नेपाल में बढ़ा बाहर से आने वाला पैसा, पीएम ओली के लिए बन सकता है चिंता का सबब

विप्रेषित यानी दूसरे देश से भेजी जाने वाली धनराशि नेपाल की अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 25 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है.

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Jun 19, 2021, 11:06 PM IST
  • नेपाल में नवंबर में आम चुनाव होने हैं
  • नेपाल में है रोजगार की बहुत कमी है

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नेपाल में बढ़ा बाहर से आने वाला पैसा, पीएम ओली के लिए बन सकता है चिंता का सबब

नई दिल्लीः नेपाल में कोविड-19 महामारी के बावजूद रेमिटेंस (प्रवासियों द्वारा भेजी जाने वाली धनराशि) में वृद्धि हुई है.

नेपाल टाइम्स के अनुसार, जुलाई 2020 से मई 2021 के बीच रेमिटेंस यानी विप्रेषित धन की आमद पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में 19.2 प्रतिशत बढ़कर 810 अरब रुपये (नेपाली) हो गई है.

नेपाल टाइम्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा, महामारी के बावजूद और शायद इसकी वजह से ही, नेपाली अपने उन परिवारों को पैसे भेज रहे हैं, जिन्होंने लॉकडाउन और आर्थिक मंदी के दौरान अपनी आय खो दी थी.

नेपाल के लोगों के लिए मलेशिया के अलावा खाड़ी देश पसंदीदा प्रवास स्थल बने हुए हैं.

अर्थव्यवस्था का अंग है ऐसी धनराशि
विप्रेषित यानी दूसरे देश से भेजी जाने वाली धनराशि नेपाल की अर्थव्यवस्था का एक अभिन्न अंग है, जो देश के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 25 प्रतिशत से अधिक का योगदान देता है.

विदेश नीति पर नजर रखने वाले एक विशेषज्ञ ने इंडिया नैरेटिव को बताया, लेकिन इससे यह भी पता चलता है कि बड़ी संख्या में नेपाली - विशेष रूप से युवा - अच्छी नौकरियों और उच्च आय की तलाश में देश से बाहर चले जाते हैं, क्योंकि उनके लिए नेपाल में खास अवसर नहीं हैं.

नेपाल चुनावों पर पड़ सकता है असर
वैसे तो विप्रेषित धनराशि में वृद्धि नेपाली प्रधानमंत्री के. पी. शर्मा ओली के लिए एक वरदान के रूप में सामने आई है, क्योंकि इसने अर्थव्यवस्था को काफी हद तक सहारा दिया है, मगर इसके साथ ही यह चिंता का कारण भी साबित हो सकता है, क्योंकि देश में नवंबर में आम चुनाव होने हैं और नेपाल में रोजगार के अवसरों की कमी एक बड़ा मुद्दा बन सकता है.

यह मुद्दा खासतौर पर विनाशकारी दूसरी कोविड-19 लहर के बीच, जिसने नेपाल की अर्थव्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित किया है, उम्मीद से भी बड़ा हो सकता है. नेपाल में बढ़ती बेरोजगारी और कम रोजगार का मुद्दा प्रधानमंत्री ओली के लिए एक चुनौती बन सकता है.

उच्च आय के लिए विदेशों में रहते हैं लोग
एक भारतीय शोध संगठन के साथ काम करने वाले विश्लेषक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, महत्वपूर्ण रूप से यह भी एक संकेतक है कि देश में अपर्याप्त रोजगार सृजन है.

अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन ने पहले कहा था कि बड़ी संख्या में श्रम बल, विशेष रूप से युवाओं ने काम के लिए उच्च आय और एक सम्मानित नौकरी की तलाश में विदेशों में प्रवास का विकल्प चुना है.

विश्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पिछले कुछ वर्षों में नेपाल में प्रेषण प्रवाह ने निजी खपत, गरीबी में कमी, सरकारी राजस्व और विदेशी मुद्रा भंडार का समर्थन किया है.

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अधिकांश नेपाली खाड़ी देशों की करते हैं यात्रा
वहीं नेपाल सरकार ने एक दस्तावेज में बताया कि श्रम प्रवास नेपाल के सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य की परिभाषित विशेषताओं में से एक बन गया है. इसने यह भी कहा कि नेपाली कामगार रोजगार की तलाश में पूरी दुनिया में फैले हुए हैं. अधिकांश नेपाली मलेशिया के अलावा खाड़ी देशों की यात्रा करते हैं.

दो साल पहले, ओली ने 3.1 अरब रुपये के आवंटन के साथ एक महत्वाकांक्षी रोजगार सृजन योजना शुरू की थी, लेकिन यह जमीनी स्तर पर नहीं उतर पाई और विफल हो गई.

अधिक नेपाली छोड़ सकते हैं देश
ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ओआरएफ) ने छह महीने पहले प्रकाशित एक अध्ययन में कहा था कि कोरोनावायरस महामारी के कारण अनौपचारिक क्षेत्र के 81 प्रतिशत और घर पर काम करने वाले 14 लाख कामगारों को नौकरी गंवाने का गंभीर खतरा है.

विश्लेषक ने कहा, यदि यह प्रवृत्ति जारी रहती है, तो और अधिक नेपाली नौकरी की तलाश में देश छोड़ने के इच्छुक हो सकते हैं.

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