आखिर क्यों फिर से ब्लैकलिस्ट होने की कगार पर है पाकिस्तान! जानें वजह...

पेरिस में FATF के मुख्यालय में पाकिस्तान के गुनाहों के पन्ने पलटे जा रहे हैं जो उसकी आतंकपरस्ती की करतूतों से भरे पड़े हैं. 18 अक्टूबर की वो तारीख आएगी जब इस मुल्क पर ब्लैकलिस्टेड की मुहर लग सकती है. साल 2008 में FATF ने पहली बार पाक को ब्लैकलिस्ट किया था.

आखिर क्यों फिर से ब्लैकलिस्ट होने की कगार पर है पाकिस्तान! जानें वजह...

नई दिल्ली: टेरर फंडिंग और आतंकियों की मनी लॉन्ड्रिंग पर रोक नहीं लगा पाने के चलते पहले से ही FATF की ग्रे लिस्ट में शामिल पाकिस्तान अब ब्लैकलिस्ट की गिरफ्त में आने वाला है. इसका ऐलान 18 अक्टूबर को हो सकता है. 

पिछले साल ग्रे लिस्ट में शामिल किए जाने के बाद पाकिस्तान को चेतावनी दी गई थी और उसे 40 टास्क पर काम करने को कहा गया था. FATF के इन 40 टास्क में केवल 4 को ही पाकिस्तान पूरा कर पाया है, इसका मतलब है कि आतंक के खिलाफ अधिकतर मोर्चे पर वो नाकाम रहा है. FATF के एशिया पैसिफिक ग्रुप ने अपने 288 पन्नों की रिपोर्ट में पहले ही कह दिया है कि पाकिस्तान ने टेरर फंडिंग पर रोक नहीं लगाई है. अब जब कि FATF की एक यूनिट ने कह दिया है कि पाकिस्तान आतंक-पथ से हटा नहीं है तो ऐसे में इस बात की पूरी गारंटी मानी जा रही है कि FATF पाकिस्तान पर मुहर लगा देगा कि तुम ब्लैकलिस्टेड हो.

साल 2008 में पाकिस्तान को आतंकी फंडिंग पर लगाम न लगा पाने की वजह से FATF ने पहली बार ब्लैकलिस्ट किया था. ब्लैकलिस्ट का ये दौर लंबा चला. 2015 में पाकिस्तान किसी तरह से ब्लैकलिस्ट से बाहर आया लेकिन उसकी आतंकी करतूतें खत्म नहीं हुईं तो तीन साल बाद ही उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया गया. FATF ने पाकिस्तान को पिछले साल यानी 2018 में ग्रे लिस्ट में शामिल कर उसे सुधरने की चेतावनी दी थी लेकिन वो अपनी नापाक हरकतों से जिस तरह से बाज नहीं आ रहा है उससे ये माना जा रहा है कि इस बार उसका फिर से ब्लैकलिस्ट होना तय है

जब पिछले साल पाकिस्तान को ग्रे लिस्ट में डाला गया था तब वहां के मीडिया ने हुकूमत की खूब लानत-मलानत की थी. पाकिस्तानी मीडिया ने तब सरकार को खूब खरी-खोटी सुनाई गई थी और यहां तक कहा था कि पाकिस्तान नाकाम मुल्क बन चुका है.

पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट होने का डर तो सता रहा है लेकिन आतंक-परस्ती का अपना एजेंडा छोड़ने को वो तैयार नहीं. यही वजह है कि आतंकवादियों पर लगाम लगाने की जगह, टेरर फंडिंग पर ब्रेक लगाने की जगह, आतंकवाद को एक्सपोर्ट करने की जगह पाकिस्तान घूम-घूमकर अलग-अलग मुल्कों का समर्थन जुटाने की नाकाम कोशिश कर रहा है. ताकि, उसे FATF की तरफ से ब्लैकलिस्ट होने से बचाया जा सके.

संयुक्त राष्ट्र में अलापा कश्मीर का राग

संयुक्त राष्ट्र की जनरल एसेंबली में कश्मीर-कश्मीर की रट लगाने वाले इमरान खान को दुनिया के मुल्कों ने जब कोई भाव नहीं दिया तो वो वतन लौटते ही अपने भरोसेमंद दोस्त चीन के दरवाजे पर दस्तक देने पहुंच गए. सिर्फ सवा साल के कार्यकाल में तीसरी बार चीन गए इमरान खान ने राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मदद की गुहार लगाई और FAFT की ग्रे लिस्ट से बचाने की अपील की. 2015 में चीन और टर्की ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट से निकालने में मदद की थी. इस बार FATF की बैठक से पहले इसी महीने इमरान खान ने चीन में शी जिनपिंग से हाथ जोड़कर ब्लैकलिस्ट में जाने से बचाने की गुहार लगाई है.

पाकिस्तान, चीन से इसलिए भी उम्मीद लगा कर बैठा है क्योंकि इस बार FATF की अध्यक्षता चीन के पास है. चीन भले ही दोस्ती निभाने की कोशिश करे लेकिन दुनिया के सामने जिस तरह से पाकिस्तान की पोल खुल चुकी है, वैसे में पाक के साथ खड़ा होकर चीन अपनी ही जगहंसाई ही कराएगा.

FATF का इतिहास

जिस फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का डंडा पाकिस्तान पर चलता रहा है वो एक स्वतंत्र संस्था है जो आतंकी फंडिंग और मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों पर नजर रखती है. 1989 में FATF का गठन हुआ था और इसका मुख्यालय फ्रांस की राजधानी पेरिस में है. FATF में 36 सदस्य देश हैं और इसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है. अगर FATF ने पाकिस्तान को ब्लैकलिस्ट किया तो पहले से ही कंगाली के दौर से गुजर रहा ये आतंक-परस्त मुल्क दाने-दाने के लिए तरस जाएगा. 

अगर ब्लैकलिस्ट हुआ पाक तो...

दरअसल, FATF की तरफ से ब्लैकलिस्ट होने का मतलब है कि उसे इंटनेशनल मोनेट्री फंड यानी IMF से कर्ज नहीं मिल पाएगा. वर्ल्ड बैंक से भी उसे लोन मिलना नामुमकिन हो जाएगा. एशियन डेवलपमेंट बैंक से भी आर्थिक सहायता बंद हो जाएगी. विदेशी मुल्कों से भी कर्ज मिल पाना दूर की कौड़ी साबित होगी. कोई भी देश पाकिस्तान में निवेश नहीं कर पाएगा। 

अब इतनी सारी पाबंदियां लग जाएंगी तो विदेशी भीख पर पल रहा पाकिस्तान तो पूरी तरह से बर्बाद हो ही जाएगा. दुनिया की कोई बड़ी कंपनी पाकिस्तान में पूंजी नहीं लगा पाएगी. जो विदेशी कंपनियां हैं वो पाकिस्तान से अपना कारोबार समेट लेंगी फिर, तो पूरी अर्थव्यवस्था ही चौपट हो जाएगी. पाकिस्तान की करेंसी के भाव भी लुढ़क जाएंगे.

पेरिस में 18 अक्टूबर तक चलने वाली इस समीक्षा के बाद ब्लैकलिस्ट किए जाने का जो नतीजा आ सकता है उसके बाद तो तय है कि ये पाकिस्तान एक ऐसे ब्लैक होल में समा जाएगा जहां से उसका निकल पाना मुश्किल है.