RCEP प्रभाव: मिर्च और मेहंदी के जरिए भारत को मनाने की कोशिश करेगा चीन

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों असियान देशों के Regional comprehensive economic partnership यानी RCEP में शामिल होने से इनकार कर दिया था. क्योंकि उसे इन देशों से अपना व्यापार घाटा बढ़ने का खतरा था. लेकिन अब चीन ने इस खाई को पाटने के लिए भारत से हर्बल उत्पादों का आयात बढ़ाने का फैसला किया है. 

RCEP प्रभाव: मिर्च और मेहंदी के जरिए भारत को मनाने की कोशिश करेगा चीन
चीन और भारत के बीच व्यापारिक समझ बढ़ रही है

नई दिल्ली: भारत के RCEP में शामिल नहीं होने से चीन को बड़ा झटका लगा था. भारत के RCEP में सम्मिलित नहीं होने की सबसे बड़ी वजह भी चीन ही था. क्योंकि चीन से भारत आयात ज्यादा करता है और निर्यात बेहद कम. कमोबेश ऐसी ही स्थिति RCEP के सभी देशों के साथ भारत की है. लेकिन चीन ने भारत की चिंता को समझा है और उसके साथ अपना व्यापार घाटा कम करने का फैसला किया है. 

हर्बल उत्पादों के आयात पर जोर 


भारत के साथ व्यापार संतुलन बनाने के लिए चीन मेहंदी, मिर्च, चाय, मोरिंगा पाउडर जैसे भारतीय हर्बल उत्पादों में रुचि दिखा रहा है. चीनी व्यापारी भारत से इन वस्तुओं का आयात बढ़ाना चाहते हैं. कुछ ही दिनों पहले शंघाई में हुए इम्पोर्ट फेयर में चीन के कारोबारियों ने भारत के हर्बल उत्पादों के बारे में जानकारी इकट्ठा की. यही नहीं इस एक्सपो में तमिलनाडु के एक मेहंदी पाउडर एक्सपोर्टर ने 3 करोड़ रुपये से अधिक का ऑर्डर भी बुक किया गया. इसके अलावा वैल्यू ऐडेड चायपत्ती और मोरिंगा पाउडर जैसे उत्पादों का भारत से आयात करने में भी चीनी व्यापारियों ने दिलचस्पी दिखाई है. 

भारतीय गायों के उपले की विदेश में भारी डिमांड, पूरी खबर यहां पढ़ें

भारत चीन में है भारी व्यापार असंतुलन


मौजूदा वित्त वर्ष 2018-19 के शुरुआती छह महीनों में चीन से भारत को 8.5 अरब डॉलर की वस्तुओं का निर्यात किया गया. जबकि भारत ने चीन से 36.3 अरब डॉलर की कीमत के सामान का आयात किया. यानी शुरुआती छह महीनों में ही चीन भारत का व्यापार घाटा 27.8 अरब का रहा. जबकि पिछले वित्त वर्ष 2017-18 में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा 53.6 अरब डॉलर का था. भारत के RCEP से दूर रहने की वजह ही यही थी, क्योंकि चीन की ही तरह इसके कई सदस्य देशों के साथ भारत का व्यापार घाटा ज्यादा था. 

भारत की चिंता दूर करने की कोशिश 


भारतीय हर्बल उत्पादों में दिलचस्पी दिखाकर चुन भारत की व्यापारिक चिंता को दूर करने की कोशिश कर रहा है. चीन के अधिकारियों के मुताबिक इसीलिए चीन भारत को ऐसे कृषि उत्पादों के लिए ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन उपलब्ध कराना चाहता है, क्योंकि चीन में हर्बल उत्पादों की मांग बेहद ज्यादा है. चीन के इंपोर्ट एक्सपो में फार्मास्युटिकल्स, मेडिकल इक्विपमेंट एंड हेल्थकेयर प्रॉडक्ट्स, ऑटोमोबाइल, ट्रेड इन सर्विसेज, खाद्य और कृषि उत्पादों के बारे में ही मुख्य रुप से जानकारी इकट्ठा की गई.  


 
ये बहुत अच्छा है कि चीन के व्यापारियों ने भारतीय व्यापारियों की आर्थिक चिंताओं को समझा है. दोनों देशों का व्यापार घाटा कम होगा तो इसका लाभ दोनों देशों की बिजनेस कम्युनिटी को होगा. भारत और चीन भविष्य में दुनिया की अर्थव्यवस्था का केन्द्र बनने की क्षमता रखते हैं. ऐसे में दोनों देशों के बीच बढ़ती हुई समझ और आर्थिक सहयोग एक अच्छा संकेत है. 

पूरी तरह भरी गंगा नदी में गंगाजल ही नहीं. अनोखी खबर यहां पढ़ें