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पाकिस्तान में इमरान सरकार के तख्तापलट के लिए आर या पार का संघर्ष

क्या पाकिस्तान में तख्तापलट की कहानी का आगाज फिर से हो गया है? क्या इमरान सरकार के खिलाफ आजादी मार्च की रैली एक नागरिक विद्रोह में बदलने वाली है? फिलहाल ताजा स्थिति ये है कि प्रदर्शनकारियों ने राजधानी इस्लामाबाद को घेर रखा है. वह कल यानी शुक्रवार को राजधानी में प्रवेश करेंगे.   

पाकिस्तान में इमरान सरकार के तख्तापलट के लिए आर या पार का संघर्ष

नई दिल्ली: पाकिस्तानी हुकूमत के खिलाफ लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ता ही जा रहा है. इमरान सरकार को न सिर्फ अल्पसंख्यकों के खिलाफ वाली सरकार के रूप में देखा जा रहा है, बल्कि देश की अर्थव्यव्यस्था की लुटिया डूबोने वाली सरकार भी कहा जा रहा है. इसी को लेकर पाकिस्तान के एक बड़े संगठन के नामी नेता ने पीएम इमरान के खिलाफ देशव्यापी एक मोर्चा खोल दिया है. जमात-ए-इस्लामी संगठन ने सरकार की घेराबंदी के लिए आजादी मार्च की शुरूआत कर दी है जिसके मुखिया पाक के एक बड़े धार्मिक नेता हैं, मौलाना फजुल-उर-रहमान. 

पाक पीएम के इस्तीफे की मांग

दरअसल, इमरान सरकार के खिलाफ जमात-ए-इस्लामी के हजारों कार्यकर्ता कराची में जुटे और सरकार के खिलाफ अपनी मांगों को पूरा करने का दबाव लिए आंदोलन में जुट गए. रैली को संबोधित करते हुए नेतृत्वकर्ता रहमान ने कहा कि इमरान सरकार एक साल पहले चुनाव में धांधली कर किसी तरह सत्ता में आई और अब सेना के इशारों पर सरकार चला रही है. उन्होंने कहा कि पीएम के खिलाफ लोग कराची से आंदोलन करते निकले हैं. फिलहाल सरकार के कान पर जूं तक नहीं रेंग रहा. लेकिन जब हुजूम राजधानी इस्लामाबाद पहुंचेगी तो सरकार क्या करेगी. पीएम इमरान को इस्तीफा देना होगा. 

पाकिस्तान में हो सकते हैं दोबारा आमचुनाव

फजुल-उर-रहमान ने इमरान सरकार के सामने कुछ मुख्य बिंदु रखे हैं जिनपर जमात-ए-इस्लामी के कार्यकर्ता और समर्थक जल्द से जल्द कोई जवाब चाहते हैं. उन्होंने सरकार से पाक में दोबारा पारदर्शी आमचुनाव की मांग की है. इसके अलावा इस्लामिक कानूनों और संस्थाओं के साथ छेड़छाड़ न करने की हिदायत दी है, और सबसे अहम इमरान खान को पाक पीएम के पद से इस्तीफा देने को कहा है. हालांकि, इमरान हुकूमत ने कहा कि उनके इस्तीफे का तो सवाल ही पैदा नहीं होता. 

रेड जोन में प्रवेश करने की तैयारी में प्रदर्शनकारी

इसके अलावा भी इमरान खान ने इस आंदोलन को आगाह किया है कि ये अपनी सीमाएं न लांघे. पाक पीएम ने कहा कि अगर आंदोलन रेड जोन में प्रवेश करने की कोशिश करती है तो मजबूरन उनकी सरकार को कुछ कड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं. रेट जोन इस्लामाबाद का वह क्षेत्र है जहां पाकिस्तानी संसद भवन, सुप्रीम कोर्ट और मंत्रालय सहित तमाम सरकारी इमारतें हैं. दरअसल, रहमान के नेतृत्व में आजादी मार्च गुरूवार को इस्लामाबाद पहुंच चुकी है और सरकार का घेराव करने के लिए रेड जोन में इकठ्ठा होने को कमर भी कस चुकी है. जेएआई के नेता रहमान ने तो ऐलान भी कर दिया था कि रैली प्रधानमंत्री आवास के करीब भी पहुंचेगी.

पाक पीएम ने भारत को ठहराया जिम्मेदार

उधर इमरान खान ने इसके पीछे भारत का हाथ है जैसी बातों का राग अलपना भी शुरू कर दिया है. उन्होंने मंच से कहा था कि खाइबर पख्तूनख्वा, बलूचिस्तान और अल्पसंख्यक इलाकों में लोगों के जेहन में जहर भरना शुरू कर दिया है. उन्होंने कहा कि भारत चाहता है कि पाकिस्तान की शांति को भंग किया जाए. उन्होंने रहमान के आजादी मार्च को भड़काने के पीछे भी भारत का ही हाथ बताया. 

आंदोलन से ही शिखर तक पहुंचे हैं इमरान भी

\पाकिस्तान में इस तरह से पहले भी सरकार के खिलाफ विद्रोह की आवाजें उठी हैं. दिलचस्प बात ये है कि वर्तमान में पाक के पीएम इमरान खान भी ऐसे ही सरकार के खिलाफ विद्रोह से ही राजनीतिक शिखर पर पहुंचे हैं. पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार जो फिलहाल पनामा पेपर भ्रष्टाचार के मामले में जेल में हैं, उनके खिलाफ इमरान खान ने महीनों आंदोलन कर उन्हें सत्ता से विस्थापित कराया था. इमरान खान को हालांकि सेना का साथ भी खूब मिला जिसकी पाकिस्तान के राजनीति में खूब चलती है. पाकिस्तानी पीएम को अपनी पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ का साथ मिला और वे पाकिस्तान की हुकूमत बन बैठे. जमात-ए-इस्लामी के मुखिया फजुल-उर-रहमान भी शायद वहीं तरीका अपना रहे हैं जो कभी इमरान खान ने अपनाया था. रहमान इससे पहले भी बहुत सी सरकारों में विरोध भी करते रहे और सरकार में मंत्री बनकर सत्ता का सुख भी खूब भोगा. नवाज शरीफ के प्रधानमंत्री रहते मंत्री भी रहे. सभी पार्टियों और धार्मिक उलेमाओं से इनकी बनती भी अच्छी है. 

जल्द बदल सकती है पाक की राजनीतिक सूरत

हालांकि, इमरान खान से निजी तौर पर या उनकी राजनीतिक पार्टी तहरीक-ए-इंसाफ के साथ मौलाना रहमान की कभी नहीं जम सकी. पाकिस्तान की राजनीति में इसके बाद कोई बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. गुरूवार को कराची से निकली हजारों की भीड़ इस्लामाबाद पहुंचते-पहुंचते लाखों की हो चली है. सरकार के घेराव को लेकर जितने सजग रहमान हैं, उतने ही इमरान सरकार भी इस आंदोलन को दबाने का प्रयास भी कर सकते हैं. सबसे दिलचस्प बात ये है कि सत्ता में आने के बाद से इमरान सरकार की खूब आलोचना हो रही है. सरकारी नौकरियों और अर्थव्यवस्था को लेकर गाज गिरते आ रहे हैं. ऐसे में सरकार को उखाड़ फेंकने के लिए आजादी मार्च अपने प्रयासों में सफल हो जाए तो हैरानी की बात नहीं होगी.