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मलेशिया को मुश्किल में डाल रहे हैं महाथिर मोहम्मद, नहीं बदले तेवर

मलेशिया से भारत ने पाम ऑयल का आयात करना कम कर दिया है. लेकिन भारत के इस कूटनीतिक कदम से मलेशियाई बाजार पर तो प्रभाव पड़ा है पर वहां के प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद पर इसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है. लेकिन सच ये है कि उनकी भारत विरोधी नीतियां मलेशिया को भारी नुकसान पहुंचा सकती हैं.  

मलेशिया को मुश्किल में डाल रहे हैं महाथिर मोहम्मद, नहीं बदले तेवर

नई दिल्ली: भारत-मलेशिया के संबंधों में सुधार की गुंजाइश फिलहाल नजर नहीं आ रही. मलेशियाई प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद के भारत के साथ संबंधों को लेकर दिए गए बयान के बाद तो कम से कम यहीं अंदाजा लगाया जा सकता है. मंगलवार को पीएम महाथिर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर को लेकर उनके पक्ष पर वे अब भी कायम हैं. पीटीआई से मिली जानकारी के अनुसार प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने कहा कि वे मन की बात बोलते हैं और फिर उससे पलटते या बदलते नहीं हैं.

हालांकि उन्होंने अपने बयान के मायनों में थोड़ा बदलाव करते हुए कहा कि हमने ये महसूस किया था कि यूएन के प्रस्ताव से कश्मीर के लोगों को फायदा हुआ था और सबकुछ सही था. इसके बाद उन्होंने कहा कि न सिर्फ भारत और पाकिस्तान को बल्कि अमेरिका जैसे देशों को भी संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का पालन करना चाहिए. मालूम हो कि पिछले दिनों कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद पीएम महाथिर ने भारत के इस कदम की संयुक्त राष्ट्र के सदन में निंदा की थी. मलेशिया के इस कदम से भारत को आश्चर्य हुआ था. इसके बाद से ही मलेशिया और भारत के सामरिक रिश्ते एक अलग मोड़ पर आ गए. 

मलेशिया को बाजार की है जरूरत: पीएम महाथिर
मलेशियाई प्रधानमंत्री यहीं नहीं रूके देश से पाम ऑयल की घटती मांगों के सवाल पर जवाब देते हुए कहा कि मलेशिया एक व्यापारिक राष्ट्र है और उसे अपने उत्पादों के लिए बाजार की जरूरत है लिहाजा हम किसी के लिए अच्छे हो सकते हैं. लेकिन कई बार हमें अपने मन की बात बोलना भी पड़ता है. हो सकता है कि वह बात किसी को पसंद न आए, इसलिए हम उसे नापसंद भी हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि कई दफा संबंध तनावपूर्ण हो जाते हैं पर हम लोगों से दोस्ताना व्यवहार भी करते हैं.

भारत के खरीददारी रोकने से मुश्किल में मलेशिया
ये तमाम बातें तब सामने आईं हैं जब भारत ने मलेशिया को उसके दिए गए बयान के बाद कूटनीतिक रूप से सबक सिखाने की योजना को अंजाम देना शुरू किया. भारत के लिए यह सब बहुत मुश्किल नहीं रहा. भारत मलेशिया के पाम ऑयल का न सिर्फ सबसे बड़ा उत्पादक बल्कि सबसे बड़ा खरीददार देश भी है. भारत और मलेशिया के बीच कुल 17.2 बिलियन डॉलर का व्यापार है जिसमें भारत 10.8 बिलियन डॉलर का आयात करता है. इस आयात का एक बड़ा हिस्सा पाम ऑयल के रूप में किया जाता है.भारतीय कंपनियां मलेशिया से आयात होने वाले पाम ऑयल की खरीदारी को अब बंद करने वाली हैं. भारत अब मलेशिया की जगह इंडोनेशिया से पाम ऑयल के आयात करने की योजना बना रहा है. भारत के इस फैसले से मलेशिया को भारी राजस्व घाटा उठाना पड़ रहा है

कश्मीर पर तथ्यों के बिना दिए बयान से बदली सूरत
भारत के राजनायिक संबंध आसियान देशों से हमेशा ही मित्रता वाले रहे हैं जब तक की किसी देश की ओर से कूटनीतिक चाल न खेली गई हो. हाल के दिनों में भारत-मलेशिया संबंध दोनों ही सरकारों के लिए सिरदर्द बने हुए हैं. इस बिगड़ते संबंधों की नींव मलेशिया ने खुद रखी है. दरअसल, कश्मीर के मामले में मलेशिया की दखलअंदाजी के बाद इसकी शुरुआत हुई. कश्मीर से अनुच्छेद 370 के हटाए जाने के बाद मलेशियन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने आश्चर्यजनक रूप से ये मामला संयुक्त राष्ट्र में उठाया. कश्मीर को भारत का आंतरिक मामला बताए जाने के बावजूद मलेशियन प्रधानमंत्री महाथिर मोहम्मद ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के कश्मीर पर प्रस्ताव लाए जाने के बाद भी भारत ने कश्मीर के विशेषाधिकार को खत्म कर उसे अपने में मिला लिया. मलेशिया के इस आश्चर्यजनक रवैये के बाद भारत ने कूटनीतिक स्तर पर दबाव डालने के लिहाज से मलेशियन पाम ऑयल पर टैरिफ बढ़ानी शुरू कर दी.