"जीवन का अधिकार ही है हमारे लिए मानवाधिकार"

जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 को हटाए चार महीने हो चुके हैं, लेकिन हालातों को लेकर विदेशी मीडिया हो या कोई अन्य देश, भारत के फैसले पर सवाल उठाते ही रहते हैं. भारत ने भी बड़ी बखूबी से इसका जवाब दिया है. एक बार फिर जब भारत दौरे पर आईं स्वीडन की विदेश मंत्री लिंड ने कश्मीर मामले पर सवाल पूछा तो भारतीय विदेश मंत्री ने उसका जबरदस्त जवाब दिया.   

"जीवन का अधिकार ही है हमारे लिए मानवाधिकार"

नई दिल्ली: कश्मीर को लेकर तमाम सवाल खड़े किए जाते आ रहे हैं. स्वीडन की विदेश मंत्री जो देश के राजा कार्ल सोलह गुस्ताव के साथ भारत के दौरे पर आईं थी, उन्होंने भारत से कश्मीर में मानवाधिकार को लेकर सवाल किए. लिंड ने कहा कि कश्मीर में लागू सभी प्रतिबंध मानवाधिकार के खिलाफ हैं. उन्हें जल्द से जल्द हटाया जाए. इसके बाद लिंड के इस सवाल का जवाब देते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारे लिए जीवन का अधिकार ही सबसे बड़ा मानवाधिकार है. कश्मीर मे लगाए गए प्रतिबंध उसी मानवाधिकार की रक्षा के लिहाज से लगाए गए हैं.

आतंकवाद के खात्मे को लेकर स्वीडन के साथ का रखा प्रस्ताव

सोमवार को स्वीडिश विदेश मंत्री और भारतीय विदेशमंत्री की मुलाकात हुई थी. उस मुलाकात में आतंकवाद के खात्मे को लेकर और सीमा पार से मिल रही चुनौतियों को लेकर आपसी सहयोग का समझौता हुआ था. जिसके बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ट्वीट कर कहा था कि मानवाधिकार का मतलब उनके लिए जीवन का अधिकार के बराबर है. मूलभूत अधिकार की बात करते हुए जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हो कर सभी देशों को साथ आना होगा. अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर पहले भी भारत ने आतंकवाद को अलग-थलग करने की नीति अपनाई है. 

स्वीडिश संसद में कश्मीर मामले पर जताई जा रही थी चिंता

लिंड ने स्वीडिश संसद में 27 नवंबर को कहा था कि वे मानवाधिकारों की रक्षा करने की अहमियत पर ज्यादा जोर देते हैं. कश्मीर के हालात को और खराब होने से बचाए जाने की जरूरत है. हालांकि, उन्होंने यह तब कहा जब वह भारत दौरे पर नहीं आईं थीं और ना ही कश्मीर मामले पर उनकी बातचीत भारतीय विदेशमंत्री से हुई थी.

उन्होंने तो यहां तक कह दिया था कि कश्मीर में स्थिति काफी चिंताजनक है और इसलिए स्वी़डन की सरकार इस पर नजदीक से नजर रख रही है. उसी दौरान उन्होंने यह कहा था कि स्वीडन और यूरोपीय संघ भारतीय सरकार से यह अपील कर रही है कि कश्मीर से प्रतिबंधों को हटाया जाए. 

भारत की संप्रभुता के खिलाफ जा कर स्वीडन कर रहा हस्तक्षेप

हालांकि, यह बोलते हुए स्वीडिश विदेशमंत्री ने भारत के पक्षों की परवाह नहीं की. भारत ने कई दफा यह कहा है कि कश्मीर उनका आंतरिक मामला है. इस पर किसी भी देश की दखलअंदाजी उनकी संप्रभुता के खिलाफ मानी जाएगी. स्वीडन भारत-पाकिस्तान के बीच युद्धविराम के वक्त से ही संयुक्त राष्ट्र की निरीक्षण कमिटी का हिस्सा है. इस कारण से भी कश्मीर मामले पर लगातार भारतीय विदेश नीति के बावजूद हस्तक्षेप कर रहा है. भारतीय विदेशमंत्री ने हालांकि स्वीडिश विदेश मंत्री से साफ-साफ शब्दों में कश्मीर के हालातों पर खासकर आतंकवाद के मुद्दे पर नियंत्रण करने के लिए अपनाई जा रही तरीकों के बारे में बताया.

पिछले कुछ दिनों में घाटी में हालातों पर नियंत्रण पा लेने के बाद से प्रतिबंधों में कुछ ढ़ील भी दी गई है. टेलिफोन सेवाओं को सक्रिय कर दिया गया है और पोस्टपेड मोबाइल सेवा को भी बहाल कर लिया गया है. स्कूल-कॉलेज भी खोल दिए गए हैं और तो और प्रशासन की ओर से कुछ बेहतरीन पहल भी किए जा रहे हैं. कई नीतियां और सरकारी मदद लोगों तक पहुंचाई जा रही है और छात्रों के लिए शिक्षण व्यावस्थाओं को दुरूस्त किया जा रहा है.