इस तरह चीन पर दबाव बढ़ा रहा है अमेरिका! जानें, ट्रम्प का 'पूरा प्लान'

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को उसकी करतूत की सजा देने का पूरा प्लान बना लिया है. इस प्लान से वाकई चीन की कमर टूट जाएगी...

इस तरह चीन पर दबाव बढ़ा रहा है अमेरिका! जानें, ट्रम्प का 'पूरा प्लान'

नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने चीन को मात देने के लिए जो प्लान बनाया है वो चीन की कमर तोड़कर रख देगा. ट्रम्प को पता है कि चीन से सीधी जंग करना अमेरिका के लिए नुकसान दायक साबित हो सकता है, इसलिए चीन को अब चीन की ही चाल से हराने की कोशिश में ट्रम्प जुट गए हैं.

ट्रम्प ने चीन के लिए बनाया 'कमर तोड़' प्लान

उन्होंने चीन को घेरने का जो प्लान बनाया है, उससे चीन ना सिर्फ अपने घर में ही मरेगा बल्कि उसे दुनिया के बाज़ार से भी खत्म कर देने की पूरी योजना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने ट्वीट कर के कहा कि चीन ने दुनिया भर में नरसंहार को अंजाम दिया है.

 चीन भी अमेरिका का विरोध करने लगा है लेकिन वो खुलकर मुकाबला नहीं कर पा रहा है, चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने जब इस पर बयान दिया तो उनकी बातों में ट्रम्प या अमेरिका का नाम एक बार भी नहीं आया, हालांकि वो ट्रम्प के नरसंहार वाले बयान पर ही जवाब दे रहे थे.

चीन के विदेश विभाग के प्रवक्ता ज़ाओ लिजियन ने अपने बयान में कहा कि "कोरोना महामारी से लड़ने के लिए चीन ने हमेशा पारदर्शिता और जिम्मेदारी भरा रवैया अपनाया है. हम सच बोलने में यकीन रखते हैं और जो हम पेश करते हैं वो सच है, हम जिम्मेदारी से बोलते हैं. किसे अपने लोगों की जान बचाने की चिंता है, कौन महामारी से लड़ने में अंतर्राष्ट्रीय एकता दिखा रहा है, हम समझते हैं कि लोगों के पास कुदरती तौर पर न्याय करने का ज्ञान है और दुनिया उन्हें साफ देख रही है."

चीन को उसी की चाल से हराएगा अमेरिका

हालांकि, ट्रम्प का चीन पर हमला लगातार जारी है, उन्होंने एक बार फिर चीन पर आरोप लगाया कि उन्होंने आंकड़ों के साथ छेड़छाड़ की है और दुनिया को चीन में इस महामारी से हुए संक्रमण और मौतों को लेकर जो आंकड़े दिए हैं वो सही नहीं हैं.

डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि "चीन, क्या आपको लगता है चीन सही आंकड़े दे रहा है, मैं नहीं समझता. उनके आंकड़े देखिए, उन्होंने कितने कम आंकड़े दिए और जितने मामले वो दर्ज कर रहे हैं, मैंने उससे कहीं ज़्यादा समस्याएं टीवी स्क्रीन पर देखीं. इसलिए मैं चीन के आंकड़ों को कहीं नहीं रखता क्योंकि ज़ाहिर है कि वो आंकड़े गलत हैं."

अब जानिए कि अमेरिका चीन पर किस तरह से प्रहार पर प्रहार करता जा रहा है, अब ये प्रहार ज़ुबानी नहीं है बल्कि कूटनीतिक और आर्थिक तौर पर भी चीन की कमर तोड़ने के लिए ट्रम्प का प्लान एक्टिव हो चुका है. डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन पर हमला करने के लिए उसके दुश्मन मुल्क की मदद करने का तरीका निकाला है.

चीन और ताइवान के बीच में तनाव चल रहा, ताइवान की राष्ट्रपति ने दोबारा पद भार ग्रहण करने के साथ चीन पर हमला बोल दिया, वहीं अमेरिका से उनके लिए बधाई संदेश तो आया ही, एक ऐसा सौदा भी साथ आया है जिससे दक्षिण चीन सागर में ड्रैगन पर नकेल कसने की तैयारी है.

  • अमेरिका ने किया ताइवान के साथ रक्षा सौदा
  • ताइवान को मिलेगा अमेरिकी टारपीडो MK-48 Mod6
  • 1350 करोड़ की एडवांस हैवी वेट टारपीडो की डील

चीन को उसी के घर में हराने की तैयारी

चीन और ताइवान का एक दूसरे से झगड़ा पुराना है, लेकिन अमेरिका की शह मिलने के बाद ताइवान ने चीन को आंख दिखाना शुरू कर दिया है और चीन बौखला गया है.

जाओ लिजियन ने कहा कि "हमने अमेरिका को चेतावनी दी है कि ताइवान की आज़ादी के रास्ते बंद हैं, अमेरिका ने अपने ही किए वायदे को तोड़ा है और ताइवान में आज़ादी के लिए लड़नेवाले अलगाववादियों को गलत संदेश भेजा है, इसने शांति और स्थिरता को चोट पहुंचाई है और साथ ही चीन और अमेरिका के रिश्तों को भी. अमेरिका की इस हरकत को देखते हुए चीन ज़रूरी कदम उठा रहा है. इसका अंजाम अमेरिका को भुगतना होगा."

सिर्फ दुश्मन ही नहीं, अमेरिका चीन को घेरने के लिए उसके मित्रों की भी चाबी टाइट कर रहा है, अमेरिकी चाबी से चलने वाले पाकिस्तान और चीन के रिश्तों पर ट्रम्प ने वार किया है.

ड्रैगन पर अमेरिका हुआ और सख्त

दरअसल, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में चीन आर्थिक गलियारे का निर्माण कर रहा है और करीब 65 बिलियन डॉलर के इस प्रोजेक्ट पर अमेरिका ने सवाल उठा दिया है. अमेरिका ने चीन से दिए गए पाकिस्तान को कर्ज पर ऐतराज जताते हुए इसे अनुचित और उत्पीड़क  कर्ज करार दिया है. दक्षिण-मध्य एशिया के लिए विदेश मंत्रालय की कार्यवाहक सहायक मंत्री एलिस वेल्स ने इस पर चीन को आड़े हाथों लिया.

चीन-पाक आर्थिक गलियारे पर सवाल

अमेरिकी सरकार में दक्षिण और मध्य एशिया के लिए कार्यकारी सहायक विदेश मंत्री एलिस वेल्स ने कहा है कि "चाहे चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) हो या कोई दूसरी सहायता हो, अमेरिका हमेशा ऐसे निवेश का समर्थन करता है जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार हो. मैंने CPEC को लेकर अमेरिकी सरकार की चिंताओं का जिक्र किया है, क्योंकि इसमें पारदर्शिता का अभाव है और चीनी संगठनों को अनुचित दर पर लाभ मिल रहा है, मुझे लगता है कि कोविड-19 जैसे संकट के समय, जब दुनिया अर्थव्यवस्था के बंद होने के नतीजों के जूझ रही है. चीन के लिए ये जरूरी है कि वो इस उत्पीड़क, बोझिल और अनुचित कर्ज का बोझ कम करे."

पाकिस्तान को दिए कर्ज पर उठाई उंगली

मौजूदा वक़्त में पाकिस्तान कंगाल है, उसके पास कोरोना वायरस की महामारी से लड़ने के लिए पैसे नहीं हैं और वो दुनिया के सामने झोली फैलाता रहा है लेकिन उसे कहीं से भी भीख नहीं मिली है और इस दौरान CPEC के नाम पर एक ऐसे मुल्क को कर्ज़ देना जो चुका पाने के हालात में नहीं है, ये अमेरिका को चिंता में डालता है क्योंकि इसका उल्टा फायदा चीन उठा सकता है. और चीन की इसी बपौती को अमेरिका चैलेंज कर रहा है. जाहिर है अमेरिका की क्लास से निकलकर इमरान का रूख चीन के प्रति बदलेगा.

हॉन्ग कॉन्ग से अमेरिकी हमला

हॉन्ग कॉन्ग में काफी समय से आज़ादी के लिए जंग चल रही है, जो पिछले साल के अंत तक आते आते बहुत उग्र हो चला था लेकिन कोरोना वायरस फैलने की वजह से शांत हो गया. अब वो आंदोलन एक बार फिर सिर उठाने लगा है और अमेरिका अब हॉन्ग कॉन्ग की मदद के लिए आगे आया है. दरअसल, चीन हॉन्ग कॉन्ग में जबरन आंदोलन को दबाने में लगा है और 2 देश एक सिस्टम के तहत एक चाल चल रहा है.

चीन पर ट्रम्प का एक और वार

  • चीन हॉन्ग कॉन्ग में लागू करेगा नेशनल सिक्योरिटी कानून
  • अमेरिका ने दिया चीन को कानून लागू करने का चैलेंज
  • अगर कानून लागू हुआ तो अंजाम भुगतेगा चीन- अमेरिका

दरअसल एक रिपोर्टर ने जब अमेरिकी राष्ट्रपति से ये सवाल पूछा कि "कोरोना वायरस के इस दौर में चीनी सरकार हॉन्ग कॉन्ग में नया सुरक्षा कानून लागू करने जा रही है, जिससे वो विरोधियों की आवाज़ दबाएगा. क्या चीन ने आपको बताया कि वो हॉन्ग कॉन्ग से रिश्ते बदल रहा है?"

तो इसके जवाब में डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि "मुझे देखना होगा कि क्या हुआ है, मैंने अभी तक देखा नहीं है. मुझे थोड़ा बहुत बताया गया लेकिन मैं इस सही समय पर बयान दूंगा, ह़ॉन्ग कॉन्ग मुश्किलों से गुज़रा है."

अमेरिका ने चीन को दिया तगड़ा झटका

यही नहीं चीन को आर्थिक मोर्चे पर मात देने के लिए ट्रम्प ने कुछ कदम उठाए. चीन से अमेरिकी कम्पनियों की वापसी का बिल कांग्रेस में पास हुआ और अमेरिका से चीनी कम्पनियों को बाहर भेजने का बिल संसद में पेश किया गया.

अमेरिकी शेयर बाज़ार में रजिस्टर्ड चीनी कम्पनियों पर ट्रम्प की टेढ़ी नज़र पड़ चुकी है, अमेरिकी सीनेट ने एक बिल पास किया है जिससे चीनी कम्पनियों को शेयर बाज़ार से डीलिस्ट कर दिया जाएगा, हालांकि इसे लागू होने में अभी कुछ कानूनी पेंच है, लेकिन माना जा रहा है कि सीनेट में इस बिल को लेकर विपक्ष सरकार के साथ है.

चीन के साथ ट्रेड डील का झोल

अमेरिका के इस कदम से चीनी कम्पनियों के लिए मुश्किल हो सकती है, हालांकि इस बिल में कहा गया है कि ये कदम अमेरिकी कम्पनियों में निवेश को बढ़ाने के लिए किया जा रहा है. 800 चीनी कम्पनियां अमेरिकी स्टॉक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड हैं, अमेरिका के फैसले से अलीबाबा और वायडू जैसी कम्पनियों को झटका लग सकता है. वहीं चीन से अमेरिकी कम्पनियों को वापसलाने के लिए कांग्रेस में बिल पास हो चुका है, यानी मैकडॉनल्ड और केएफसी जैसी कम्पनियां अपना बोरिया बिस्तर चीन से बांध सकती हैं.

ट्रेड डील पर होने लगी है तकरार

जब चीन पर ट्रेड डील को लेकर बार बार ट्रम्प ने सवाल उठाना शुरू किया तो चीन ने भी कूटनीतिक तौर पर अपने माउथ पीस ग्लोबल टाइम के ज़रिए संदेश दिया कि वो ट्रेड डील में बदलाव चाहता है, और इस डील को चीन के पक्ष में करना चाहता है. लेकिन जब ये बात ट्रम्प तक पहुंची तो ट्रम्प ने साफ मना कर दिया.

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दरअसल, अमेरिका की वजह से ही आज का चीन बना है. चीन की अर्थव्यवस्था के लिए अमेरिका ने ही नींव डाली थी और वहां की तानाशाही सरकार ने दुनिया भर में कब्जा किया और अब बिना अंतर्राष्ट्रीय नियमों को माने बाज़ार में बने रहना चाहती है, लेकिन अमेरिका अब चीन को अलग-थलग करने के प्लान पर एक्टिव हो चुका है और इसका असर जल्दी ही देखने को मिलेगा.

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