कैसै हुई जापान की जीत कोरोना पर?

सवाल बड़ा मार्के का है कि आखिर जापान में क्यों नहीं फैला कोरोना वायरस? सारी दुनिया से आ रही हैं कोरोना की बुरी खबरें लेकिन जापान में इतनी खामोशी क्यों है. इसका जवाब छोटा है लेकिन बहुत बड़ा है - उगते सूरज का देश जापान जीत गया कोरोना से..

कैसै हुई जापान की जीत कोरोना पर?

नई दिल्ली: ये खबर सुर्खियों में नहीं आई कि चीन के बाद पहला कोरोना मरीज जापान में मिला था जो वुहान से चलकर 10 जनवरी को जापान पहुंचा था. इसके बाद जापान कोरोना को लेकर तीन गंभीर सप्ताहों से गुजरा और यही तीन सप्ताह गेम चेंजर बन गए. अगर इन तीन हफ्तों में जापान ने कोरोना को लेकर सक्रियता नहीं दिखाई होती तो आज तकनीक के महारथी इस देश में भी कोरोना विस्फोटक रूप ले लेता. यहां अब तक केवल 1000 संक्रमित मरीज पाए गए हैं, जिनका इलाज चल रहा है.

आइसोलेशन नहीं किये न क्वारेंटीन किया

जापान ने बड़े कदम नहीं उठाये बल्कि बड़ी गंभीरता दिखाई. चीन की तरह न तो जापान ने आइसोलेशन के इंतजाम नहीं किए और यूरोप और अमेरिका की तरह उसने अपने नागरिकों को एकांतवास में भी रहने को विवश नहीं किया.

उसने देश में लॉक डाउन भी नहीं किया. हाँ, बच्चों की सुरक्षा की विशेष व्यवस्था को दृष्टि में रख कर उसने स्कूल जरूर बंद किए लेकिन जापान में जन-जीवन सामान्य रहा.देश के ऑफिस व्यस्त रहे और ट्रेनों में भीड़ होती रही उनका साथ देने के लिए रेस्तरां भी खुले रहे.

क्लस्टर्स की पहचान से संक्रमण पर नियंत्रण

जापान सरकार ने कोरोना संक्रमण को काबू करने के लिए सबसे पहले बहुत तेजी से उन क्लस्टर्स की पहचान की, जहां कोरोना प्रभावित लोग थे और वो जिन लोगों के संपर्क में आए थे, प्रशासन ने उन पर भी नजर रखी और उनकी टेस्टिंग की. 

इस देश में कोरोना परीक्षण केवल उन लोगों का किया जा रहा है जिनमें संक्रमण के लक्षण दीख रहे हैं. जब जापान के योकोहामा बंदरगाह पर डायमंड प्रिंसेस नाम का जहाज आकर खड़ा हुआ जो कि चीन से आया था तब उस जहाज में हर पांच में एक यात्री कोरोना से इंफेक्टेड था. पहले कुछ दिन उस जहाज को सरकार ने वहीं खड़ा रख कर उसकी निगरानी की बाद में सभी यात्रियों को क्वारेंटीन किया गया.

जापान में हुईं सिर्फ पचास मौतें

अब जापान की स्थिति पूरी तरह से कोरोना पर नियंत्रण वाली है. अभी वहां सिर्फ एक हज़ार लोग कोरोना से संक्रमित थे जिनमें से 50 की मृत्यु हुई है. लेकिन इन कोरोना मरीजों पर शुरूआती तीन गंभीर कोरोना-हफ्तों में बखूबी काबू कर लिया गया. 

अगर ऐसा नहीं किया गया होता तो जापान की हालत भी इटली, स्पेन, अमेरिका और यूरोप के दूसरे देशों की तरह हो गई होती. इसकी आशंका भी सबसे ज्यादा थी, क्योंकि कोरोना चीन के बाद सबसे पहले जापान ही पहुंचा था.

हैण्ड सेनेटाइजर अनिवार्य किये गए

जापान सरकार ने अपने देश में जनवरी के दूसरे सप्ताह में ही आफिसों में हैंड सेनेटाइजर अनिवार्य कर दिए थे. हर आफिस में सेनेटाइजर्स रखे गए. मास्क लोगों ने खरीदने शुरू किये और आम जनता ने पब्लिक हेल्थ सिस्टम को प्रोटेक्ट करने के लिए सरकार द्वारा निर्धारित किये गए जरूरी कदमों को स्वीकार करना भी शुरू कर दिया था. इससे संक्रमण अपनी परवाज से मोहताज रह गया. एक कारण ये भी था कि जापान इस मामले में किस्मत वाला था क्योंकि बहुत ज्यादा संक्रमित लोग जापान नहीं पहुंचे थे.

संक्रमण पहले स्टेज से आगे नहीं जाने दिया

जापान सरकार ने पूरी तत्परता दिखा कर हरसम्भव कदम उठाये और कोरोना संक्रमण को पहले स्टेज से आगे ही नहीं जाने दिया. 9 मार्च को जारी की गई जापान सरकार की रिपोर्ट में बताया गया कि जापान में 80 फीसदी केस ऐसे थे, जिसमें इंफेक्शन को एक व्यक्ति से दूसरे में जाने ही नहीं दिया गया. लिहाजा संक्रमण की चैन बन ही नहीं पाई. साथ ही ज्यादातर  इंफेक्शन क्लस्टर्स की पहचान शुरुआती स्टेज में ही कर ली गई थी.

इसे भी पढ़ें: अगर कोरोना साजिश तो सवालों के घेरे में डब्ल्यूएचओ

इसे भी पढ़ें: सबसे बड़ी राहत की उम्मीद: जल्दी खत्म होगी महामारी