इजरायल पर हमास का हमला, गाजा पट्टी से दागे 2 रॉकेट! जानिए वजह

इजरायल पर हमास ने रॉकेट से हमला किया है, बहरीन-यूएई के साथ हो रहे शांति समझौते के विरोध में हमले की आशंका जताई जा रही है. गाजा पट्टी से किए गए रॉकेट हमले में दो इजराइली नागरिक घायल हो गए. इस रिपोर्ट में हमले की पूरी वजह को समझिए..

इजरायल पर हमास का हमला, गाजा पट्टी से दागे 2 रॉकेट! जानिए वजह

नई दिल्ली: गाजा पट्टी से हमास ने इजरायल के ठिकाने पर दो रॉकेट दागे हैं. हमला उस वक्त हुआ जब व्हाइट हाउस में इजरायल-बहरीन-यूएई शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए जा रहे थे. हमले में 2 इजरायली नागरिकों के घायल होने की खबर है.

मुस्लिम देशों को इजरायल कबूल है

बड़ी ख़बर ये है कि संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने इजरायल के साथ अपने रिश्ते सुधारने के लिए ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यानी खाड़ी देश, जो इजरायल को देश तक मानने से इनकार करते थे, वो अब इजरायल के साथ संबंध बढ़ा रहे हैं.

ख़ास बात ये भी कि इजरायल के इन दोनों देशों के साथ संबंध सुधारने में सबसे बड़ी भूमिका अमेरिका की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की मौजूदगी में इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए और ऐतिहासिक फैसला इसलिए भी क्योंकि इजरायल से इससे पहले मिस्र ने 1979 में और जॉर्डन ने 1994 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे. उसके बाद यूएई तीसरा देश बना जिसने इजरायल के संबंध सुधारने की कोशिश की है. और अब बहरीन वो चौथा देश है, जिसने इजरायल के साथ हाथ मिलाया है.

वैसे नक्शे में तो कोई बदलाव तो नहीं होगा, लेकिन इस समझौते से मिडिल ईस्ट पूरी तरह से बदल जाएगा. विचार, सोच, रिश्ते, समीकरण.. सब बदल जाएंगे. कह सकते हैं कि ये नए मिडिल ईस्ट की शुरूआत है.

ये 2020 में नए मिडिल-ईस्ट का प्रारंभ है

एक के बाद एक दो ऐतिहासिक समझौते हुए हैं. 1948 में बने इजरायल को खाड़ी के अरब देशों ने कभी स्वीकार नहीं किया. लेकिन बदले में चारों तरफ से विरोधी इस्लामी राष्ट्रों से घिरे इजरायल ने कभी भी अपनी सुरक्षा और सम्प्रभुता से कोई समझौता नहीं किया. इजरायल मिडिल ईस्ट के देशों से टकराता रहा, और दुश्मनी ऐसी पाली कि मिडिल ईस्ट के कई देश मिलकर भी उसके आत्म सम्मान को कम नहीं कर पाए.

लेकिन, 2020 ने इतिहास को बदल दिया. 72 साल बाद 13 अगस्त, 2020 को इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अबुधाबी के क्राउन प्रिंस शेख मोहम्मद बिन जायद और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद UAE और इजरायल के बीच समझौता हुआ.

इजरायल और यूएई के बीच सबकुछ बढ़िया

इस नए समझौते के बाद UAE और इजरायल के बीच राजनयिक संबंधों की नई शुरुआत भी हो गई. 2020 में पहली बार इजरायल और यूएई के बीच पहली आधिकारिक उड़ान भरी गई.

और अब यूएई के बाद अचानक मिडिल ईस्ट के सभी देशों को बहरीन ने चौंका दिया. अब यूएई के बाद मिडिल ईस्ट के ऐतिहासिक समझौते का चौथा सदस्य बहरीन बना है. जिसने ईज़राइल के साथ रिश्ते सुधारने के लिए एक कदम आगे बढ़ाया है.

व्हाइट हाउस में हुए एक समारोह में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की अध्यक्षता में इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू, यूएई के विदेश मंत्री अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान, और बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लातिफ बिन राशिद अल ज़ायानी ने ‘इब्राहिम संधि’ पर हस्ताक्षर किए. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इसे नये मिडिल ईस्ट की शुरुआत बताया और कहा कि शांति की दिशा में एक नये युग की शुरुआत करेगा.

अमेरिका ने क्यों कही इतनी बड़ी बात?

आप ये समझिए, कि क्यों ट्रंप ने इसे नए मिडिल ईस्ट की शुरूआत कहा है. दरअसल, यूएई और बहरीन ने दुश्मन देश इजरायल और अमेरिका के साथ सुरक्षा की डील पर दस्तखत करके मिडिल ईस्ट के सारे समीकरण बदल डाले हैं. इस समझौते से मिडिल ईस्ट के मुस्लिम देशों के मजबूत मजहबी करार में अब सेन्ध लग गई है और कट्टरपन्थी मुस्लिम देशों को एक करने का तुर्की का सपना टूटने वाला है. ऑर्गेनाइज़ेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन की कट्टर वैश्विक इस्लामिक सोच को भी ये समझौता दूसरा बड़ा झटका है.

इसलिए अमेरिका, इजरायल, बहरीन और यूएई की बीच हुई ये इब्राहिम संधि ऐतिहासिक समझौते के तौर पर देखी जा रही है. और इसलिए ये नए मिडिल ईस्ट का उदय है. ये समझौता पूरे एशिया को शांत कर देगा, इस्लामिक कट्टरवाद से मुक्त कर देगा और दुनिया को विस्तारवाद और आतंकवाद के खिलाफ लड़ने वाली नई ताकतों से परिचित कराएगा.

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