रोम में मिलेंगे बाइडन-मैक्रों, US की पनडुब्बी सौदे से नाराज फ्रांस से संबंध सुधारने की कोशिश

द्विपक्षीय सहयोग पर बातचीत जारी रखने के लिए बाइडेन और मैक्रों इस महीने के अंत में रोम में मिलेंगे. हालांकि, व्हाइट हाउस ने बैठक की तारीख नहीं बताई.  

Written by - Zee Hindustan Web Team | Last Updated : Oct 23, 2021, 11:15 AM IST
  • दोनों नेताओं ने फोन पर की बातचीत
  • दोनों के बीच कई मसलों पर हुई चर्चा
रोम में मिलेंगे बाइडन-मैक्रों, US की पनडुब्बी सौदे से नाराज फ्रांस से संबंध सुधारने की कोशिश

वाशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन (Joe Biden) और उनके फ्रांसीसी समकक्ष इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) इस महीने के अंत में रोम में मिलने के लिए सहमत हो गए हैं. इसकी घोषणा व्हाइट हाउस ने की.

हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर की चर्चा
समाचार एजेंसी सिन्हुआ ने व्हाइट हाउस के एक बयान के हवाले से कहा, यह समझौता शुक्रवार को दोनों नेताओं के बीच फोन पर हुई बातचीत के दौरान हुआ, जिसके दौरान उन्होंने अफ्रीका में साहेल क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा का समर्थन करने, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और अधिक सक्षम यूरोपीय रक्षा को सक्षम करने के प्रयासों पर भी चर्चा की.

अभी तारीख का नहीं हुआ ऐलान
बयान में कहा गया है कि द्विपक्षीय सहयोग पर बातचीत जारी रखने के लिए बाइडेन और मैक्रों इस महीने के अंत में रोम में मिलेंगे. हालांकि व्हाइट हाउस ने बैठक की तारीख नहीं बताई.

नवंबर में फ्रांस दौरे पर जाएंगी उपराष्ट्रपति
व्हाइट हाउस ने एक अलग बयान में कहा कि उपराष्ट्रपति कमला हैरिस अगले महीने मैक्रों से मिलने और 12 नवंबर को लीबिया में पेरिस सम्मेलन में भाग लेने के लिए फ्रांस का दौरा करेंगी. 

पनडुब्बी सौदे के बाद बढ़ी तल्खी कम करने की कोशिश
हैरिस की यात्रा को अमेरिका-फ्रांस संबंधों को सुधारने के लिए बाइडेन प्रशासन के निरंतर प्रयासों के रूप में देखा जा रहा है, जिसे पिछले महीने वाशिंगटन, यूके और ऑस्ट्रेलिया द्वारा घोषित विवादास्पद ऑकस परमाणु पनडुब्बी सौदे के कारण झटका लगा था.

फ्रांस हो गया था नाराज
सितंबर के मध्य में, अमेरिका और यूके ने कहा कि वे नवगठित त्रिपक्षीय सुरक्षा समझौते के तहत परमाणु-संचालित पनडुब्बियों को प्राप्त करने में ऑस्ट्रेलियाई नौसेना का समर्थन करेंगे, जिससे फ्रांस ऑस्ट्रेलिया को 12 पारंपरिक पनडुब्बियां प्रदान करने के मौजूदा अनुबंध से वंचित हो जाएगा. बिना किसी परामर्श के अचानक किए गए कदम से नाराज फ्रांस ने विरोध में अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया में अपने राजदूतों को वापस बुला लिया.

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बाइडेन ने स्वीकार किया कि सितंबर के अंत में मैक्रों के साथ उनकी आखिरी मुलाकात के दौरान इस मुद्दे को बेहतर तरीके से संभाला जा सकता था.

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