अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ शुरू हुई महाभियोग जांच की सुनवाई

मेरिका के इतिहास में यह चौथी बार है जब महाभियोग को लेकर सुनवाई हो रही है. इसके पहले केवल दो राष्ट्रपतियों, 1886 में एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग लाया गया था. राष्ट्रपति ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन और उनके बेट के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया था.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Nov 13, 2019, 11:02 PM IST
    • इसके पहले केवल दो राष्ट्रपतियों, 1886 में एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग लाया गया था
    • इसके पहले केवल दो राष्ट्रपतियों, 1886 में एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग लाया गया था

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अमेरिकी राष्ट्रपति के खिलाफ शुरू हुई महाभियोग जांच की सुनवाई

नई दिल्लीः लगातार कई दिनों के चल रहे आरोप-प्रत्यारोप के दौर के बाद बुधवार को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई. ट्रंप के खिलाफ बुधवार से इसकी शुरुआत वॉशिंगटन में महाभियोग की जांच से जुड़ी पहली सार्वजनिक सुनवाई शुरू हुई. राष्ट्रपति ट्रंप पर आरोप है कि उन्होंने अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी जो बाइडेन और उनके बेट के खिलाफ जांच शुरू करने के लिए यूक्रेन पर दबाव बनाया.

अमेरिकी राष्ट्रपति इस आरोप से इनकार करते हैं. शीर्ष राजनयिक बिल टेलर और जॉर्ज केंट हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के सांसदों के सामने पेश हुए सबसे पहले गवाहों में शामिल हैं. जॉर्ज केंट अमरीका की यूक्रेन नीति के प्रभारी हैं.

अमेरिकी राजनयिकों को बदनाम करने का लगा आरोप
बिल टेलर और जॉर्ज केंट ने डोनॉल्ड ट्रंप के वकील रूडी जूलियानी पर यूक्रेन में मौजूद अमरीकी राजनयिकों को बदनाम करने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा कि जूलियानी के हमलों ने अमेरिका और यूक्रेन के राष्ट्रीय हितों की अवहेलना की और दोनों देशों के रिश्तों को नुकसान पहुंचाया. इससे पहले हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव्स के चेयरमैन एडम शिफ ने कहा कि क्या राष्ट्रपति ने यूक्रेन की कमजोरी का फायदा उठाकर उसे अमेरिकी चुनावों में दखल देने का न्योता दिया.

अमेरिकी इतिहास में चौथे महाभियोग की सुनवाई शुरू
इस महाभियोग के नतीजे के तौर पर ट्रंप को अमरीकी राष्ट्रपति के पद से हटाया जा सकता है. हालांकि यह तभी होगा जब हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स उन पर महाभियोग लगाए और सीनेट उसे मंजूरी दे. अमेरिका के इतिहास में यह चौथी बार है जब महाभियोग को लेकर सुनवाई हो रही है. इसके पहले केवल दो राष्ट्रपतियों, 1886 में एंड्रयू जॉनसन और 1998 में बिल क्लिंटन के खिलाफ महाभियोग लाया गया था, लेकिन उन्हें पद से हटाया नहीं जा सका.

1974 में राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन पर अपने एक विरोधी की जासूसी करने का आरोप लगा था, जिसे वॉटरगेट स्कैंडल का नाम दिया गया था. लेकिन महाभियोग चलाने से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था क्योंकि उन्हें पता था कि मामला सीनेट तक पहुंचेगा और उन्हें इस्तीफा देना पड़ सकता है.

यह है महाभियोग 
महाभियोग एक तरह की जांच है जिसके जरिए अमेरिकी राष्ट्रपति को उनके ऑफिस से हटाया जा सकता है. यह दो चरणों में होने वाली प्रक्रिया है जिसे कांग्रेस के दो सदन अंजाम देते है. इसमें महाभियोग पहला चरण है और राजनीतिक प्रक्रिया दूसरा चरण है. पहले चरण में निचला सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेन्टेटिव्स के नेता राष्ट्रपति पर लगे आरोपों को देखते हैं और तय करते हैं कि राष्ट्रपति पर औपचरिक तौर पर आरोप लगाएंगे या नहीं. इसे कहा जाता है,

महाभियोग के आरोपों की जांच आगे बढ़ाना. इसके बाद ऊपरी सदन, सीनेट इस मामले को आगे बढ़ाता है साथ ही जांच करता है कि राष्ट्रपति आरोप में दोषी हैं या नहीं. दोषी पाए जाने पर राष्ट्रपति को पद छोड़ना होता है  उनकी जगह उप राष्ट्रपति कार्यभार संभालते हैं. अनुमान है कि निचले सदन (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में महाभियोग पास हो सकता है. सीनेट में इसे पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत चाहिए. यहां रिपब्लिकन का भारी बहुमत है और ट्रंप  रिपब्लिकन राष्ट्रपति हैं.

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