close

खास खबरें सिर्फ आपके लिए...हम खासतौर से आपके लिए कुछ चुनिंदा खबरें लाए हैं. इन्हें सीधे अपने मेलबाक्स में प्राप्त करें.

साइबर क्राइम से जूझने को भारत से हाथ मिलाना चाहते हैं ये देश

डार्क नेट की दुनिया का आतंक किसी बड़े खतरे से कम नहीं जिससे निपटने को कई देश एक दूसरे से हाथ मिला रहे हैं. भारत में इसका असर क्या है और किन देशों को भारत के तकनीकी दक्षता की जरूरत आन पड़ी है, आइए देखते हैं.

साइबर क्राइम से जूझने को भारत से हाथ मिलाना चाहते हैं ये देश

नई दिल्ली: तकनीक से विकसित हो रही दुनिया जितनी आसान लगती है, उतना ही भयानक इसका रूप है. मोबाइल और गैजेट्स की स्क्रीन पर जो चीजें प्रत्यक्ष नजर आती हैं, उसके पीछे एक डार्क नेट की मायावी दुनिया है जिसके शिकार आए दिन लोग होते ही रहते हैं. इसे सायबर बुलिंग और साइबर क्राइम कहा जाता है. जो देश जितनी ज्यादा विकसित हैं या यूं कहें कि तकनीकी सुविधाओं से लैस हैं, वहां साइबर क्राइम से जुड़ी समस्याएं भी उतनी ही अधिक है. शायह यहीं कारण है कि दुनिया के विकसित देश भी इससे निपटने के लिए साइबर सुरक्षा क्षेत्र में मदद मांग रहे हैं.

दुनिया के लिए एक भीषण खतरा बनते जा रहे इस साइबर क्राइम से लातिन अमेरिकी और अफ्रीकी देशों में ये समस्याएं इतनी ज्यादा बढ़ गई हैं कि इन देशों ने भारत से साइबर सुरक्षा तकनीक साझा करने की मांग की है. हालांकि, भारत खुद भी इस खतरे से बाहर नहीं है. लेकिन लातिन अमेरिकी देशों को भारत की दक्षता पर भरोसा है और इसलिए वे तकनीकी साझेदारी बढ़ाने के लिए लगातार सहयोग मांग रहे हैं.

70 फीसदी सायबर बुलिंग के मामले फेसबुक से जुड़े

तमाम देश इस समस्या से जूझने के लिए सेफ नेट तकनीक को विकसित करने पर बल दे रहे हैं ताकि इन समस्याओं का निपटारा हो सके. ये भी एक विडंबना है कि भारत साइबर बुलिंग के मामले में विश्व में तीसरे स्थान पर है. इसके अलावा माइक्रोसॉफ्ट के आंकड़ों के मुताबिक 81 फीसदी युवा ऑनलाइन बुलिंग का शिकार होते हैं. फेसबुक के माध्यम से 70 फीसदी लोग साइबर बुलिंग के शिकार होते हैं. इसके अलावा भारत में हर चार में से एक बच्चा साइबर बुलिंग का शिकार होता है यानी कि 43 फीसदी बच्चे इस ऑनलाइन क्राइम के शिकार होते हैं. उसी रिपोर्ट में ये भी बताया गया कि लड़कों के मुकाबले लड़कियां इसकी शिकार ज्यादा होती हैं.

विकसित देशों में इसका तोड़ निकालने की होड़

दुनिया में तमाम विकासशील देशों ने इस चुनौती से निपटने के लिए कमर तो कस ली है, लेकिन अब तक कुछ खास हासिल हो नहीं पाया है. अमेरिका, चीन, ऑस्ट्रेलिया और जापान सहित सभी बड़े देशों ने इसके काउंटर-अटैक के लिए एंटी-बुलिंग और सेफनेट जैसे अविष्कार जरूर किए हैं जो फिलहाल नाकाफी है. भारत के आंकड़ें तो और भी भयावह हैं. जल्द ही इससे निपटा न गया तो डार्क नेट की ये दुनिया विध्वंस मचा देगी. भारत में साइबर बुलिंग के शिकार लोगों में 2 से 9 गुणा तक सुसाइड करने की प्रवृत्ति बढ़ जाती है.