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भारत में निवेश का क्यों है सही समय, जानिए प्रमुख चार कारण

पीएम मोदी तीन दिवसीय थाइलैंड यात्रा पर हैं और इस दौरान उन्होंने भारत में निवेश करने के लिए सबसे सही मौका बताया है. अपनी इस बात के समर्थन में उन्होंने कराधान और नई नीतियों का हवाला दिया. प्रधानमंत्री मोदी की इन बातों का समर्थन डूइंज बिजनेस इंडेक्स की रिपोर्ट भी करती है, जिसमें भारत 14 स्थान की छलांग लगाकर 63वें नंबर पर आ गया है. इसके अलावा भारत में बिजनेस को लेकर भी कई सुधार हुए हैं जो निवेशकों को देश में निवेश करने के आकर्षित कर रहे हैं.

भारत में निवेश का क्यों है सही समय, जानिए प्रमुख चार कारण

नई दिल्ली: भारत बदलाव के दौर से गुजर रहा है. देश ने नियमित नौकरशाही वाली शैली में काम करना बंद कर दिया है. कारोबार के लिहाज से भारत में अब कई अवसर और सुविधाएं हैं. यह कुछ बातें प्रधानमंत्री मोदी ने बैंकॉक में निवेशकों से जुड़े एक कार्यक्रम में कही. उन्होंने निवेशकों को भारत में निवेश के लिए प्रोत्साहित करते हुए कहा कि भारत में निवेश के लिए यह सबसे बेहतर समय है. निवेश के लिए भारत अब दुनिया की सबसे आकर्षक अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. भारत में व्यापार करना अब पहले से कहीं अधिक सुगम हो गया है. भारत में करदाताओं के महत्व को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने उनके योगदान की सराहना की.

प्रधानमंत्री मोदी का बैंकॉक में यह कहना भारत के लिए आर्थिक सुविधाओं के दरवाजे खोलना और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को देश की विभिन्न योजनाओं में निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करना है. इस मौके पर प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हमने कराधान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किया है. भारत में सबसे अच्छी लोक अनुकूल कर व्यवस्था है. उन्होंने कर व्यवस्था में किसी गड़बड़ी को रोकने और पारदर्शिता लाने के लिये सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का जिक्र किया. हम अब फेसलेस' कर आकलन शुरू कर रहे हैं, जिससे किसी तरह के उत्पीड़न या गड़बड़ी की गुंजाइश नहीं होगी. फेसलेस कर आकलन में जांच के दायरे में आए करदाता और कर (असेसमेंट) अधिकारियों का आमना-सामना नहीं होता. पीएम मोदी तीन दिवसीय थाइलैंड यात्रा पर हैं और इस दौरान उन्होंने भारत में निवेश करने के लिए सबसे सही मौका बताया है. अपनी इस बात के समर्थन में उन्होंने कराधान और नई नीतियों का हवाला दिया. प्रधानमंत्री मोदी की इन बातों का समर्थन डूइंज बिजनेस इंडेक्स की रिपोर्ट भी करती है, जिसमें भारत 14 स्थान की छलांग लगाकर 63वें नंबर पर आ गया है. जबकि तीन साल पहले भारत इस सूची में 130वें नंबर पर था. इन नीतियों के अलावा और भी कई तर्क हैं जो भारत में निवेश को आसान बनाते हैं, उनपर डालते हैं एक नजर-

निवेश के लिए उचित माहौल
पिछले दिनों केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी निवेशकों से बातचीत में भारत में निवेश के लिए उचित माहौल बताया था. उन्होंने कहा था कि निवेश के लिए भारत से बेहतर जगह नहीं मिल सकती. दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में केंद्र सरकार सुधारों को लगातार आगे बढ़ा रही है. इससे भारत में कामकाज में आसानी की स्थिति है और निवेश के लिए माहौल बेहतर हुए हैं. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है. भारत में बेहतरीन कार्यबल उपलब्ध है और सरकार कानून के दायरे में रहकर सभी जरूरी कदम उठा रही है. इससे यहां निवेशकों को कुशल वर्कर भी मिल रहे हैं. इसके साथ ही पारदर्शिता का माहौल भी लोगों के हित में है. हालांकि कोर्ट की कार्रवाई में जरूर कुछ देरी होती है.

आसान यात्रा और उद्योगों की सुनवाई
उद्योगों की बढ़त के लिए सबसे जरूरी है यात्रा. देश में व्यापार को सफलता पूर्वक चलाने वाले कई व्यापारी मानते हैं कि भारत में यात्रा करना अब बेहद आसान है. ऐसा पहले नहीं था. इससे एक राज्य से दूसरे राज्य में उद्योग को बढ़ावा देने में आसानी होती है. ट्रेवल स्टार्टअप के तौर पर बिजनेस शुरू करने वाले युवा भी मानते हैं कि पंजीकरण के डिजिटलाइज़ेशन की सरकार की कोशिशों से कारोबार का माहौल काफी बेहतर हुआ है. वित्त मंत्री के अनुसार सरकार उद्दोगों की समस्या समझने के लिए हर हफ्ते किसी न किसी सेक्टर के साथ मुलाक़ात करती है. इससे औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़े लोगों और निवेशकों में यह संदेश जाता है कि सरकार उद्योग की बात सुनने के लिए प्रतिबद्ध है और उनकी समस्या दूर करने की कोशिश करती है.

लालफीताशही खत्म हुई है
लंबे वक्त तक उद्यमियों की शिकायत रही है कि एक कंपनी खड़ी करते वक्त भारत में नौकरशाही और लालफीताशाही का सामना करना पड़ता है. मंज़ूरी मिलने में देरी, कर और ज़मीन लेने में दिक्कतें और सामान सोर्स करने की चुनौतियां इसमें आम थी. हालांकि इन स्थितियों पर भी निवेशकों के विचार बदले हैं. इनसॉल्वेंसी और बैंकरप्सी सुधार, कंस्ट्रक्शन के परमिट, टैक्स भरने और सीमा पार व्यापार से जुड़ी प्रक्रिया में सुधार के कारण भारत में निवेश पहले से कहीं आसान हुआ है. मेक इन इंडिया अभियान के कारण भारत में मैन्युफैक्चरिंग को लेकर प्रतिस्पर्धा शुरू हुई है, इससे अलग-अलग क्षेत्रों में निवेश के विकल्प खुले हैं.

दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति
बड़े शहरों (दिल्ली-मुंबई) में डिजिटलाइजेश के सुधार दिखते हैं, लेकिन छोटे शहरों के सर्वे में शामिल न हो पाने से यहां का बदलता माहौल सामने नहीं आ पाता है. हालांकि नई रिपोर्ट के मुताबिक अब छोटे से छोटे बिजनेस और उद्योग में बड़े बदलाव दिख रहे हैं. व्यापारी बताते हैं कि बिजली कनेक्शन, ज़मीन खरीदने और प्रदूषण से जुड़े सर्टिफिकेशन जैसे काम ऑनलाइन हो जाते हैं. इसके अलावा लाइसेंस को लेकर भी ऑनलाइन फॉलोअप किया जा सकता है. बिल्डिंग का परमिट लेने की प्रक्रिया का सरलीकरण, कागज़ात इंटरनेट के ज़रिए जमा करने की सुविधा व्यापारियों को निवेश के लिए आकर्षित कर रही है.