ता जाता चीन का अतिक्रमण. पिछले तकरीबन 5 महीने से ओली चीन की जुबान बोल रहे थे और इधर उनके अपने देश की जमीन ड्रैगन के शिकंजे में जाती रही.

नतीजा यह है कि नेपाल में कब्जा कर चीन ने इमारतें बना ली हैं और इससे आक्रोशित जनता सड़क पर उतर आई है. 

लगे Go Back के नारे
जानकारी के मुताबिक, बुधवार को काठमांडू स्थित चीनी दूतावास के बाहर नेपाली युवाओं ने विरोध किया और चीन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की. उन्होंने यहां चीनियों वापस जाओ, Go Back के नारे लगाए.

उनका विरोध इस बात पर था कि पड़ोसी देश चीन, नेपाल की सीमा में अंदर तक घुस आया है और कई इमारतों का निर्माण कर लिया है. इन भवनों की संख्या 9 से 11 तक बताई जा रही है. 

सामने आया है कि नेपाल के हिम्ला जिले में सीमा स्तम्भ से करीब दो किलो मीटर की दूरी पर नेपाली भूमि पर कब्जा करके चीन के सैनिकों ने 9 भवनों का निर्माण किया है. यहां तक की चीनियों ने इस जगह पर नेपाली नागरिकों के जाने पर भी रोक लगा दी है.

इस जानकारी के बाहर आने के साथ ही नेपाल सरकार ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासनिक अधिकारियों को जानकारी के लिए ग्राउंड पर भेजा है. 

सरकारी अफसर ने की इसकी पुष्टि
नेपाल की वेबसाइट खबरहब डॉट काम की एक रिपोर्ट के अनुसार, हिम्ला के सहायक मुख्य जिला अधिकारी दलबहादुर हमाल ने स्थानीय मीडिया रिपोर्ट के आधार पर 30 अगस्त से 9 सितंबर तक हिम्ला के लापचा-लिमी क्षेत्र का निरीक्षण किया था.

इस दौरान उन्हें नेपाली जमीन पर चीन के बनाई 9 बिल्डिंग्स दिखाई दीं. हालांकि नेपाली मीडिया की रिपोर्ट में पहले एक बिल्डिंग का ही जिक्र था, लेकिन निरीक्षण के बाद वहां ऐसी ही 8 और बिल्डिंग्स पाई गई हैं. 

चीन की विस्तारवादी नीति से दुनिया परेशान
चीन की यह पुरानी आदत रही है कि वह अपना क्षेत्रीय विस्तार करने की जुगत में हमेशा लगा रहा है. पड़ोसी देशों की जमीन हथियाना उसका पुराना शगल रहा है. भारत में लद्दाख सीमा पर इसी कोशिश में तनाव जारी है, लेकिन यहां उसे हमेशा मुंह की खानी पड़ी है, लेकिन नेपाली पीएम ओली दोस्ती का राग अलापते रहे और इसका सिला मिला कि ड्रैगन नेपाल की ही जमीन निगलने लगा. 

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चीन बोला, निर्माण वाली जगह उनकी
अब चीन यह भी दावा करने लगा है कि उसने यह सभी इमारतें जहां बनाई हैं वह क्षेत्र चीन की ही जमीन में आता है. हिम्ला जिले का  लापचा-लिपू क्षेत्र मुख्यालय से दूर होने के कारण हमेशा से अनदेखा रहा है. नेपाल ने इस क्षेत्र में किसी भी प्रकार के बुनियादी ढाचे का निर्माण नहीं किया है साथ ही अधिकारी भी इधर दौरे के लिए नहीं जाते हैं. चीन ने इसी बात का फायदा उठाया है. 

और मौन साध बैठ गए हैं केपी शर्मा ओली
पिछले दिनों भारत के साथ बेवजह ही सीमा विवाद करने वाले नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली चीन की इस हिमाकत पर अब तक कुछ भी नहीं बोल पाए हैं. ओली ने नेपाल सी लगती भारतीय सीमा पर निर्माण को अवैध बताया था.

इसके बाद उन्होंने असली अयोध्या की बात नेपाल में करते हुए भारत पर सांस्कृतिक अतिक्रमण का आरोप लगाया था. नेपाल सरकार ने अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है. 

सड़कों पर उतरे नागरिक
इमारतों के निर्माण की पुष्टि होने के बाद बुधवार को काठमांडू में लोग सड़कों पर उतर आए और चीन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए जुलूस निकाला. हाथों में तख्तियां लिए लोगों ने बालूवाटर स्थित चीनी दूतावास के बाहर नारेबाजी की.

आक्रोशित लोग 'सीमा अतिक्रमण रोको', अतिक्रमण की हुई नेपाली जमीन लौटाओ, नेपाल-चीन बॉर्डर का नाका खोलो, चीनी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद जैसे नारे लगा रहे हैं. युवाओं की तख्तियों और बैनरों पर भी इस तरह के नारे लिखे हैं. 

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