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पाकिस्तान के साथ मिलकर तुर्की पूरी दुनिया के लिए बनता जा रहा है खतरा

तुर्की का आतंकी समर्थक और झगड़ालू रवैया आए दिन दुनिया के लिए मुसीबत बनता जा रहा है. रूस से लेकर अमेरिका व फ्रांस से लेकर भारत तक सभी तुर्की के इस आक्रामक रवैये के खिलाफ हैं. अकेला पाकिस्तान ही तुर्की के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है. अब इसमें एक नया मोड़ आया है.   

पाकिस्तान के साथ मिलकर तुर्की पूरी दुनिया के लिए बनता जा रहा है खतरा

नई दिल्ली: अमेरिकी सेना के सीरिया से वापस बुलाए जाने के बाद तुर्की का कुर्दों पर आक्रमण पिछले कुछ दिनों में हर दिन सुर्खियों में बना रहता है. खुद की अर्थव्यवस्था को संभाल पाने में अक्षम पाकिस्तान अब तुर्की की मदद के लिए आतुर हुआ है. पाकिस्तान तुर्की को परमाणु हथियार बनाने का फॉर्मूला साझा करने की योजना बना रहा है. दरअसल, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैय्यप एर्दोगन ने हाल ही में एक बयान में परमाणु प्रसार संधि के विपरीत परमाणु हथियार बनाने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि कुछ देश परमाणु क्षमता संपन्न देश हैं, लेकिन उनका जोर है कि अन्य देशों के पास यह शक्ति नहीं हो सकती. इस बात को तुर्की मंजूर नहीं कर सकता.

वॉशिंगटन की नजर में हैं तुर्की की गतिविधियां 
एर्दोवान के इस बयान के बाद से ही अमेरिका इस बात की ओर नजर गड़ाए हुए है कि कहीं तुर्की को परमाणु हथियार बनाने का जरिेया मिल न जाए. इसके बाद से ही पहला शक पाकिस्तान पर गया. अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट में यह लिखा था कि अगर अमेरिका तुर्की नेता को अपने कुर्द सैनिकों को तबाह करने से नहीं रोक पाया तो हो सकता है कि वह उसे ईरान की तरह परमाणु तकनीक को पा लेने से नहीं रोक सकता. 

क्या है परमाणु अप्रसार संधि 
मालूम हो कि 1970 में अस्तित्व में आए परमाणु अप्रसार संधि के तहत परमाणु हथियार बेचने और परमाणु तकनीक साझा करने पर रोक लगाई गई थी. इसके तहत परमाणु तकनीक संपन्न देशों पर कुछ नियम व कानून लगाए गए थे ताकि दुनिया में अराजकता का माहौल न बन जाए. इसके तहत 1968 से पहले के परमाणु संपन्न देशों को इसके अंतर्गत मान्यता प्राप्त है. 

पाकिस्तान पहले भी कर चुका है परमाणु तकनीक बेचने की कोशिश
पाकिस्तान पर तुर्की को परमाणु तकनीक साझा किए जाने का शक कोई पहली दफा नहीं हो रहा. इससे पहले भी पाकिस्तान पर परमाणु तकनीक बेचने के आरोप लगे हैं. पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान ने इस बात को कबूला भी था. तुर्की से पहले पाकिस्तान पर ईरान, उत्तर कोरिया और लीबिया को परमाणु तकनीक बेचने के भी प्रमाण मिले थे. हालांकि, तुर्की पहले ही बम बनाने के लिए यूरेनियम का भंडार जमा कर रहा है. सूत्रों की मानें तो तुर्की ने पाकिस्तान के साथ परमाणु तकनीक के कालाबाजारी का समझौता भी किया है. 

कादिर ने कबूली थी परमाणु तस्करी की बात
बता दें कि पाकिस्तान के परमाणु वैज्ञानिक अब्दुल कादिर खान ने 2004-05 के दौरान टीवी प्रोग्राम पर यह बात कबूल की थी कि पाकिस्तान ने परमाणु तकनीक की तस्करी की थी. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि इसमें पाकिस्तानी सरकार का कोई रोल नहीं था. यह काम उसने अपनी मंजूरी से किया था. अब एक बार फिर पाकिस्तान तुर्की को परमाणु तकनीक बेचकर घातक हथियार बनाने के लिए प्रेरित कर रहा है. इससे विश्व में शांति को लेकर जो संतुलन बनाने की कोशिश की जा रही है, उसपर खतरे के बादल मंडराने लगे हैं.