15 साल की एक लड़की की डायरी ने पूरी दुनिया में मचा दिया था तहलका, जानिए मौत से पहले क्या लिखा

डायरी में लिखी ये बातें हमेशा के लिए अमर जरूर हो गईं, लेकिन अपनी बातों का असर देखने के लिए एनी जिंदा नहीं थीं.

Written by - Akash Singh | Last Updated : Jun 12, 2021, 09:26 AM IST
  • एनी को अपने 13वें जन्मदिन पर गिफ्ट में पर एक डायरी मिली थी
  • नाजियों के अत्याचार से एनी के परिवार को घर छोड़कर भागना पड़ा

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15 साल की एक लड़की की डायरी ने पूरी दुनिया में मचा दिया था तहलका, जानिए मौत से पहले क्या लिखा

नई दिल्लीः Happy Birthday Anee Frank: 'मैं परेशानियों के बारे में कभी नहीं सोचती , बल्कि उन अच्‍छे पलों को याद करती हूं जो अब भी बाकी हैं.' ये पंक्तियां एक 15 साल की लड़की की डायरी में लिखी मिली थीं. एक 15 साल की लड़की जिसने दुनिया को जीने का नया तरीका सिखाया. उसने दर्द में भी मुस्कराने की सीख पूरी दुनिया को दी.

दरअसल, हम बात कर रहे हैं एनी फ्रैंक के बारे में, जो आज ही के दिन यानी की 12 जून 1929 को जर्मनी के एक यहूदी परिवार में पैदा हुई थीं. आज बात करेंगे एनी फ्रैंक की उस डायरी के बारे में जिसने पूरी दुनिया में तहलका मचा दिया था..

जन्मदिन पर मिली थी डायरी

एनी को अपने 13वें जन्मदिन पर गिफ्ट में पर एक डायरी मिली थी. डायरी लिखना एनी का सबसे पसंदीदा काम था. एनी ने 12 जून, 1942 को डायरी में पहली एंट्री में लिखा- ‘मुझे उम्मीद है कि मैं अपनी हर बात तुम्हें बता सकूंगी, क्योंकि मैंने अपनी बातें कभी किसी से नहीं कहीं, और मैं आशा करती हूं कि हूं कि तुम मेरे लिए सुकून का एक बड़ा जरिया बनोगी.’

डायरी में लिखी ये बातें हमेशा के लिए अमर जरूर हो गईं, लेकिन अपनी बातों का असर देखने के लिए एनी जिंदा नहीं थीं, बल्कि महज 15 साल की उम्र में ही उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था.

आने वाली पीढ़ियों को बहुत कुछ सिखा गईं एनीः

मेराज फैजाबादी की एक लाइन बड़ी मशहूर है-
'गुफ़्तुगू तू ने सिखाई है कि मैं गूंगा था
अब मैं बोलूंगा तो बातों में असर भी देना
मैं तो इस ख़ाना-बदोशी में भी ख़ुश हूं लेकिन
अगली नस्लें तो न भटकें उन्हें घर भी देना'

ये लाइनें एनी की जिंदगी पर सटीक बैठती हैं, उनकी जिंदगी भी भटकते हुए, यातना सहते हुए गुजरी लेकिन आने वाली नस्लों को उन्होंने अपनी डायरी से नई जिंदगी दी. दरअसल, ये डायरी एनी ने 1942-45 के बीच लिखी, जब द्वितीय विश्वयुद्द का आतंक था और हिटलर का अत्याचार यहूदियों पर बढ़ता ही जा रहा था, जिसकी जद में आया था एनी का परिवार भी.

घर छोड़ा और फिर यातना गृह

नाजियों के अत्याचार की वजह से एनी के परिवार को घर छोड़कर भागना पड़ा. इस दौरान वह भटकते रहे. लेकिन एनी जो उम्र के हिसाब से दुनिया को समझने के लिए अभी बहुत छोटी थी वह डायरी में कैद कर रही थी न सिर्फ आज की हकीकत बल्कि भविष्य के लिए एक संदेश भी. आखिरकार नाजियों की नजर इस परिवार पर भी पड़ी और उन्होंने यातना गृह में डाल दिया जहां फरवरी 1945 में एनी की मौत हो गई.

डायरी छपी तो हिल गई दुनिया

साल था 1952 का जब द्वितीय विश्व युद्ध की डरावनी यादें अब धीरे-धीरे इतिहास की बातें हो रही थीं. इसी बीच एक डायरी प्रकाशित हुई- ‘एनी फैंक : द डायरी ऑफ ए यंग गर्ल’. महज 15 साल की लड़की की इस डायरी ने जो उसकी मौत के बाद छपी थी, पूरी दुनिया में उसने हलचल पैदा कर दी.

एनी की इस डायरी की लोकप्रियता का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि अभी तक तकरीबन 70 भाषाओं में इसका अनुवाद हो चुका है और दुनिया भर में इसकी सवा करोड़ से अधिक प्रतियां बिक चुकी हैं.

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डायरी की कुछ अहम बातें

अपनी इस डायरी में एनी ने बहुत से मुद्दों पर बहुत कुछ लिखा है. उन्होंने लिखा- जब तक यह सब मौजूद है, ये सूरज की रोशनी और ये बादल रहित आसमान और जब तक मैं इनका आनंद ले सकती हूं, मैं कैसे दुखी हो सकती हूं?

भगवान चाहते हैं कि आप प्रकृति की सुंदरता और सादगी के बीच खुश रहें,‘लोग आपको मुंह बंद रखने के लिए बोल सकते हैं, लेकिन यह आपको अपनी राय रखने से नहीं रोक सकता.’ एनी ने लिखा- मैं अपनी मां की तरह नहीं बनना चाहती जो अपने काम के बारे में जानती है. मुझे पति और बच्चों के अलावा भी बहुत कुछ चाहिए.

मैं लोगों के लिए उपयोगी बनना चाहती हूं. इतनी उपयोगी की मैं उनके भी काम आ सकूं जिनसे कभी नहीं मिली. मैं मौत के बाद भी जिंदा रहना चाहती हूं. एनी भले ही आज अपनी उपलब्धियों को देखने के लिए जिंदा नहीं हैं, लेकिन ये सच है कि मौत ने सिर्फ उनकी देह को उनसे छीना है, उनके विचारों ने उन्हें करोड़ों लोगों के दिलों में हमेशा के लिए अमर बना दिया है.

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