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खुलकर आमने-सामने आ गए ईरान-अमेरिका, क्या बढ़ रहे हैं युद्ध की ओर

ईरान की इस खुली चेतावनी और निर्णय के बाद पूरी दुनिया में खलबली मची हुई है. माना जा रहा है कि वह जल्द ही परमाणु हथियार बनाएगा और खुद को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की सूची में शामिल करेगा. इसके अलावा कई महीनों से जारी अमेरिकी-ईरानी गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच किसी भी रूप की युद्धक स्थितियां स्पष्ट lतौर पर बन रही हैं.

खुलकर आमने-सामने आ गए ईरान-अमेरिका, क्या बढ़ रहे हैं युद्ध की ओर

नई दिल्लीः आखिरकार ईरान ने यूरेनियम संवर्धन बढ़ाने का एलान कर ही दिया. अब ईरान न सिर्फ रिएक्टर ईंधन बना सकता है बल्कि परमाणु हथियार भी तैयार करने के लिए स्वतंत्र है. 2015 में हुए ईरान परमाणु समझौते की यह खास शर्त तोड़ते हुए ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने कहा कि ईरान अपने यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को फिर से शुरू करेगा. इससे पहले ईरान ने सोमवार को घोषणा की थी कि वर्ष 2015 के परमाणु करार में किए गए अपने वादों से पीछे हटकर उसने संवर्धित यूरेनियम उत्पादन में 10 गुणा से अधिक की वृद्धि की है. अमेरिका इस समझौते से पहले ही खुद को अलग कर चुका है. जानते हैं क्या रही है इस करार की पृष्ठभूमि-

अब खुल कर सामने आ गया है अमेरिका-ईरान का गतिरोध
परमाणु करार के पूरी तरह टूटते ही अमेरिका-ईरान का गतिरोध अब खुलकर सामने आ गया है. इसके पहले महीनों से दोनों देशों में जुबानी जंग जारी थी. इसकी शुरुआत तब हुई जब जून में अमेरिका ने एक वीडियो जारी किया था. इसमें उसने दावा किया था कि 13 जून को ओमान की खाड़ी में दो टैंकरों पर हुए हमले के लिए ईरान ज़िम्मेदार है.

दावा किया गया था कि पेंटागन की ओर से जारी किए गए धुंधले वीडियो में एक छोटा ईरानी जहाज़ नज़र आ रहा है और इस जहाज़ का क्रू हमले का शिकार हुए दो टैंकरों में से एक के बाहरी हिस्से से विस्फोटक निकाल रहा था. इसके पहले संयुक्त अरब अमीरात में चार हमले हुए थे, जिनके लिए भी अमेरिका ने ईरान को ही जिम्मेदार ठहराया था. तब ईरान सिरे से इन आरोपों को नकार रहा था. हालांकि तल्खी की शुरुआत हो चुकी थी.

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ट्रंप ने लगाए थे आर्थिक प्रतिबंध
साल 2018 में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए थे. यह वही प्रतिबंध थे जिन्हें पूर्व राष्ट्रपति ओबामा ने तब हटा लिया था जब ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम रोक दिया था. ट्रंप ने ईरान की अमेरिकी मुद्रा तक पहुंच तथा कार और कालीन समेत अन्य प्रमुख उद्योगों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे. इसके कुछ दिन बाद ईरान के कच्चे तेल की बिक्री पर प्रतिबंध लगाया था. ट्रंप ने कंपनियों को चेतावनी दी थी कि ईरान के साथ कारोबार जारी रखने पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे. हालांकि अमेरिका के फिर से प्रतिबंध लगाने पर ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी समेत समूह के अन्य देशों ने खेद जताया था.

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इससे पहले अमेरिका ने तोड़ा था परमाणु करार
मई 2018 में ट्रंप ने परमाणु समझौते से खुद को अलग कर लिया था. ट्रंप का कहना था, मेरे लिए यह स्पष्ट है कि हम इस समझौते के साथ रहकर ईरान के परमाणु बम को नहीं रोक सकते. ईरान समझौता मूल रूप से दोषपूर्ण है, उन्होंने इसे भयानक, एकतरफा सौदा करार दिया था. कहा कि यह समझौता ईरान के परमाणु बम बनाने के सभी मार्गों को अवरुद्ध करने के मौलिक उद्देश्य को हासिल करने में नाकाम रहा है.  इस मामले में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने अपनी अमरीकी यात्रा के दौरान कहा था कि वे मानते हैं कि ईरान के साथ हुआ समझौता बेस्ट नहीं था, लेकिन इसके अलावा कोई विकल्प भी नहीं था.  

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क्या था परमाणु समझौता 2015
जुलाई 2015 में ओबामा प्रशासन में हुए इस समझौते के तहत ईरान पर हथियार ख़रीदने पर पाँच साल तक प्रतिबंध लगाया गया था, साथ ही मिसाइल प्रतिबंधों की समयसीमा आठ साल तय की गई थी. बदले में ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा बंद कर दिया और बचे हुए हिस्से की निगरानी अंतरराष्ट्रीय निरीक्षकों से कराने पर राज़ी हो गया था.

कई साल तक ज़िद पर अड़े रहने के बाद ईरान छह देशों अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस, रूस और चीन के अलावा जर्मनी के साथ समझौते के लिए तैयार हुआ था. ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद किया था, बदले में ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों में ढील दी गई थी.

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अब दुनिया भर में मची है खलबली
ईरान की इस खुली चेतावनी और निर्णय के बाद पूरी दुनिया में खलबली मची हुई है. इसके साथ ही यह कयास लगाए जा रहे हैं कि ईरान का अब अगला कदम क्या होगा. माना जा रहा है कि वह जल्द ही परमाणु हथियार बनाएगा और खुद को परमाणु शक्ति संपन्न देशों की सूची में शामिल करेगा.

अभी तक विश्व में परमाणु शक्ति से संपन्न 9 देश हैं, जिनमें अमेरिका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस, चीन, भारत, पाकिस्तान, इस्राएल और उत्तर कोरिया शामिल हैं. ईरान पर अभी तक चोरी-छिपे परमाणु हथियार बनाने के आरोप लगते रहे हैं. इसके अलावा कई महीनों से जारी अमेरिकी-ईरानी गतिरोध के बाद दोनों देशों के बीच किसी भी रूप की युद्धक स्थितियां स्पष्ट बन रही हैं.

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