स्टूडेंट सॉलिडेरिटी मार्च से तिलमिलाए इमरान खान, प्रदर्शनकारियों पर राजद्रोह का केस

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान की घरेलू हालत बद से बदतर होती जा रही है. अपने ही मुल्क के हुक्मरान, सेना और वजीर-ए-आजम के खिलाफ सैकड़ों की तादाद में सड़कों पर उतर गए हैं. स्टूडेंट सॉलिडेरिटी मार्च के जरिए विरोध करने वालों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.

स्टूडेंट सॉलिडेरिटी मार्च से तिलमिलाए इमरान खान, प्रदर्शनकारियों पर राजद्रोह का केस

नई दिल्ली: जिस पाकिस्तान को इमरान रियासते मदीना बनाना चाह रहे हैं. वहां मार्क्सवादी क्रांतिकारी चेग्वेरा के झंडे लहरा रहे हैं. पाकिस्तान के चालीस से ज्यादा शहरों में यूनिवर्सिटी के छात्र सड़कों पर उतर गए और उन तमाम बंदिशों से आजादी की मांग की. जिसके जाल में उलझकर पाकिस्तान आज की दुनिया में घुटनों के बल दिख रहा है. स्टूडेंट सॉलिडेरिटी मार्च के आयोजक और 250 से 300 प्रतिभागियों के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया गया है.

पाकिस्तानी फौज की कठपुतली सरकार

अपनी इस एकजुटता को पाकिस्तानी छात्रों ने स्टूडेंट सॉलिडेरिटी मार्च नाम दिया है. इसकी गूंज पहली बार लाहौर यूनिवर्सिटी में फैज फेस्टिवल के दौरान दिखी. इस बुलंद आवाज ने पाकिस्तान की फौज और उसकी कठपुतली सरकार के सामने डटकर खड़ी है.

कैसे शुरू हुई ऐलान-ए-जंग?

पंजाब यूनिवर्सिटी की छात्रा ने पाकिस्तान में छात्रों को राजनीति में उतरने की आजादी देने की मांग की. महिलाओं के खिलाफ होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई. कट्टरपंथियों को आईना दिखाया. सस्ती और अच्छी पढ़ाई का हक मांगा, तो पाकिस्तान की नई पीढ़ी लामबंद होती चली गई.

फैज फेस्टिवल में उठी पाकिस्तानी छात्रों की आवाज को पाकिस्तानी हुकूमत ने तब अनदेखा किया. तो 29 नवंबर को इन्होंने पाकिस्तान के चालीस शहरों में स्टूडेंट सॉलिडेरिटी मार्च निकालने का ऐलान किया. इसके बाद 29 दिसंबर को पाकिस्तान की सड़कों पर लाल सलाम जमकर गूंजा. लाल झंडे लहराते दिखे और इतना ही नहीं इसके अलावा 'हम लेके रहेंगे आजादी' का नारा भी गूंजने लगा. इस नारे में युवाओं के बीच वो उम्रदराज भी झूमते-नाचते दिखाई दिए. जिन्होंने जनरल जियाउल हक की तानाशाही में छात्रों की आवाज इसी तरह बुलंद की थी, अपना हक मांगा था.

आपको बता दें कि छात्रों की एकजुट आवाज ने तब जनरल जियाउल हक की नींद भी उड़ा दी थी. इसी के बाद पाकिस्तान में छात्रों की राजनीति पर उन्होंने बैन लगा दिया था. किसी भी सियासी कार्यक्रम में उनके शामिल होने पर पाबंदी लगा दी. और पाकिस्तान की यूनिवर्सिटी में कट्टरपंथियों की चुपके से एंट्री करवा दी. ताकि वो हक की आवाज उठाने वाले छात्रों और उनके संगठनों का मुंह बंद करा सकें.

तब अफगान जिहाद के नाम पर इस्लामी जमियते तलबा को जनरल जियाउल हक ने हथियार मुहैया कराया. जिसे जरिया बनाकर हक की मांग उठा रहे पाकिस्तानी छात्रों को डराया धमकाया गया. लेकिन अस्सी के दशक में दबाई गई वो चिनगारी फिर आग बनकर पाकिस्तान में फूट रही है.

छात्रों के इस प्रदर्शन को कट्टरपंथी पाकिस्तानी हुकूमत से बगावत करार दे रहे हैं. 29 नवंबर को पाकिस्तान के चालीस शहरों में यूनिवर्सिटी छात्रों ने जिस तरह अपनी एकजुटता दिखाई. उससे पाकिस्तानी हुकूमत भी चौंकती दिख रही है. यही वजह है कि मौलाना फजलुर्रहमान का आजादी मार्च के तुरंत बाद हो रहे छात्रों के इस प्रदर्शन को दबाने में जुट गई है.

छात्र को कर लिया गया अगवा

स्टूडेंट सॉलिडेरिटी मार्च में भाषण देने वाले छात्र नेता आलमगीर वजीर को गायब कर दिया गया है. छात्रों का आरोप है कि पाकिस्तानी फौज के इशारे पर उसे अगवा किया गया है. आलमगीर की रिहाई के लिये छात्र मांग उठा रहे हैं.

जाहिर है, पाकिस्तान के हुक्मरान इमरान खान एक नई मुसीबत में फंस रहे हैं. जिन छात्रों ने नए पाकिस्तान के उनके नारे पर सीटियां बजाई थी. वही अब लाल झंडा थामे उनके आगे खड़े हो रहे हैं और आवाज लगा रहे हैं. अब देखना है जोर कितना बाजु-ए-कातिल में है.